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हमीरपुर

बजट के अभाव में नहीं बुझ रही कपसा के लोगों की प्यास

हिन्दुस्तान टीम,हमीरपुरPublished By: Newswrap
Sun, 13 Jun 2021 11:11 PM
बजट के अभाव में नहीं बुझ रही कपसा के लोगों की प्यास

मौदहा। संवाददाता

तहसील क्षेत्र के सबसे अधिक पेयजल संकट से बेहाल कपसा गांव में 3.85 करोड़ की सरकारी योजना बजट के अभाव में आज तक पूरी नहीं हो सकी। वहीं नमामि गंगे योजना के पानी मुहैया कराने के सरकारी दावे फिलहाल खोखले साबित हो रहे हैं। इस इस गांव के लोग एक किलोमीटर दूर से कुएं के पानी से अपनी गुजर-बसर कर रहे हैं।

क्षेत्र के पेयजल के संकट का सामना कर ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार लंबे समय से नमामि गंगे योजना का ढिंढोरा पीट रहीं हैं। गांव-गांव पानी देने की योजना के लिए एक एडीएम इसी योजना के लिए तैनात है लेकिन फिलहाल इस योजना से पानी मिलने की उम्मीद नहीं है। बताते चलें कि 35 वर्ष पूर्व कपसा, इचौली व खंडेह समेत अन्य गांवों के लिए बांदा की केन नदी से खण्डेह पेयजल योजना शुरू की गई थी, जिससे यहां के बारह पानी के संकट वाले गांवों के ग्रामीणों को पानी मिलना था जो कुछ दिन में ही विफल हो गई और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरसने लगे। कपसा गांव को पानी देने के लिए कई बार योजनाएं बनी सरकार द्वारा कुछ पैसा भी मिला, लेकिन नलकूप विफल होने के चलते ग्रामीणों को पानी नहीं मिला।

2017-18 में इस गांव को पानी देने के लिए 3.85 करोड़ रुपया स्वीकृत किए गए थे। इनमें एक करोड़ 22 लाख 34 हजार शासन से जल निगम को दिया, जिससे कपसा से चार किलोमीटर दूर सिजवाही गांव में दो नलकूप स्थापित होने के साथ ही कपसा में पानी की टंकी निर्मित कर पाइप लाइन द्वारा ग्रामीणों को पानी पहुंचाने का कार्य होना था। यह कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है लेकिन सरकार ने एक बार जल निगम को रुपया देकर दोबारा रुपया नहीं दिया, जिससे कार्य बाधित हो गया और तीन साल पूरे होने के बाद भी ग्रामीणों को पानी नसीब नहीं हो सका।

नवनिर्वाचित प्रधान विजय प्रताप वर्मा ने बताया कि गांव के लोग सुबह से शाम तक एक किलोमीटर दूर से कुएं से पानी भरकर अपना काम चला रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा ग्रामीणों को पानी सुलभ कराने के सारे दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। जल निगम की पेयजल योजना योगी सरकार में धन के अभाव में ठप पड़ी है। इस गांव में काम कराने वाले अवर अभियंता रामरतन ने बताया कि नलकूप व टंकी का काम पूरा हो चुका है, पाइप लाइन भी डाली जा चुकी लेकिन स्वीकृत धन का बाकी पैसा नहीं मिला जिससे कार्य पूरा होना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है।

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