ज्ञानवापी केस: कोर्ट ने वादमित्र पर लगाया 2 हजार का हर्जाना, सुनवाई टालना पड़ा भारी
वाराणसी की सिविल जज ने ज्ञानवापी मामले की सुनवाई के दौरान वादमित्र पर 2000 रुपये का हर्जाना लगाया है। पिछली सुनवाई में आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगने को लेकर तीन बहनों की ओर से आपत्ति जताई गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने यह कार्रवाई की।

वाराणसी में सिविल जज (सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट) भावना भारती ने ज्ञानवापी के मामले में सुनवाई करते हुए वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी पर दो हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। पिछली सुनवाई पर 17 जनवरी को आपत्ति दाखिल करने के लिए वादमित्र ने प्रार्थना पत्र देकर समय मांगा था।
दरअसल, मामले में तीन बहनों की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए हर्जाना लगाने की मांग की गई थी। हर्जाने के बाद मंगलवार को सुनवाई के दौरान वादमित्र ने आपत्ति दाखिल की है। मामले में अगली सुनवाई अब 22 जनवरी को होगी।
ज्ञानवापी परिसर में नए मंदिर के निर्माण और हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने से जुड़े 1991 में दायर मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने संबंधी प्रार्थना पत्र पर सुनवाई हो रही है। इसमें उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील तौहिद खान की ओर से पिछली सुनवाई पर दाखिल एक अन्य प्रार्थना पत्र पर, जिसमें ज्ञानवापी से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।
17 जनवरी को वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी को अपना पक्ष रखना था, लेकिन शहर से बाहर होने का हवाला देते हुए स्थगन प्रार्थना पत्र दाखिल कराया था। इसमें वादमित्र को हटाने के लिए दाखिल अर्जी की आवदेनकर्ता मणिकुंतला समेत तीन अन्य की ओर से विरोध किया गया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान वादमित्र ने आपत्ति दाखिल कर दी है।


