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21 जनवरी, 2020|11:00|IST

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महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने की धर्मनिष्ठ राजनीति की प्रतिष्ठा: कुलपति

महंत दिग्विजयनाथ ने भारतीय राजनीति को एक नयी दिशा दी। कथित धर्मनिरपेक्ष राजनीति की दूषित अवधारणा को नकारते हुए धर्मनिष्ठ राजनीति की प्रतिष्ठा की तो वहीं इस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए महंत अवेद्यनाथ ने  भारतीय समाज में ’जातिवाद’ की विषबेलि को समूल रूप से उखाड़ फेंका। बिना किसी की परवाह के समरसता का मूलमंत्र देकर भारतीय धर्म गुरुओं का नेतृत्व किया। छुआछूत जैसी कुरीतियों के विरूद्ध जन जागरण अभियान छेड़कर हिन्दू समाज को एकता का पाठ पढ़ाया। 

महाराणा प्रताप पीजी कालेज जंगल धूसड़ में ’युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 50वीं एवं राष्ट्रसन्त महन्त अवेद्यनाथ की 05 वीं पुण्यतिथि की स्मृति में आयोजित सप्त दिवसीय व्याख्यान माला के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि डीडीयू के कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने यह बातें कहीं। उन्होंने आगे कहा कि महन्त दिग्विजयनाथ व महन्त अवेद्यनाथ के विराट व्यक्तित्व ऐसे मनीषी के भव्य स्वरूप हैं जिनमें धर्म एवं राष्ट्र के एक साथ साक्षात दर्शन होते हैं।

गोरक्षपीठ की यशस्वी परंपरा में यहां के पीठाधीश्वरों ने एकान्तिक साधना के स्थान पर लोक कल्याण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का मार्ग चुना। महंत दिग्विजयनाथ  एवं महंत अवेद्यनाथ अपने-अपने युग के एक ऐसे महानायक हैं जिन्होंने राजनीतिक, धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्रों में एक साथ पुनर्जागरण का उद्घोष किया। बीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध के तथा इक्कीसवी सदी के प्रारंभिक दशकों में वे जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं। ऐसे महायोगी हैं जिनका अन्तःकरण समता में स्थित है। जिन्होंने इस जीवित अवस्था में ही सबको जीत लिया। 

अध्यक्षता  करते हुए बीरबहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि भारत का गौरवशाली इतिहास दुनिया के सभी देशों की तुलना में अत्यन्त व्यापक है। एक ओर देश को स्वतंत्र कराने में तथा दूसरी ओर राष्ट्र को सशक्त बनाने में युगपुरुष महंत दिग्विजयनाथ एवं राष्ट्रसंत महन्त अवेद्यनाथ का नाम सर्वकालिक एवं सर्वदेशिक है। व्याख्यानमाला की प्रस्ताविकी प्राचार्य डॉ. प्रदीप राव ने रखी। उन्होंने सभी अतिथियों का स्वागत एवं आभार ज्ञापित किया। इससे पूर्व मां सरस्वती, गुरु गोरक्षनाथ एवं भारत माता के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन हुआ। महाविद्यालय की छात्राएं ललिता गुप्ता, श्वेता गौड़, अंबिका व मनीषा वर्मा ने सरस्वती वन्दना तथा एकल गीत ज्योति सिंह राजपूत ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने किया। समारोह में डीडीयू के प्रो. आरडी राय, प्रो. राजेश सिंह, डॉ. केशव सिंह, डॉ. बीएन सिंह, निर्भय सिंह महाराणा प्रताप इण्टर कालेज के दीपक शाही, प्रो. महेश शरण सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

एंटीबायोटिक घातक, आयुर्वेद की ओर बढ़ रही प्रमुख चिकित्सा पद्धतियां-डॉ. अनंत नारायण
उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ( डीआरडीओ) नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनन्त नारायण भट्ट ने ‘आयुर्वेद एज मार्डन मेडिसिन: प्रास्पेक्ट्स, लिमिटेशन्स एण्ड चैलेंजेज’ विषय पर विशिष्ट व्याख्यान देते हुए कहा कि आयुर्वेद पृथ्वी पर जीवनदायनी के समान है। आपा-धापी वाली जीवन शैली और असंतुलित आचार व्यवहार के मनुष्य जीवन पर संकट गहराता जा रहा है। उससे निपटने के लिए  एंटीबायोटिक इत्यादि दवाईयों का प्रयोग बढ़ा मगर उसके परिणाम भयावह हैं। ऐसे में आज सभी प्रमुख चिकित्सा पद्धतियां आर्यवेदिक पद्धति को अपनाने की तरफ आगे बढ़ी है। यहां तक की एलोपैथी पद्धति भी आर्युवेद के सिद्धान्त को अपनाकर दवाईयां निर्मित कर रही है। 

आयुर्वेद के रूप में प्रकृति ने मानव के लिए दीर्घायु का वरदान दिया है। आयुर्वेद प्राचीनकाल से ही भारत की यशस्वी परम्परा में रची बसी है। मनुष्य के शरीर में बीमारियों से लड़ने के लिए स्वयं प्रतिरोधक क्षमता विद्यमान रहती है। आयुर्वेद उन क्षमताओं को न केवल निखारता है बल्कि उसे व्यापक स्वरूप प्रदान करता है। भारतीय परम्परा में पंच तत्व पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश का समन्वय एवं संतुलन मानव के स्वाथ्य के लिए अपरिहार्य माना गया है। अनेक शोध और अनुसंधानों द्वारा इन पंचतत्वों के संतुलन महत्व को भी स्वीकार किया गया है। इस कारण आज प्रत्येक मनुष्य के लिए आयुर्वेद के विज्ञान को समझना अत्यन्त आवश्यक है। शिक्षण संस्थाओं में भी आयुर्वेद की महत्ता एवं चिकित्सा पद्धति को पाठ्यक्रम के रूप में शामिल किया जाना अवयंभावी है।
 

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  • Web Title:VC said Mahant Digvijay nath and Avaidhyanath has established religious politics