भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
हमीरपुर, संवाददाता।शहर के रमेड़ी मोहल्ले में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सुदामा चरित्र एवं कलियुग का मार्मिक वर्णन किया गया। श्रीमद्भागवत कथ

हमीरपुर, संवाददाता। शहर के रमेड़ी मोहल्ले में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में सुदामा चरित्र एवं कलियुग का मार्मिक वर्णन किया गया।
सुदामा और श्रीकृष्ण का प्रेम
श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान कथावाचक सर्वेश द्विवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के दिव्य चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा चरित्र सच्ची मित्रता, नि:स्वार्थ प्रेम, विनम्रता और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण है। निर्धनता के बावजूद सुदामा ने कभी अपने धर्म और स्वाभिमान का त्याग नहीं किया। जब वे द्वारका पहुंचे तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र का अत्यंत प्रेम और सम्मान के साथ स्वागत किया तथा बिना मांगे ही उनके सभी कष्ट दूर कर दिए।
कलियुग का स्वरूप
कथा के दौरान कलियुग के स्वरूप का भी विस्तार से वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का संकीर्तन ही सबसे सरल और प्रभावी साधन है, जिससे व्यक्ति मानसिक शांति, आत्मिक उन्नति तथा ईश्वर की कृपा प्राप्त कर सकता है।
कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन एवं आरती में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया। आयोजन में राजीव शुक्ला.दुर्गेश शुक्ला.,अवधेश शुक्ला,उमेश शुक्ला, दया शंकर द्विवेदी ,सुनील मिश्रा,कविता,अमिता,जया योगिता,डॉ. तोयज शुक्ला आशीष अवस्थी मनु दीक्षित मौजूद रहे ’
खड़ेहीलोधन में श्री विष्णु महायज्ञ में उमड़ रही भीड़
मुस्करा। खड़ेही लोधन में चल रही श्री विष्णु महायज्ञ के प्रथम दिन यज्ञाचार्य ने यज्ञवेदी का विधिवत हवन पूजन कराया गया। वहीं कार्यकम में आए महामंडेश्वर सहित कई विद्वान वक्ताओं ने अपने मुखारबिंद से सभा मंच पर अमृतमयी वाणी सुनाकर भाव विभोर कर दिया।
यज्ञ का विधिवत प्रारंभ
रविवार को प्रथम दिन कानपुर से आए यज्ञाचार्य पं.संजय शास्त्री वैदिक ने सुबह से विधिवत यज्ञ वेदियों में 16 प्रकार का पूजन कराया। इसके चार वेद, 18 पुराणों के पाठों को विधिवत शुरू कराया। दो बजे बाद आयोजित सत्संग सभा में कानपुर से आए सेवानिवृत्ति पुलिस इंस्पेक्टर रज्जनलाल त्रिपाठी ने कहा कि राम का नाम ही सारी सारी समस्या का समाधान है। भगवान राम की महिमा है। इसी क्रम में बांदा से आए जैनेंद्र पाठक, सुमन रामायणी, स्वामी यशवंत शास्त्री, स्वामी सज्जनांदन, स्वामी विवेकानंद में अपने-अपने मुखारबिंद से अमृतमयी वाणी सुनाकर भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
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