गोरक्षनगरी में 2220 एकड़ में बोया जाएगा श्रीअन्न
योगी सरकार ने केंद्र की ‘श्रीअन्न योजना’ को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस योजना के तहत 2220 एकड़ में रबी सीजन में श्रीअन्न की खेती की जाएगी। किसानों को निशुल्क बीज की मिनी किट उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी आय दोगुनी करने का प्रयास किया जाएगा।
गोरखपुर, प्रमुख संवाददाता। योगी सरकार ने केंद्र सरकार की ‘श्रीअन्न योजना’ को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत जनपद में 2220 एकड़ में रबी सीजन में श्रीअन्न की खेती की जाएगी। इससे न केवल श्रीअन्न का रकबा बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय भी दोगुनी करने का जरिया बनेगा। सरकार किसानों को निशुल्क ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो और सांवा के बीज का मिनी किट उपलब्ध कराएगी। रागी का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय होने से रागी की खेती पर ज्यादा जोर है। कृषि विभाग किसानों को मिनी किट देने के साथ श्रीअन्न के फायदे भी बता रहा है।
बाजरा की मिनीकिट का वजन 02 किलोग्राम है। ज्वार, रागी, कोदो और सांवा की मिनीकिट 03-03 किलोग्राम की है। प्रत्येक मिनी किट एक एकड़ जमीन के लिए निर्धारित है। मिलेट्स मिशन के तहत किसानों को मिलेट्स की खेती का समय, मौसम, रोग, कीटनाशक समेत अन्य तकनीकि ज्ञान भी दिया जा रहा है।ब्लॉकवार मिनी किट आवंटितउप कृषि निदेशक धनंजय सिंह के मुताबिक सावां, कोदो और रागी/मडुआ के क्रमश: 480-480 मिनी किट, शंकर बाजरा के 740 और ज्वार के 40 किट उपलब्ध हैं। इसे सभी 19 ब्लॉकों को आवंटन कर दिया गया है। प्रत्येक ब्लॉक में सावां, कोदो और रागी/मडुआ के 24-24 मिनी किट और रागी/मडुआ के 37-37 किट और ज्वार के 02-02 मिनी किट निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।कृषि यंत्रों पर सब्सिडीमिलेट्स की खेती के साथ ही इसके लिए जरूरी कृषि यंत्रों पर भी सरकार का जोर है। सरकार की ओर से 50 प्रतिशत की सब्सिडी पर रागी थ्रेसर कम पर्लर, मल्टी मिलेट्स क्रॉप थ्रेसर भी दे रही है।इसलिए करें मोटे अनाज की खेतीपद्मश्री डॉ रामचेत चौधरी कहते हैं कि वर्तमान में मोटे अनाज की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा है। मोदी सरकार की श्री अन्न योजना और उप्र मिलेट्स पुरुरोद्धार कार्यक्रम से बाजार में मोटे अनाजों की लगातार मांग बढ़ रही है। श्रीअन्न सेहत के लिहाज से फायदेमंद है। इनके सेवन से डायबिटीज, मोटापा और पाचन संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है। मिलेट्स में पोषक तत्वों की अच्छी मात्रा होती है, जो सेहत के लिए बेहद जरूरी है। मिलेट्स की खेती में रोग और कीट भी कम लगते हैं, जिससे इनकी खेती में कीटनाशक का खर्च बेहद कम होता है।रसायनिक उर्वरक का इस्तेमाल ज्यादा नहींश्रीअन्न (मिलेट्स) की खेती में रसायनिक उर्वरक और कीटनाशक की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। जल और समय की भी बचत होती है। श्रम भी कम लगता है। एक किलोग्राम धान पैदा करने के लिए 9000 लीटर पानी की जरूरत होती है। जबकि, एक किलोग्राम बाजरा, ज्वार, रागी, सावां या कोदो उगाने के लिए 3000 लीटर पानी की जरूरत होती है। धान की एक हेक्टेयर में खेती करने के लिए 150 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस और 60 किलोग्राम पोटेशियम की जरूरत होती है। मिलेट्स में ज्वार और बाजरा की एक हेक्टेयर में खेती करने पर 80 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटेशियम की जरूरत होती है। रागी और कोदो की एक हेक्टेयर में खेती करने के लिए 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 40 किलोग्राम फास्फोरस और 40 किलोग्राम पोटेशियम की जरूरत होती है।किसान ई-लॉटरी से करें बुकिंगउप कृषि निदेशक धनंजय सिंह कहते हैं कि विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण एवं बुकिंग के उपरांत ई-लॉटरी के माध्यम से बीज उपलब्ध कराया जाएगा। किसान भाई विभागीय पोर्टल https://agriculture.up.gov.in पर जाकर अपनी आवश्यकता अनुसार बीज की बुकिंग कर सकते हैं। अंतिम तिथि 10 मई है।
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


