
यूपी में इन्हें रेड कारपेट वेलकम देगी सरकार, नीति में संशोधन पर भी विचार
खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने उत्तर प्रदेश में पैदा होने वाले 4 लाख मैट्रिक टन से अधिक फल-सब्जियों का अधिक से अधिक इस्तेमाल का रोडमैप तैयार किया है। इससे पूरे राज्य में ब्रेड बेकरी, चिप्स नमकीन, लॉलीपॉप कैंडी, कैटल फीड, फ्रोजन फूड, फ्रूट जूस के उद्योगों का जाल बिछाने की योजना है।
छोटे उद्यमियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए सरकार रेड कारपेट वेलकम करेगी। इसके लिए अगर जरूरत पड़ी तो खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 में संशोधन करने पर भी विचार करेगी ताकि निवेश करने वालों को प्रदेश में और भी सुविधाएं मिल सके। नई नीति में खाद्य प्रसंस्करण की छोटी-छोटी इकाइयों को प्रोत्साहित किए जाने की योजना है।

दरअसल, खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने प्रदेश में पैदा होने वाले 4 लाख मैट्रिक टन से अधिक फल-सब्जियों का अधिक से अधिक इस्तेमाल का रोडमैप तैयार किया है। इससे पूरे राज्य में ब्रेड बेकरी, चिप्स नमकीन, लॉलीपॉप कैंडी, कैटल फीड, फ्रोजन फूड, फ्रूट जूस के उद्योगों का जाल बिछाने की योजना है। इसे क्रियान्वित करने के लिए दूसरे प्रदेशों के निवेशकों को प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण की इकाइयां स्थापित करने के लिए आकर्षित करने का निर्णय किया गया है।
सिंगल विंडो की सुविधा, पहले से अधिक अनुदान
अधिक से अधिक निवेशक प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निवेश करें, इसके लिए सिंगल विंडो की सुविधा के साथ पहले से अधिक अनुदान दिए जाने का एक प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण आधारित उद्योगों के माध्यम से उत्तर प्रदेश में अधिक से अधिक पूंजी निवेश कराना है।
नीति में क्या बदलाव किया जाए या और क्या इसमें जोड़ा जाए, जिससे प्रदेश में निवेश का आकर्षण बढ़े इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण विभाग में बैठकों का दौर लगातार जारी है। इस बीच गुजरात, राजस्थान, हरियाणा व उत्तराखण्ड के उद्यमियों द्वारा प्रदेश के रामपुर जिले में करीब 300 करोड़ रुपये के मटर, गाजर, गोभी, पालक, मशरूम आदि के प्रसंस्करण की इकाई स्थापित की जा रही है। 700 करोड़ के प्रस्ताव को राज्य स्तरीय इम्पावर्ड कमेटी पहले ही हरी झंडी दे चुकी है, जिसमें करीब 150 करोड़ का अनुदान दिए जाने का प्रावधान है।
331 प्रस्तावों को मिल चुकी है स्वीकृति
पिछले दो वर्षों में अब तक 331 प्रस्तावों की स्वीकृति मिल चुकी है। इसमें रेडी टू ईट के 62, सोलर पावर के 58, आईक्यूएफ् के 31, सिरियल्स, पल्स के 26, कैटिल फीड के 22, फल एवं सब्जी प्रसंस्करण के 21, दुग्ध प्रसंस्करण के 14, रेडी टू सर्व के 12, बेकरी के 11, मसाला प्रसंस्करण के 11, फोर्टिफाइड राइस के 10, मस्टर्ड आयल के 10, राइस ब्रान आयल के 9, मल्टिग्रेन आटा के 8, गुड प्रसंस्करण के 8, मेडिसिनल आयल के 3, चिकोरी प्रसंस्करण, आइस क्रीम कोन, मीट प्रसंस्करण, ट्रान्सपोर्ट सब्सिडी प्रत्येक के दो तथा हींग एवं शहद प्रसंस्करण के 1-1 प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
फ्रोजेन फूड प्रासेसिंग में पड़ोसी राज्यों के उद्योमियों ने दिखाई दिलचस्पी
प्रदेश के दो जिले रामपुर एवं बरेली फ्रोजेन फूड प्रासेसिंग में हब के रूप में उभर कर आए हैं। इसमें प्रदेश के निवेशकों के साथ-साथ उत्तराखण्ड एवं राजस्थान के उद्यमी द्वारा दोनों जिलों में लीज पर भूमि लेकर फ्रोजेन फूड प्रासेसिंग की यूनिट की स्थापना की जा रही है। प्रत्येक यूनिट को औसतन 60 हजार कुन्तल फल एवं सब्जियों की आवश्यकता होगी, जो प्रदेश में आसानी से उपलब्ध है।
इन क्षेत्रों में निवेशकों को अतिरिक्त सुविधाएं देने का है प्रस्ताव
प्रदेश में फल-सब्जियों से तैयार होने वाले प्रसंस्कृत पदार्थ यथा ब्रेड-बेकरी, चिप्स नमकीन, लाली-पाप कैण्डी, कैटिल फीड, फोर्टिफाइड राइस, फ्रोजेन फूड, रेडी टू ईट, फ्रूट जूस, काजू प्रसंस्करण, दुग्ध प्रसंस्करण, मस्टर्ड आयल एक्स्ट्रेक्शन आदि के क्षेत्र में अधिक से अधिक निवेशकों को आकर्षित करने के सरकार अतिरिक्त सुविधाएं देने पर विचार कर रही है।





