
गांव में मातम का माहौल, किसानों में नीलगायों का डर
Hamirpur News - गांव में मातम का माहौल, किसानों में नीलगायों का डर 0 जनपद के बीहड़ के इलाकों में बड़े पैमाने पर पाई जाती हैं नीलगाय फोटो नंबर 08- राजवीर सिंह (फाइल फोटो
राठ, संवाददाता। नीलगाय के हमले में किसान की मौत से जहां गांव में मातम का माहौल है, वहीं किसानों में नए तरीके का डर समा गया है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में नीलगायों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। कभी शिकारी इनका शिकार करते थे तो इनकी संख्या सीमित थी, लेकिन जब से इन्हें मारने को लेकर रोकटोक शुरू हुई है, तब से इनकी संख्या भी तेजी से बढ़ी है। धगवां गांव निवासी राजवीर सिंह शनिवार की सुबह अपने घर से खेत पहुंचे थे। आठ बीघा के काश्तकार राजवीर ने गन्ने की फसल तैयार की है। गुड़ की पिराई कराने को लेकर खेत में ही मिट्टी की भट्ठी बनाते समय उसके ऊपर नीलगाय ने हमला किया और तब तक अपनी सांगों और खुरों से मारा जब तक कि किसान की मौत नहीं हो गई।

इस घटना से गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि कभी नीलगाय के शिकार पर रोक नहीं थी। लोग इनका शिकार करने भी आते थे, मगर कुछ सालों से नीलगायों के मारने को लेकर पकड़ा-धकड़ी की वजह से अब कोई इन्हें मारने का रिस्क नहीं उठाता है। बीडीओ और क्षेत्रीय वनाधिकारी से मिलती है नीलगायों को मारने की परमीशन प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि नए शासनादेश में फसलों को नुकसान पहुंचाने के एवज में नीलगायों को मारे जाने की परमीशन बीडीओ और क्षेत्रीय वनाधिकारी संयुक्त रूप से दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि नीलगायों की बुंदेलखंड में बहुतायत है। इनसे फसलों को भी नुकसान पहुंचता है। हिंसक हो रहा नीलगाय जनपद में बड़ी संख्या में नीलगाय पाए जाते हैं। अभी तक नीलगाय किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे थे, लेकिन अब इनका मिजाज हिंसक हो गया है। इनके स्वभाव में आ रहे बदलाव ने किसानों में दहशत पैदा कर दी है। स्थानीय किसानों का कहना है कि नीलगायों के झुंड के झुंड खेतों में घूमते रहते हैं। इन्हें भगाने के लिए उनके पास सिर्फ लाठी-डंडे होते हैं। कई बार नीलगायों के झुंड पलटकर हमला कर देते हैं। जिससे किसानों की जान पर बन आती है। नीलगाय के हमले में यदि किसान की मौत हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी और नियमानुसार पीड़ित परिवार को दैवीय आपदा राहत कोष से चार लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाई जाएगी। आमतौर पर नीलगाय हिंसक नहीं होते हैं, मगर कई बार छेड़ने से भड़क जाते हैं। अनिल कुमार श्रीवास्तव, प्रभागीय वनाधिकारी।

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