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हिमालयन पक्षी को रास गोरक्षनगरी की आबोहवा

हिमालयन पक्षी को रास गोरक्षनगरी की आबोहवा

संक्षेप:

Gorakhpur News - चिड़ियाघर के किनारे रामगढ़ ताल और वेटलैंड में बढ़ी विदेशी पक्षियों की संख्या दिसंबर से लेकर फरवरी तक रहता है पक्षियों का जमावड़ा सारस क्रेन से लेकर

Jan 05, 2026 01:02 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। दिसंबर में बढ़ी ठंड ने रामगढ़ झील और चिड़ियाघर के वेटलैंड इलाके में विदेशी पक्षियों की चहचहाहट बढ़ा दी है। हिमालयन पक्षी को गोरक्षनगरी की आबोहवा रास आ रही है। एशिया महाद्वीप के पक्षियों का दीदार दोनों इलाकों में हो रहा है। इनमें ज्यादातर लेसर विसलिंग डक और ब्लैक विंग स्टील्ट शामिल हैं। हालांकि, साइबेरियन सहित अमेरिकन पक्षी चिड़ियाघर के वेटलैंड में अभी नहीं आए हैं। चिड़ियाघर के वेटलैंड में इन पक्षियों ने अपना ठिकाना बनाया है। इनकी संख्या पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि वेटलैंड में विदेशी पक्षियों के साथ ही स्थानीय प्रवासी पक्षी भी आते हैं।

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दिसंबर की शुरुआत में इस बार ठंड ज्यादा पड़ी है, तो पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। बताया कि वेटलैंड क्षेत्र में प्रवासी परिंदों के लिए पर्याप्त भोजन है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक है। इसमें किसी भी तरह के कृत्रिम चीजों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। 34 एकड़ के प्राकृतिक वेटलैंड में मछली और अन्य जलीय जीव भी प्राकृतिक है। यही कारण है कि काले पंजे वालों स्टिल्ट, कॉमन कूट, बिग कामोरेंट, लिटिल ग्रैब, स्पॉट बिल्ड डक, ब्रांज्ड विंग्ड जकाना जैसी पक्षियां आई हैं। इन सबके बाद भी इस बार भी वेटलैंड में साइबेरियन सहित अमेरिकन और ऑस्ट्रेलियाई पक्षी नहीं दिख रहे हैं। बखिरा और कुशीनगर में भी है पक्षियों का ठिकाना रामगढ़ताल से ज्यादा विदेशी पक्षी संतकबीरनगर के बखिरा और कुशीनगर के खजुआ ताल में दिख रहे हैं। यहां पर पहले से भी ये पक्षी आते थे, लेकिन इस साल इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है। यूरोपीय और ऑस्ट्रेलियाई पक्षी सबसे ज्यादा यहां हैं। इनकी संख्या करीब चार से पांच हजार बताई जा रही है। खजुआ और बखिरा ताल मेंनॉर्थन पिनटेल, यूरोशियन क्रूट, ग्रेट कार्मोरेंट, ब्राउन हैडेड गल, गडवॉल, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड, ब्लैक यूरोपियन टील आदि बड़ी संख्या में देखे गए हैं।