हवा की रफ्तार, मिट्टी या भ्रष्टाचार? हमीरपुर पुल हादसे में 6 मौतों के बाद उठे ये तीन सवाल

अभिषेक सिंह, हमीरपुर
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हमीरपुर पुल हादसे का असली जिम्मेदार कौन है? हवा की रफ्तार, मिट्टी की जांच या फिर भ्रष्टाचार। आईआईटी और एचबीटीयू के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुल की डिजाइन में गड़बड़ी हुई तो चक्रवाती तूफान से पुल गिर सकता है। वहीं, मिट्टी की जांच में कमी और भ्रष्टाचार भी संभव है।

हवा की रफ्तार, मिट्टी या भ्रष्टाचार? हमीरपुर पुल हादसे में 6 मौतों के बाद उठे ये तीन सवाल

UP News: हमीरपुर पुल हादसे का असली जिम्मेदार कौन है? हवा की रफ्तार, मिट्टी की जांच या फिर भ्रष्टाचार। हालांकि असली वजह तो जांच के बाद पता चलेगी लेकिन, सवाल उठने शुरू हो गए हैं। आईआईटी और एचबीटीयू के विशेषज्ञों का मानना है कि चक्रवाती तूफान से पुल गिर सकता है, अगर पुल की डिजाइन में गड़बड़ी हुई तो। क्योंकि 10 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बनने वाले पुल की डिजाइन तैयार करते समय हवा की रफ्तार को भी ध्यान में रखा जाता है। वहीं, मिट्टी की जांच भी एक बड़ा कारण हो सकती है और भ्रष्टाचार हुआ तो कुछ भी संभव है।

हमीरपुर में बेतवा नदी पर पुल ढहने से छह जिंदगियां मौत की नींद सो गई। पुल गिरने से कार्यदायी संस्था पर सवाल उठ रहे हैं। उप्र राज्य सेतु निगम की ओर से संबंधित संस्था को नोटिस जारी करने के साथ एफआईआर भी दर्ज करा दी है। वहीं, घटना को लेकर आईआईटी और एचबीटीयू के विशेषज्ञों ने बताया कि पिलर टूटने और गर्डर गिरने का कारण तो जांच के बाद पता चलेगा। लेकिन, सिर्फ तेज हवाएं कारण नहीं हो सकती। कभी-कभी तेज हवा से गर्डर का बैलेंस बिगड़ जाता है, जिससे पूरा दबाव पिलर पर पड़ता है। लेकिन, अगर सही डिजाइन हुई तो ऐसे दबाव में भी दुर्घटना नहीं होती है। वहीं, पिलर की मजबूती के लिए मिट्टी की जांच जरूरी है। अगर नींव मजबूत नहीं हुई तो हादसा संभव है। वहीं, निर्माण प्रक्रिया, सामग्री, डिजाइन समेत अन्य मानकों में अगर भ्रष्टाचार हुआ तो हादसा हो सकता है।

प्री-स्ट्रेसिंग केबल खींचने से पहले गिर गया पुल

निर्माणाधीन पुल गिरने की घटना ने आधुनिक पुल निर्माण तकनीक और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पुल सेगमेंटल बॉक्स गर्डर तकनीक से बनाया जा रहा था। इसमें पुल को एक साथ नहीं बल्कि कई हिस्सों में तैयार कर बाद में जोड़ा जाता है। जानकारों की माने तो प्रथम दृष्ट्या पुल का वह हिस्सा गिरा, जिसमें प्री-स्ट्रेसिंग केबल खींचने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी।

यह कहना उप्र राज्य सेतु निगम के रिटायर एक्सईएन एके सिंह का है। कहा कि बॉक्स गर्डर पुल का मुख्य ढांचा होता है, जिसका आकार खोखले बॉक्स जैसा रहता है। इसे प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट और स्टील से बनाया जाता है। पुल के सभी हिस्सों को जोड़ने के बाद उनमें स्टील केबल डाली जाती हैं और उन्हें खींचकर पूरा स्ट्रक्चर एक यूनिट की तरह मजबूत किया जाता है। प्राथमिक जांच में माना जा रहा है कि केबल स्ट्रेसिंग पूरी न होने के कारण निर्माणाधीन ढांचा अस्थिर रहा और तेज हवा के दबाव के कारण ढह गया।

ढहे निर्माणाधीन पुल की जांच को दो कमेटियां गठित

पुल के ढहने के मामले की जांच के लिए दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई हैं। एक जांच समिति उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम मुख्यालय स्तर पर बनाई गई है, जबकि दूसरी जांच समिति हमीरपुर जिलाधिकारी ने जिलास्तर पर गठित की गई है। दोनों टीमें निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी प्रक्रियाओं, मौसम के प्रभाव और सुरक्षा मानकों की जांच करेंगी। मुख्यालय की 3 सदस्यीय जांच समिति में यूपी राज्य सेतु निगम के ज्वाइंट एमडी मिथिलेश कुमार, डिजाइन के मुख्य परियोजना प्रबंधक फरहान बासित और सेतु निगम कानपुर के मुख्य परियोजना प्रबंधक बीके सेन शामिल हैं। जिला स्तरीय दो सदस्यीय जांच कमेटी में हमीरपुर पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता सुनील कांत और सेतु निगम कानपुर के मुख्य परियोजना प्रबंधक बीके सेन शामिल हैं।

Pawan Kumar Sharma

लेखक के बारे में

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पवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।

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