Seven Mahalakshmi worship of faith and faith - आस्था व विश्वास के सात महालक्ष्मी का पूजन DA Image

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आस्था व विश्वास के सात महालक्ष्मी का पूजन

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सुख-समृद्धि व संतान सुख की कामना को लेकर महालक्ष्मी व्रत का अनुष्ठान सभी जगह महिलाओं द्वारा किया गया। मिट्टी के हाथी के साथ लक्ष्मी का पूजन अर्चन किया और कथा सुनी इसके बाद महिलाओं ने व्रत पूरा किया।

पौराणिक तथ्यों के अनुसार यह विशेष व्रत महाभारत काल से ताल्लुक रखता है। वेद व्यास से गांधरी व कुंती ने सुख-समृद्धि व संतान सुख देने वाला व्रत बताने को कहा था। तब गांधरी व कुंती ने इस व्रत को किया था। गांधरी ने कुंती को नहीं बुलाया था। उसके सौ पुत्रों ने मिट्टी का विशाल हाथी बना दिया था। जिसमें गांधरी को पूजा करनी थी। कुंती निराश थी यह देखकर पांडवों ने मां से निराशा का कारण पूंछा तो कुंती ने गांधारी द्वारा न बलाए जाने की बात सुनकर अर्जुन ने मां से कहा था कि हम इंद्र से ऐरावत हाथी मंगा रहे हैं आप उसकी पूजा करना। ऐसा होने पर गांधरी व उसके पुत्र देखकर रह गए थे। तभी से इस व्रत के अनुष्ठान की परंपरा चली आ रही है। शनिवार को महिलाओं ने महालक्ष्मी का व्रत रखने के बाद दोपहर में सोलह गांठों का धागा बनाकर, दूब, पकवान, फल, पुष्प व जल से पूजा अर्चना कर महालक्ष्मी की कथा सुनी। इसके बाद महालक्ष्मी व्रत का पारण किया।

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  • Web Title: Seven Mahalakshmi worship of faith and faith