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जो चाहे कर लो, हम नहीं करेंगे पैमाइश

सहजनवा के रामचरित्र और चौरीचौरा के राम दरस पाठक तो बानगी भर हैं। पूरे जिले में वर्तमान समय में 1500 के करीब मामले सिर्फ जमीन पैमाइश के ही लम्बित है। जमीन पैमाइश में यह देरी एक-दूसरे के प्रति विवाद की स्थिति पैदा कर रही है और इसी के चलते अक्सर ही जमीन को लेकर मारपीट, गाली-गलौच और खून खराबा तक की घटना सामने आ रही है।

एक-एक कड़ी जमीन, दूसरे द्वारा अवैध कब्जा या अन्य किसी भी विवाद की स्थिति पर हर तहसील में एसडीएम कोर्ट में धारा-24 के तहत जमीन की पैमाइश कराने की व्यवस्था दी गई है। इसमें लेखपाल और कानूनगों की की रिपोर्ट पर एसडीएम अपनी मुहर लगाते हैं। लेखपाल मूल दस्तावेजों के हिसाब से सम्बंधित जमीन को दोनों पक्षों के सामने नापते हैं जिसके बाद वह रिपोर्ट बनाते हैं। इस प्रक्रिया में अधिकमत तीन महीने का समय लिया जा सकता है। बावजूद यहां सैकड़ों ऐसे मामले हैं जो एक, दो या तीन नहीं बल्कि पांच-पांच साल से लम्बित हैं।

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अफसर देते हैं आदेश, फिर भी नहीं होती है पैमाइश

कई बार तो अफसर जल्द से जल्द मामले को निपटाने के लिए पैमाइश का आदेश देते हैं लेकिन लेखपाल और कानूनगों स्तर पर ही मामला लटका रहता है। इस तरह दर्जनों मामलों लेखपाल निलंबित तक हो चुके हैं लेकिन उसका कोई फायदा होते नहीं दिख रहा है।

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