मैं अपनी लाइफ में कुछ अच्छा नहीं कर पाया...लिख फांसी पर झूला जनसेवा केंद्र संचालक
Hamirpur News - भरुआ सुमेरपुर में एक जनसेवा केंद्र संचालक, अंकित कुमार, ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उसके मरने के बाद उसके लोन का कोई भुगतान नहीं किया जाए और उसकी बेटी के नाम घर कर दिया जाए। घटना के बाद परिवार में शोक की लहर है।

भरुआ सुमेरपुर, संवाददाता। ‘मैं अपनी लाइफ में कुछ अच्छा नहीं कर पाया,मेरे मरने के बाद जो भी लोन चल रहे हैं, मेरा डेथ सर्टिफिकेट बैंक में जमा कर देना लोन भरने की जरूरत नहीं है। मुझे माफ करना...’ ये अंतिम शब्द हैं एक जनसेवा केंद्र संचालक के जिसने सोमवार रात बांकी रोड स्थित कांशीराम कॉलोनी में फांसी लगा खुदकुशी कर ली। तीन दिन पहले ही केंद्र संचालक की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया था। घटना स्थल से एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उसने अपने आखिरी शब्द लिखे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है।
कांशीराम कॉलोनी निवासी 35 वर्षीय अंकित कुमार ओमर कस्बे में बालाजी कंप्यूटर्स के नाम से जनसेवा केंद्र का संचालन करता था। अभी हाल ही में उसने अपना निजी मकान बनाया है। जिसमें परिवार के सदस्य रहने लगे थे। कॉलोनी में कुछ सामान रखा था, जिसे मकान में लाकर रखा जा रहा था। सोमवार की देर रात अंकित कॉलोनी से कुछ सामान निकालने गया था। लेकिन वापस लौटकर नहीं आया। परिजन जब उसे खोजते हुए कॉलोनी पहुंचे तो कमरे में अंकित का शव लटका मिला। आनन-फानन में शव फंदे से उतारकर पीएचसी लाया गया, जहां डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी। घटना स्थल से पुलिस ने एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। जिसमें अंकित ने अपनी मर्जी से आत्महत्या करने की बात लिखी है। उसने आगे लिखा है कि उसका मकान बेटी के नाम कर दिया जाए। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर लिया है।पोस्टमार्टम न कराने का निवेदनअंकित के सुसाइड नोट में पोस्टमार्टम न कराने का निवेदन किया गया है। यह लाइन पढ़कर लोग चौंक गए। अंकित ने लिखा है कि बॉडी का पोस्टमार्टम न कराया जाए। डेथ सर्टिफिकेट बैंक में जमा कर देना।केंद्र संचालक का परिवार मूलरूप से पुखरायां निवासीअंकित के छोटे भाई अमर ने दस माह पूर्व फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मां की बीमारी से मौत हो चुकी है। अंकित का परिवार मूलरूप से कानपुर देहात के पुखरायां निवासी था। बचपन में ही मां सभी बच्चों को लेकर सुमेरपुर अपने मायके में आकर रहने लगी थी। दोनों भाइयों ने मेहनत करके अपने परिवार का भरण-पोषण किया। तीन दिन पूर्व अंकित की पत्नी खुश्बू ने एक बेटी को जन्म दिया है। अचानक हुई इस घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।पति का शव देख बेसुध हुई पत्नीसरकारी अस्पताल से प्रसव के बाद पत्नी खुश्बू को घर छोड़ने के बाद अंकित ने कॉलोनी में जाकर आत्महत्या कर ली। पति की मौत की खबर सुनकर चलने-फिरने में असमर्थ पत्नी निजी गाड़ी से अस्पताल आई और पति के शव को देख कर बेसुध हो गई। जिसे परिजन ढांढस बंधाते हुए दिखे।अंकित के कमरे से बरामद सुसाइड नोटमैं अनिल कुमार पुत्र राजेंद्र प्रसाद हम अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रहे हैं। इसमें किसी का कोई दोष नहीं है। मैं अपनी लाइफ में कुछ अच्छा नहीं कर पाया। मैं अब बहुत परेशान हूं, मेरे मरने के बाद मेरा घर मैं अपनी प्यारी बिटिया गौरी (गुन्नू) के नाम में करवा देना आप लोग, अगर उसे कुछ होता है तो मेरी प्यारी नन्ही बिटिया के नाम ट्रांसफर करवा दीजिएगा। आपसे निवेदन है कि मेरी बॉडी के साथ पोस्टमार्टम न किया जाए। मेरे मरने के बाद जो भी लोन चल रहे हैं तो मेरा डेथ सर्टिफिकेट बैंक में जमा कर देना क्योंकि लोन लेने वाल को कोई आगे-पीछे नहीं है और न ही लोन भरने की जरूरत है। मुझे माफ करना...
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