
हमीरपुर में निलंबन : प्रोत्साहन राशि की आधी रकम लेने के बाद ही देते थे टूल किट
Hamirpur News - हमीरपुर में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से अवैध वसूली के मामले में सहायक आयुक्त रवि वर्मा और सहायक प्रबंधक संतोष राव को निलंबित किया गया है। जांच में पाया गया कि विभागीय कर्मचारी और दलाल लाभार्थियों से पैसे मांगते थे। इस मामले में पहले ही जिला प्रबंधक मिलन कुमार को बर्खास्त किया जा चुका है।
हमीरपुर, संवाददाता। जिला उद्योग कार्यालय में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से अवैध वसूली के मामले में सहायक आयुक्त/प्रभारी उपायुक्त उद्योग रवि वर्मा और सहायक प्रबंधक संतोष राव के निलंबन की खबर पर विभाग में हड़कंप की स्थिति है। जिलाधिकारी की जांच में सामने आया कि विभागीय कर्मचारी और दलालों के माध्यम से लाभार्थियों से लेनदेन होता था। लाभार्थियों को टूल किट तभी दी जाती थी जब वह आधी धनराशि देने के लिए हामी भर देता था। जिला उद्योग केंद्र में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के नाम पर लाभार्थियों को ऋण और सब्सिडी दिलाने के नाम पर उगाही की जा रही थी। लाभार्थियों ने इसकी शिकायत डीएम घनश्याम मीणा से की तो उन्होंने सीडीओ और एडीएम की संयुक्त टीम बनाकर जांच के आदेश दिए।
जांच रिपोर्ट में रवि वर्मा और संतोष राव दोषी मिले। शासन को रिपोर्ट भेजने के बाद सोमवार को दोनों को निलंबित कर दिया गया। इस मामले में जिला प्रबंधक मिलन कुमार को बर्खास्त किया जा चुका है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत लाभार्थियों के ऑनलाइन आवेदन कराने और सब्सिडी दिलाने के नाम पर अवैध वसूली की कई शिकायतें मिलीं। करीब पांच सालों से विभागीय कर्मचारियों और दलालों के माध्यम से उगाही का खेल चल रहा था। उन्होंने बताया कि शासन से संचालित विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लिए ब्लाक स्तर पर लाभाथिर्यों का चयन होता है। उन्हें साक्षात्कार के नाम पर चयन से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था जबकि दलालों द्वारा नाम भेजे जाने पर विभिन्न ट्रेडों में कई-कई बार लाभ दे दिया जाता था। इतना ही नहीं कुछ तो ऐसे मामले कुरारा विकास क्षेत्र के आए जहां एक परिवार के लोगों को ही बार-बार लाभ दिया गया। इसी तरह का हाल मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का भी रहा। इस योजना में चयन से लेकर बैंक से ऋण स्वीकृति व सब्सिडी पाने के लिए चक्कर लगाने के बाद लाभार्थी थक-हारकर क्षेत्रीय दलालों का सहारा लेने को मजबूर होते रहे। डीएम ने दोनों मामलों की जांच कराई तो आरोप सही निकले। इन्हीं आरोपों पर 25 दिसंबर को जिलाधिकारी ने उपायुक्त उद्योग रवि वर्मा का चार्ज छीनकर एसडीएम अभिषेक कुमार को सौंप दिया था।

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