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9 अप्रैल, 2020|3:56|IST

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व्हाट्सएप संवाद : पुलिस दे भरोसा तभी लोग मदद को आगे आएंगे

व्हाट्सएप संवाद : पुलिस दे भरोसा तभी लोग मदद को आगे आएंगे

बेटी के साथ दरिंदगी हो, या फिर छेड़खानी। सभी गुस्से से भर जाते हैं। पर जब बेटियों के साथ विकृत मानसिकता के लोग सरेराह गलत करते हैं तो आसपास से गुजरने वाले ही खामोशी ओढ़ लेते हैं। ऐसा ही हुआ सोनौली हाइवे पर। 3 फरवरी को दो छात्राएं स्कूटी से आ रही थीं। कैम्पियरगंज से पीपीगंज के बीच कार सवार शोहदों ने उन्हें लगातार परेशान किया। छूने की कोशिश की। बेटियां गिर सकती थीं। मर सकती थीं। सड़क पर सैकड़ों वाहन थे। टोल नाके पर भी सैकड़ों लोगों ने यह हैवानियत देखी पर पुलिस को एक भी कॉल नहीं की गई। समाज की यह चुप्पी डराने वाली है। समाज की इसी चुप्पी की वजह के साथ समाधान जानने की कोशिश में आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने बुधवार को व्हाट्सएप संवाद आयोजित किया। 'बेटियों के दर्द पर समाज खामोश क्यो' विषय पर आयोजित संवाद में विशेषज्ञों ने इसके लिए पुलिस की कार्यशैली को जिम्मेदार माना। लोगों ने कहा कि पुलिस को भरोसा देना होगा कि सरेराह बेटियों का मदद करने वालों को परेशान नहीं किया जाएगा।

बोले लोग-

जो नारी समाज और परिवार के लिए अपने जीवन को दांव पर लगा देती है। जब उसपर कोई परेशानी आती है तो लोग मूकदर्शक बन किनारा करते हैं। नारी को दूसरों पर निर्भर होने की बजाय खुद को मजबूत करना होगा। जो बुरी नजर से देखे, उसे उसी अंदाज में जवाब देना होगा।

डॉ. सत्या पांडेय, पूर्व महापौर

हर पुरुष को महिला का सम्मान आना चाहिए। ऐसा न होने पर उन्हें सबक सिखाना चाहिए। साथ ही हर महिला को भी जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता है। तभी समाज के दुश्मनों को सबक मिलेगा। जहां आधी आबादी असुरक्षित होगी वह समाज प्रगति नहीं कर सकता है।

ऋचा चौधरी, शोध छात्रा, मनोविज्ञान

व्यक्ति जब तक संवेदनशीलता नहीं दिखायेगा तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। जब तक अपनी बेटी या अपना बेटा नहीं समझेगा, तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगा। समाज को आगे आना होगा। तब हम ऐसा माहौल दे सकेंगे कि कोई ऐसा काम के लिए आगे बड़े तो उसके मन मे डर हो।

राजेश मणि, सामाजिक कार्यकर्ता

जहां नारियों को पूजने की बात होती है, वहां लड़कियों के साथ छेड़खानी आम हो गयी। मूकदर्शक बने समाज को अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। पुलिस को भी संवेदनशील बनना होगा। हर बेटी चाहे वो किसी की भी हो, उसको सुरक्षित व सम्मानित रखना पूरे समाज का दायित्व है।

वंदना सिंह, सामाजिक कार्यकर्त्री

दो दिन पहले हुई घटना की शिकार बेटियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। ऐसा ही साहस हर बेटी को अपने अन्दर पैदा करना होगा। मनचले शोहदों को कड़े से कड़ा दंड मिलना चाहिए ताकि अगला ऐसा करने का साहस न करें। समाज को शिक्षित कर ऐसे सोच वालों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

डॉ. रेखा श्रीवास्तव, असिस्टेंट प्रोफेसर, सीआरडी पीजी

कम्युनिटी पुलिसिंग को हमें बढ़ावा देना होगा। जिससे लोग कानून उल्लंघन की दशा में मजबूती से हस्तक्षेप करें। पुलिस को भी आम लोगो मे यह विश्वास मजबूत करना चाहिए की यदि लोग कानून की मदद करते हैं तो उन्हें आगे किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।

प्रो मानवेन्द्र सिंह, समाजशास्त्र विभाग, डीडीयू

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  • Web Title: WhatsApp dialogue Police will give confidence only then people will come forward to help