
आंखों की रोशनी लौटने की मान्यता! गुरसेल माता मंदिर जहां होती है विशेष पूजा
बाराबंकी के फतेहपुर तहसील स्थित 150 वर्ष पुराने गुरसेल माता मंदिर में भक्तों की अटूट आस्था है। मंदिर की अनोखी मान्यता है कि यहां के कुंड का जल आँखों में लगाने से खोई हुई रोशनी वापस लौट आती है।
यूपी के बाराबंकी जिले की तहसील फतेहपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत गुरसेल गांव के बाहर स्थित गुरसेल माता मंदिर आस्था और विश्वास का अनोखा केंद्र है। करीब 150 वर्ष पुराने इस मंदिर में आज भी हजारों लोग अपनी मनोकामनाओं के साथ पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार के साथ ही पूर्णिमा और नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना होती है। नवरात्र के अंतिम दिन यहां माता रानी का भव्य श्रृंगार किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता यह है कि जिनकी आंखों की रोशनी चली जाती है, उनको पवित्र कुंड के नीर से वह वापस मिल जाती है। माता रानी पर अर्पित होने वाला जल एक छोटे कुण्ड में एकत्र होता है। उसी नीर को आंखों में लगाते हैं और उनकी दृष्टि वापस लौट आती है। इस विश्वास के चलते जिले के अलावा लखनऊ, सीतापुर, गोंडा, अयोध्या और सुल्तानपुर तक से लोग यहां पहुंचते हैं। शीशियों में नीर लेकर जाते हैं। जिनकी आंखों की रोशनी लौटती है वह मन्नत का एक घंटा मंदिर में चढ़ाते हैं। माता रानी के मंदिर में हजारों लटक रहे घंटे लोगों की मुराद पूरी होने के साक्षी हैं।
सुनैना सिंह की अद्भुत कहानी
पुजारी मयंक सैनी बताते हैं, गुरसेल माता मंदिर में अनेक चमत्कार हुए हैं। लखनऊ के चिनहट की रहने वाली सुनैना सिंह की आंखों की रोशनी चली गई थी। उनका इलाज अमेरिका तक में हुआ, लेकिन डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद उनकी मां रजनी सिंह ने माता रानी की शरण ली और लगातार तीन माह मंदिर में रुककर प्रतिदिन आंखों में माता का नीर लगाया। तीन महीने में ही सुनैना की आंखों की रोशनी लौट आई। तब से सुनैना की माता रजनी सिंह लगातार एक वर्ष हर पूर्णिमा को आकर प्रसाद चढ़ाकर मनोकामना करती थी कि माता रानी बेटी की रोशनी हमेशा के लिए बनाए रखना। इसी तरह हाल ही में अल्लापुर गांव निवासी राजीव चंचल की पत्नी पुष्पा देवी की आंखों की रोशनी चली गई थी। डॉक्टरों ने इलाज पूरा कर रोशनी की उम्मीद छोड़ दी थी। परिवारजन ने उन्हें गुरसेल माता मंदिर ले जाकर 15 दिन तक दिन-रात यहीं रुककर पूजा-अर्चना की और माता का नीर आंखों में लगाया। आश्चर्यजनक रूप से पुष्पा देवी की आंखों की रोशनी फिर से लौट आई। इसी तरह राम मंडाई गांव के पति व पत्नी रोज मंदिर आकर आंखों में नीर जल डालती है। उनकी भी आंखों की रोशनी वापस आ गई।
श्रद्धालुओं का बढ़ता विश्वास
पुजारी मयंक सैनी कहते हैं, कि अब तक हजारों लोग यहां आकर अपनी खोई हुई आंखों की रोशनी पा चुके हैं। माता रानी का दरबार सबकी सुनवाई करता है। भक्त आकर प्रसाद चढ़ाते हैं और जो भी मनोकामना मांगते हैं, वह पूरी होती है।
आस्था का केंद्र बना गुरसेल माता मंदिर
हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। नवरात्र और पूर्णिमा के दिन तो मंदिर में जनसैलाब उमड़ पड़ता है। श्रद्धालु तिरपाल डालकर रुकते हैं और दिन-रात माता रानी की पूजा में लगे रहते हैं। गुरसेल माता मंदिर अब न केवल एक धार्मिक स्थल बल्कि आस्था और विश्वास का जीवंत प्रतीक बन चुका है। यहां आने वाले श्रद्धालु यही कहते हैं कि माता रानी के दरबार में हर कोई खाली हाथ नहीं लौटता।





