नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते, लखनऊ में राहुल गांधी बोले

Deep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को ये बातें लखनऊ में कहीं। राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाया।

नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते, लखनऊ में राहुल गांधी बोले

अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को एक बार फिर सवाल उठाया। प्रदेश कांग्रेस द्वारा बसपा संस्थापक कांशीराम की 92वीं जयंती के अवसर पर आयोजित 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते में भारत को कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दलितों के हक के लिए जिस तेजी से काम करना चाहिए था, उसमें कमियां रहीं। कमी न होती तो कांशीराम राजनीति में सफल नहीं होते। अगर नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते।

राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका से व्यापार समझौते के मुताबिक भारत अमेरिका से नौ लाख करोड़ रुपये का सामान खरीदेगा। अगर हम इतना अमेरिका से खरीदेंगे तो हमारा किसान क्या करेगा? कृषि मामले में हमने कभी समझौता नहीं किया था। चार महीने तक अमेरिका से व्यापार समझौता इसी वजह से रुका भी रहा। अब कृषि बाजार अमेरिका के लिए खोल दिया गया है। हमारा किसान कहां जाएगा? राहुल ने तेल खरीद पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा के साथ भी समझौता हुआ है। अमेरिका तय कर रहा कि हमें कहां से तेल खरीदना है और कहां से गैस। भारत में गैस का संकट खड़ा हो गया है। राहुल ने तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम एप्सटीन फाइल में होने और उनकी बेटी की कंपनी को जॉर्ज सोरोस से फंडिंग की बात कही। उन्होंने कहा कि मैंने लोकसभा में केवल एप्सटीन का नाम लिया था और लोकसभा अध्यक्ष ने मुझे बोलने से मना कर दिया। कार्यक्रम में, कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव भी पास हुआ।

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'राहुल गांधी जिंदाबाद' से कुछ नहीं होता

जिंदाबाद के नारे लगाते हुए कार्यकर्ताओं को राहुल गांधी ने रोका कि नारे लगाने से कुछ नहीं होता। आपको अच्छा लग सकता है, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं है। बदलाव तब आता है जब व्यक्ति यह ठान ले कि जो गलत हो रहा है उसे वह स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि राजनीति में सिर्फ चाहने से कुछ नहीं मिलता। पाने के लिए विचारधारा की लड़ाई लड़नी पड़ती है।

कांशीराम, कलम और 15-85 की बात

राहुल गांधी ने अपने वक्तव्य के लिए कांशीराम की शैली का ही इस्तेमाल किया। उन्होंने कांशीराम की तरह पेन और उसका ढक्कन दिखाते हुए कहा कि कांशीराम चाहते थे कि बहुसंख्य आबादी को उसका हक मिले। हालांकि भाजपा ने 85 प्रतिशत वालों को फेंक दिया है। समाज को 15-85 में बांट दिया है। सारा फायदा केवल 15 प्रतिशत लोगों को मिल रहा है, जबकि बाकी समाज अलग-थलग है। बाकी समय में तो ये 85 प्रतिशत भी हिंदुस्तानी हैं, लेकिन जब सत्ता की बात आती है तो इन 85 को कुछ नहीं मिलता। देश के बड़े उद्योगों, न्यायपालिका और कार्यपालिका के शीर्ष पदों पर इन 85 प्रतिशत में से कोई नहीं है। बड़े अस्पतालों में भी नामचीन डॉक्टर 15 प्रतिशत से आते हैं।

हिंदुस्तान की राजनीति बदलने का मौका

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बोले कि हमारे पास हिंदुस्तान की राजनीति बदलने का पूरा मौका है। केवल चुनाव जीतने वाली राजनीति नहीं बल्कि देश बदलने वाली। उन्होंने देश का डेटा अमेरिका को भी दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश से सिर्फ 100 ऐसे लोग मिलें, जो समझौता न करें तो सब कुछ बदल सकता है।

कांग्रेसी अमीर, कांग्रेस गरीब - राजेंद्र पाल गौतम

कांग्रेस के एससी-एसटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि, मैं नौ महीने से अध्यक्ष हूं और उसके बाद से मैं लगातार दौरे कर रहा हूं। मैंने एक बात देखी कि कांग्रेस के लोग तो अमीर हैं। लखपति और करोड़पति हैं, लेकिन कांग्रेस गरीब है। उन्होंने कहा कि नीतियां जल्द बनानी होंगी। ऐन चुनाव के पहले नीति बनने पर बात लोगों तक नहीं पहुंच पाती।

मंच तक नहीं पहुंच सके कांग्रेस के यूपी प्रभारी

कांग्रेस के यूपी प्रभारी अविनाश पांडे मंच पर नहीं पहुंच सके। वहीं, कांग्रेस के सांसद और प्रदेश एससी-एसटी विभाग के अध्यक्ष तनुज पुनिया को भी मंच पर जगह नहीं मिली। कांग्रेस विधायक वीरेंद्र चौधरी को भी मंच के सामने लगी कुर्सी ही मिली। इसके अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बृजलाल खाबरी भी मंच से नीचे ही थी। कांग्रेस पर जगह न पाए लोगों को लेकर कांग्रेस में काफी चर्चा हो रही है।

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दीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।

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