हादसे के लिए पुल की ऊंची हाईट को भी माना जा रहा जिम्मेदार

हिन्दुस्तान, हमीरपुर
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हमीरपुर में बेतवा नदी पर बने पुल के ध्वस्त होने से छह मजदूरों की मौत हो गई। पुल की ऊँचाई आईडब्ल्यूएआई की योजना के अनुसार बढ़ाई गई थी, लेकिन घटिया निर्माण के कारण हादसा हुआ। प्रशासन मुआवजे की प्रक्रिया में है और जांच चल रही है।

हादसे के लिए पुल की ऊंची हाईट को भी माना जा रहा जिम्मेदार

हमीरपुर, संवाददाता। मोराकांदर परसनी मार्ग में ध्वस्त हुए बेतवा नदी के पुल की हाईट सामान्य पुलों के मुकाबले अधिक होने से हादसा माना जा रहा है। करीब 20 मीटर ऊंचे इस पुल को भविष्य में अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) की योजना को ध्यान में रखकर ऊंचा किया गया था। प्राधिकरण ने बेतवा नदी को नेशनल वॉटरवे-19 (एनडब्ल्यू) घोषित कर रखा है। भविष्य में इस नदी में छोटे कार्गो बार्ज, बजरी-बालू वाले जहाज चलाने की योजना है। इसी योजना की वजह से पुल की हाईट बढ़ाई गई थी। बेतवा नदी में निर्माणाधीन 700.90 मीटर लंबे पुल की कोटी नंबर पांच 28 मई की रात आए तूफान की भेंट चढ़ गई। हालांकि घटिया निर्माण इसकी बड़ी वजह बना। इस हादसे में छह मजदूरों की जान चली गई। मरने वालों में चार बांदा के और दो हमीरपुर के निवासी हैं। अब मृतकों के आंसू पोंछने को लेकर प्रशासनिक मशीनरी मुआवजे का मरहम लगा रही है। कार्यदायी संस्था के खिलाफ एफआईआर हो चुकी है, लेकिन जांच की रफ्तार सुस्त है। इस पूरे हादसे के बाद एक जून को लखनऊ से आई तीन सदस्यीय जांच टीम ने करीब तीन घंटे तक पूरी साइट का भ्रमण किया। निर्माण सामग्री मौरंग-गिट्टी, सरिया और कंक्रीट के नमूने लेकर जांच को आईआईटी को भेजे हैं। हालांकि टीम के निरीक्षण के दौरान निर्माण के घटिया तरीके से कराए जाने के शुरुआती संकेत मिले हैं। ध्वस्त कोठी के अंदर मौरंग के साथ मिलाकर डाले गए बड़े-बड़े रोड़े निकले हैं। जो इसकी सबसे बड़ी कमजोरी हैं。

आईडब्ल्यूएआई की गाइड लाइन के अनुसार बढ़ी हाईट

जांच टीम के सदस्य चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित ने जांच के दौरान पुल की हाईट के बावत पूछे जाने पर कहा था कि अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए पुल की हाईट बढ़ाई गई थी। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में केंद्र सरकार की बेतवा नदी में भी पानी वाले जहाज, बार्ज चलाने की योजना है। वहीं वर्ष 2016 में आईडब्ल्यूएआई ने हाइड्रोग्राफिक सर्वे और फिजिबिलिटी रिपोर्ट पूरी कर ली है। सर्वे का काम था नदी की गहराई नापना, कहां उथला है, कितनी ड्रेजिंग चाहिए, ताकि जहाज चल सके। अभी एनडब्ल्यू-19 को क्लास वाइस डेवलप करने की प्लानिंग है। इसमें 1.7 मीटर, 1.4 मीटर, 1.2 मीटर गहराई वाला चैनल तैयार होगा। इसका मतलब छोटे कार्गो बार्ज, बजरी-बालू वाले जहाज चल पाएंगे। गंगा जैसी 2000 टन वाले बड़े जहाज नहीं चलेंगे। बेतवा यमुना की सहायक नदी है। हमीरपुर में बेतवा, यमुना में मिलती है तो भविष्य में अगर एनडब्ल्यू-1 गंगा और यमुना वाला रूट फुल डेवलप हो गया, तो बेतवा से भी जहाज सीधे हल्दिया/कोलकाता तक जा सकेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस पुल का निर्माण कब हुआ था?
पुल की ऊँचाई आईडब्ल्यूएआई की योजना के अनुसार बढ़ाई गई थी।
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