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Chitragupt Puja 2018: इस मुहूर्त में पूजा करने से प्रसन्न होंगे यम और चित्रगुप्त

मृत्यु के देवता यम और कलम के आराध्य चित्रगुप्त महराज को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को विशेष पूजा होगी। इस दिन भाई का बहन के घर या उसके हाथों भोजन करने और स्वेच्छा से बहन को उपहार देने का बड़ा महात्म्य है। यमुना (नदी) को यमराज की बहन कही जाती हैं इसीलिए कार्तिक शुक्ल पक्ष की दूसरी तिथि (शुक्रवार को पड़ रही है) में भाई-बहन के यमुना में स्नान और पूजन से ·विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। 

चित्रगुप्त पूजा का मुहूर्तः

सुबह 6:51 बजे से 9:09 बजे तक वृश्चिक लग्न और दोपहर 1:01 बजे से 2:31 बजे तक कुम्भ लग्न पड़ रहा है। इस अवधि में चित्रगुप्त पूजा अत्यंत फलदायी होगी।

पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार इस बार द्वितीया तिथि गुरुवार रात में 9:02 बजे से शुरू होकर शुक्रवार रात में 9:17 बजे तक है। सूर्योदय 6:33 बजे होगा। भैया दूज और यम द्वितीया तभी मनाया जाता है जब दोपहर में द्वितीया तिथि मिले। शुक्रवार को पूरा दिन द्वितीया होने के कारण यम द्वितीया, भैया दूज, भ्रात द्वितीया और चित्रगुप्त पूजा इसी दिन होगी। उन्‍होंने बताया कि चित्रगुप्‍त पूजा दो स्थिर लग्‍नों में होगी। सुबह 6:51 बजे से 9:09 बजे तक वृश्चिक लग्‍न और दोपहर 1:01 बजे से 2:31 बजे तक कुम्‍भ लग्‍न पड़ रहा है। इस अवधि में चित्रगुप्‍त्‍ा पूजा अत्‍यंत फलदायी होगी।

उस दिन भाई अपनी बहन के घर भोजन करते हैं। भाई स्वेच्छा से बहनों को उपहार देते हैं। इसे अत्यंत पुण्यप्रद कहा गया है। इसी वजह से लोकव्यहार में इसका नाम भैया दूज हो गया। यमराज के भाई धर्मराज के यहां चित्रगुप्त सभी जीवों के पुण्य-पाप और भूत-भविष्य का लेखन करते हैं। यम द्वितीया पर उन्हें प्रसन्न करने के लिए लेखनी-दवात की विशेष पूजा की जाती है। कायस्थ समाज में यह पूजा खासतौर पर की जाती है। गोरखपुर के प्रसिद्ध चित्रगुप्त मंदिर में खास आयोजन होता है। इस दिन लोग अपनी लेखनी को विश्राम दे, पूजन-अर्चन करते हैं। 

विधि-विधान से हो रही गोवर्धन पूजा 
दीपावली के अलगे दिन होने वाला अन्नकूट और गोवर्धन पूजा और  गोरखपुर में विधि-विधान से की जा रही है। पंडित जोखन पांडेय शास्त्री ने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का विधान है। यह दीपावली के दूसरे दिन पड़ती है। गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पत्र-पुष्प, वृक्ष की शाखाओं से अलंकृत करके पूजा का विधान है। चंदन, अक्षत, फूल, पंचामृत, दूध, दीप, नैवेद्य से गायों की भी पूजा इस दिन की जाती है। इसी दिन अन्नकूट भी मनाया जाता है। इसमें चबाकर, चूसकर, लपसी के समान खाए जाने वाले खट्टे-मीठे-कसैले सहित नौ रसों से युक्त 56 प्रकार का भोजन भगवान को अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा को निषिद्ध कर दिया था। इससे कुपित होकर इंद्रदेव ने प्रलय जैसी बारिश कर दी। तब श्रीकृष्ण ने ऊंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। तभी से गोवर्धन पूजा की परम्परा चली आ रही है। 

गोवर्धन पूजा-अन्नकूट का मुहूर्त 
पंडित शरद चन्द्र मिश्र ने बताया कि गुरुवार को सूर्योदय सुबह 6:32 बजे हुआ। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि का मान रात 9:02 बजे तक और सौभाग्य योग शाम 5:48 बजे तक है। गुरुवार को विशाखा (नक्षत्र स्वामी देवगुरु) नक्षत्र का योग होने से प्रवर्धमान नामक महाऔदायिक योग बन रहा है। गोवर्धन और अन्नकूट पर्व जिस दिन उदय व्यापिनी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा हो उस दिन मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार नौ मुहूर्त से कम प्रतिपदा नहीं होनी चाहिए। हेमाद्रि में गोक्रीड़ा और बलि पूजा आदि कार्यों का भी इसी दिन निर्देश मिलता है। कार्तिकादि विक्रम संवत (गुजरात आदि दक्षिण प्रदेशों में प्रचलित) का आरम्भ भी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से होता है।

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  • Web Title:Worship in this muhurt will make Yam and Chitragupt happy