हमीरपुर हादसा: 21 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, यमुना नदी में डूबे छह लोगों के शव निकाले गए
यूपी में बुधवार की देर शाम हमीरपुर में यमुना नदी में नाव पलट गई जिससे नाव में सवार छह लोग डूब गए। रात होने के कारण किसी के शव बरामद नहीं हो सके। करीब 21 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाने के बाद नदी में डूबे सभी छह लोगों के शवों को बरामद कर लिया।

Hamirpur News: एक दिन पहले हमीरपुर में हुए हादसे की खबर ने आम आदमी ही नहीं पुलिस-प्रशासन के भी होश उड़ा दिए। हादसे में छह लोग नदी में डूब गए, जिन्हें खोजने के लिए 21 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया गया जो अब खत्म हो गया है। यमुना नदी में डूबे सभी छह लोगों के शवों को गुरुवार को बरामद कर लिया गया। मौसम खराब होने के बावजूद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फ्लड पीएसी फतेहपुर के साथ-साथ स्थानीय पुलिस-प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीमें मोर्चे पर डटी रहीं। जनप्रतिनिधि और तमाम अफसरों ने भी घटनास्थल पर पहुंच परिजनों को सांत्वना दी।
कोतूपुर पटिया निवासी राजू की बेटी की मंगलवार को शादी थी। बुधवार सुबह दुल्हन की विदाई के बाद 10 रिश्तेदार नाव से यमुना नदी के उसपार खरबूजा खाने गए थे। लौटते समय हवा के तेज झोंके से नाव डगमगा कर पलट गई। चीख-पुकार मचने पर आसपास के लोग दौड़ लेकिन नाव सवार लोग नदी में समा गए। एक किशोर-किशोरी समेत चार लोग तैरकर किनारे पहुंच गए। वहीं, बृजरानी और उनका पांच वर्षीय बेटा लाव्यांश, नौ वर्षीय रानी, आठ वर्षीय आकांक्षा, 14 वर्षीय अर्चना, 11 वर्षीय आदित्य डूब गए। सूचना पर एनडीआरएफ लखनऊ, एसडीआरएफ कानपुर और फतेहपुर से आई पीएसी की फ्लड टीम ने सात बोटों की मदद से घटनास्थल के आसपास के एक किमी के दायरे में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। रुक-रुककर हो रही बारिश के बावजूद टीमों ने बिना रुके रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा और गुरुवार को दिन के 12 बजे तक सभी के शव नदी से निकाल लिए गए। एनडीआरएफ टीम की अगुवाई डिप्टी कमांडेंट नवीन शर्मा कर रहे थे। इनके पास चार, एसडीआरएफ के पास दो फ्लड पीएसी टीम के पास एक बोट थी।
साध्वी निरंजन ज्योति ने पोछे परिजनों के आंसू
गुरुवार सुबह 11 बजे के आसपास पिछड़ा वर्ग आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति कोतूपुर पटिया पहुंच गईं। उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष शकुंतला निषाद, चेयरमैन कुलदीप निषाद भी थे। उन्होंने राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया। प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4.25-4.25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का आश्वासन दिया। वहीं, दोपहर दो बजे के आसपास जनपद के प्रभारी मंत्री रामकेश निषाद भी मौके पर पहुंचे और घटना के बावत जानकारी लेकर पीड़ितों से मिले। शाम पौने चार बजे के आस एडीजी प्रयागराज जोन ज्योति नारायण भी पहुंचे।
देर रात तक डटे रहे सदर विधायक
घटना की सूचना पर सदर विधायक डॉ. मनोज प्रजापति भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने डीएम अभिषेक गोयल, एसपी मृगांक शेखर पाठक के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया। विधायक देर रात तक मौके पर डटे रहे। सुबह होते ही फिर से घटना स्थल पर पहुंच गए। विधायक ने मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
मां-बेटे की मौत, शोक में डूबा गांव
शादी में शामिल होने को थाना कुरारा के मनकी गांव की बृजरानी अपने पांच वर्षीय बेटे लाव्यांश के साथ कोतूपुर पटिया आईं थीं। बुधवार शाम को बृजरानी लाव्यांश के साथ नदी पार सब्जी की बारी में गई थीं। वापसी में दोनों की डूबने से मौत हो गई।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


