
चिकासी-मोहाना पुल की ज्वाइंट तोड़कर शुरू मरम्मत
Hamirpur News - 0 45 साल पुराने पुल की कमजोर हो चुकी है स्लैब, सरिया भी निकल आई हैं बाहर0 गुरुवार की शाम से बेतवा नदी के पुल पर सभी तरह का यातायात रोका फोटो नंबर 26-
बेतवा नदी पर राठ-उरई मार्ग स्थित करीब 45 वर्ष पुराने चिकासी-मोहाना पुल को सुरक्षा कारणों से बंद कर उसकी मरम्मत शुरू कर दी गई है। पुल की स्लैब कमजोर हो चुकी थी और कई स्थानों पर सरिया बाहर निकल आने से भारी वाहनों के साथ-साथ हल्के वाहनों का आवागमन भी जोखिम भरा हो गया था। इसी को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए गुरुवार शाम से पुल पर यातायात रोक दिया। लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत कार्य सनराइजर्स इंजीनियरिंग को सौंपा गया है। पहले चरण में पुल के ज्वाइंट की तुड़ाई का कार्य शुरू किया गया, जो शाम चार बजे से रात आठ बजे तक चला।
इसके बाद सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर बैरीकेडिंग कर दी गई। कर्मचारियों की एक टीम रात में भी मौके पर मौजूद रही ताकि कोई वाहन पुल पर न जा सके। विभागीय कर्मचारियों के अनुसार ज्वाइंट हटाने के बाद गड्ढों की मरम्मत की जाएगी और फिर नए ज्वाइंट लगाए जाएंगे। शुक्रवार सुबह आठ बजे से दोबारा काम शुरू होगा। शुरुआती एक-दो दिन जरूरतमंद लोगों को पैदल आवागमन की सीमित अनुमति दी जा सकती है, लेकिन वाहनों के लिए पुल पूरी तरह बंद रहेगा। पुल बंद होने से क्षेत्र के लोगों को अस्थायी असुविधा जरूर हो रही है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पुल की स्थिति को देखते हुए यह कदम जरूरी था। लंबे समय से पुल की मरम्मत की मांग की जा रही थी। पुल की संरचनात्मक स्थिति कमजोर हो चुकी थी। किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए समय रहते मरम्मत कराई जा रही है। कार्य की नियमित निगरानी की जा रही है और प्रयास है कि मरम्मत निर्धारित समय सीमा में पूरी कर सुरक्षित आवागमन बहाल किया जाए। दृगपाल वर्मा, अधिशाषी अभियंता लोनिवि निर्माण खंड 2 कार्यक्रम में जाने को पैदल किया पुल पार मोहाना निवासी मुहम्मद सलीम ने बताया कि उन्हें बेतवा नदी के उस पार चिकासी गांव में कार्यक्रम में जाना था। पुल बंद होने के कारण पैदल पुल से जाना पड़ा। वाहनों की आवाजाही बंद होने से लोगों को पैदल ही सफर करना पड़ रहा है। लंबा चक्कर लगाकर पहुंचे गांव तुरना निवासी रंजीत ने बताया कि वह उरई में शादी समारोह में शामिल होने गए थे। लौटते समय पुल बंद मिला, जिससे डकोर से बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे होकर राठ के धनौरी कट से वापस आना पड़ा। इससे सफर लंबा हो गया और खर्च भी बढ़ गया।

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