प्रशासक बने ग्राम प्रधानों ने योगी सरकार को कहा थैंक यू, किया रिटर्न गिफ्ट का वादा ; नई मांग भी रखी

संवाददाता, लखनऊ
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यूपी में पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों की बागडोर ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है।ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म हो गया है। 

प्रशासक बने ग्राम प्रधानों ने योगी सरकार को कहा थैंक यू, किया रिटर्न गिफ्ट का वादा ; नई मांग भी रखी

यूपी पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक बनाए जाने पर राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने योगी सरकार के प्रति आभार जताया है। वहीं सरकार व समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को जल्द ज्ञापन देकर नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को तय करने की मांग की है । राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.अखिलेश सिंह और प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा कि बीते 15 साल में ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी 78 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत हो गई है । ऐसे में आयोग अगर नई जनगणना के आधार पर आरक्षण तय करेगा तो अच्छा होगा । सरकार को प्रधान विधानसभा चुनावों में रिटर्न गिफ्ट देंगे और गांव- गांव जाकर बताएँगे कि योगी सरकार ने अधिकारियों की बजाय प्रधानों को प्रशासक बनाया। संगठन का विस्तार पूरे देश में करते हुए प्रधानों के लिए यूनिक वेलफेयर पॉलिसी बनवाने पर जोर देंगे।

बता दें कि यूपी में पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में देरी के कारण ग्राम पंचायतों की बागडोर ग्राम प्रधानों के हाथ में ही रखे जाने का निर्णय लिया गया है। मंगलवार को ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल खत्म हो गया है। ऐसे में 27 मई से निर्वतमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं। छह महीने या पंचायत चुनाव होने के बाद नई ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तिथि तक जो भी पहले हो प्रधानों को प्रशासक पद की जिम्मेदारी दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह फैसला किया गया है।

प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का शासनादेश सोमवार को जारी किया गया था। वर्ष 2021 में कुल 58195 ग्राम पंचायत प्रधान निर्वाचित हुए थे और उनकी पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी। ऐसे में ग्राम प्रधानों का पांच वर्ष का कार्यकाल मंगलवार यानी 26 मई 2026 को खत्म हो गया है। अभी तक चुनाव न होने की स्थिति में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर संबंधित विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को उस विकास खंड की ग्राम पंचायतों का प्रशासक बना दिया जाता था। ग्राम प्रधानों की मांग पर पहली बार प्रशासक बनाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में ग्राम प्रधानों के पास ग्राम पंचायत की बागडोर पहले की ही तरह रहेगी। हालांकि, ये प्रशासक नीति विषयक निर्णय नहीं ले सकेंगे। सिर्फ रूटीन कार्यों को निपटाएंगे।

पिछड़ा आयोग ने छह महीने में रिपोर्ट देने की बात कही है

त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में विभिन्न पदों पर पिछड़ा वर्ग के लोगों का आरक्षण तय करने के लिए गठित उप्र राज्य स्थानीय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को रिपोर्ट देने में छह महीने का समय लग सकता है। आयोग के अध्यक्ष और उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार सिंह और सदस्यों ने मंगलवार से काम शुरू कर दिया है। अध्यक्ष राम औतार सिंह और सदस्यों ने नैमिषारण्य अतिथि गृह में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के संग बैठक की थी। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में अध्यक्ष ने कहा था कि जिलों में जाकर सर्वे और पिछड़ेपन का अध्ययन किया जाएगा। ओबीसी की आबादी और उसके अनुपात में उसका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कितना है, इसे आंका जाएगा।

यही नहीं जिलों और ब्लॉक स्तर पर इसके लिए बैठकें आयोग करेगा। जहां खुले संवाद में लोग भी अपनी बातें रख सकेंगे। ऐसे में आयोग को अपनी रिपोर्ट देने में छह महीने का समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि आयोग का कार्यकाल छह महीने का है। समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग चाहे तो तीन महीने में भी रिपोर्ट दे सकता है लेकिन सघन सर्वे और अध्ययन कार्य में लगने वाले समय के अनुसार उसे अपनी रिपोर्ट तैयार करने की छूट रहती है। यही कारण है कि आयोग का कार्यकाल छह महीने रखा गया है। सदस्य बृजेश कुमार ने कहा कि आयोग आपत्तियां और सुझाव भी स्वीकार करेगा। ऐसे में अब यह संभावना है कि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकें।

Ajay Singh

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अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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