
यूपी में दूल्हे ने पेश की मिसाल, सगाई में मिले 21 लाख का चेक लौटाया, एक रुपये का लिया शगुन
आज भी कई ऐसे लोग हैं जो बिना दान-दहेज की शादियां नहीं करते। कई बार तो दहेज न मिलने के चलते लड़के बारात ही नहीं लाते है। कुछ लोग शादी के बाद ही दहेज को लेकर लड़की को परेशान करने लगे हैं।
हमारे देश में दहेज लेना और देना दोनों ही गैर कानूनी है, लेकिन आज भी कई लोग ऐसे हैं जो बिना दान-दहेज के शादी ही नहीं करते। अगर बिना दहेज के शादी हो भी जाती है तो वह लड़की को प्रताड़ित करना शुरू कर देते हैं। लेकिन आज भी कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दहेज को अभिशाप मानकर उससे दूरी बनाकर रखते हैं। ऐसा ही एक मामला यूपी बागपत से सामने आया है। बड़ौत के वाजिदपुर में एक ऐसा सगाई समारोह के दौरान लड़की के पिता द्वारा दिए गए 21 लाख रुपये के चेक को दूल्हे ने लौटा दिया। शगुन का एक रुपया लेकर दूल्हे ने समाज को बड़ा संदेश देने का काम किया है। बड़ौत निवासी सुरेश राणा के पुत्र रक्षित राणा और दिल्ली निवासी ओमवीर सिंह की पुत्री दिव्या की सगाई के अवसर पर दिव्या के पिता ओमवीर सिंह ने रक्षित को 21 लाख रुपये का चेक उपहार स्वरूप प्रदान किया। लेकिन रक्षित राणा ने इस चेक को ससम्मान वापस लौटा दिया।
रक्षित ने कहा कि उन्होंने बचपन से पढ़ा और समझा है कि दहेज एक सामाजिक अभिशाप है। उनके संस्कार ऐसे हैं कि वे ऐसी किसी भी राशि को स्वीकार नहीं कर सकते। समाज में बदलाव की शुरुआत शिक्षित परिवारों से ही होती है, यही सोच उन्हें इस निर्णय तक लाई। रक्षित के चाचा डॉ. रविंद्र राणा ने कहा कि उनके परिवार के सभी सदस्य शिक्षित और रोजगारशुदा हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि शिक्षित लोग ही आगे आकर यह पहल नहीं करेंगे, तो समाज में दहेजरहित परंपरा कैसे स्थापित होगी।
वरिष्ठ शिक्षक और जनता वैदिक कॉलेज, बड़ौत के पूर्व प्रवक्ता चौधरी सुखबीर सिंह ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यदि किसी को उपहार देना ही है तो उसका सही समय विवाह के दो-तीन साल बाद होता है, जब बच्चों की सहमति भी शामिल हो। उधर, दिव्या के पिता ओमवीर सिंह ने कहा कि वे दहेज नहीं बल्कि बच्चों के लिए एक उपहार दे रहे थे। रक्षित या उनके परिवार द्वारा कोई मांग नहीं की गई थी। यह राशि उनकी स्वेच्छा से दी गई थी। फिर भी, रक्षित के परिवार ने स्पष्ट कहा कि वे कोई धनराशि स्वीकार नहीं कर सकते। इस सगाई समारोह में अनेक राजनेता, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिनमें बागपत सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, छपरौली विधायक डॉ. अजय कुमार, चौधरी यशवीर सिंह, मेरठ-बागपत जिला कोऑपरेटिव बैंक चेयरमैन विमल शर्मा, आरएलडी जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर, पूर्व मंत्री ओमवीर तोमर, पूर्व मंत्री डॉ. कुलदीप उज्जवल, कृषि विशेषज्ञ नरेश सिरोही आदि रहे।
बचपन से ही मेधावी रहा है रक्षित
रक्षित राणा बचपन से ही अत्यंत मेधावी रहे हैं। उन्होंने आईसीएसई बोर्ड से दसवीं और बारहवीं दोनों में बागपत ज़िले में टॉप किया था। आगे चलकर उन्होंने आईआईएम से एमबीए किया और आज गुरुग्राम की एक मल्टीनेशनल कंपनी में फाइनेंस एक्सपर्ट के रूप में कार्यरत हैं। रक्षित के पिता किसान और माता रेखा राणा शिक्षिका हैं। इस अनोखी पहल ने सभी के बीच दहेज के खिलाफ एक सशक्त संदेश दिया और समाज में एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित किया।

लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।
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