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ऊपर के पानी से इंसेफेलाइटिस, नीचे से कैंसर होने का खतरा

पानी ही जीवन है लेकिन गोरखपुर और आसपास के जिलों में पीने के लिए शुद्ध पानी हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। ऊपर यानि कम गहराई (25 से 100 फीट तक) के पानी में जहां इंसेफेलाइटिस (एईएस), पीलिया जैसी बीमारियों के विषाणु मिल रहे हैं तो नीचे (100 से 250 फीट तक) के पानी में आर्सेनिक का जहर घुल रहा है। पानी में आर्सेनिक की अधिकता त्वचा रोगों से लेकर कैंसर तक की वजह बन सकती है। 

गोरखपुर के आठ ब्लॉकों और शहर से जुटाए गए 248 में से 36.29 प्रतिशत पानी के नमूनों में आर्सेनिक पाया गया। ‘इंटरनेशनल जनरल ऑफ इंजीनियरिंग रिसर्च एंड टेक्नालॉजी’ में प्रकाशित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष एवं पर्यावरणविद् प्रो.गोविन्द पांडेय और एमटेक छात्र संजय कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक आर्सेनिक की सबसे अधिक मात्रा खोराबार ब्लाक में पाई गई। प्रो.गोविंद पांडेय ने बताया कि बड़हलगंज, ब्रह्मपुर, कैम्पियरगंज, जंगल कौड़िया, कौड़ीराम, खोराबार, पिपरौली, सहजनवां और सरदारनगर से ये नमूने 2011 में मानसून से पहले लिए गए थे। जबकि गोरखपुर शहर से जून और जुलाई में नमूने लिए गए। 

एमएमएमयूटी की पर्यावरण प्रयोगशाला में हुई जांच में 248 में 29.84 प्रतिशत नमूनों में 10 से 50 पीपीबी (पार्ट्स प्रति बिलियन) और 6.65 प्रतिशत नमूनों में 50 पीपीबी से अधिक आर्सेनिक पाया गया। खोराबार में सर्वाधिक 91 पीपीबी आर्सेनिक पाया गया। जबकि यह मात्रा 10 पीपीबी से अधिक नहीं होनी चाहिए। पिपराइच, बड़हलगंज, खोराबार और जंगल कौड़िया से लिए गए नमूनों में से 50 प्रतिशत से अधिक में तय मानक से ज्यादा आर्सेनिक पाया गया। 

आर्सेनिक प्रभावित जिलों में शामिल हुआ गोरखपुर 
प्रो.गोविंद पांडेय के मुताबिक पानी में आर्सेनिक की समस्या पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे पहले बलिया में पाई गई थी। पांच साल पहले गोरखपुर भी आर्सेनिक प्रभावित जिलों की सूची में शामिल हो गया। इस समय देश के 12 राज्यों के 96 जिले आर्सेनिक प्रभावित हैं। इनमें 20 जिले उत्तर प्रदेश के हैं। 

बढ़ रहे हैं कैंसर रोगी
बीआरडी मेडिकल कालेज में नए पुराने साढ़े 12 हजार कैंसर रोगी हर साल देखे जाते हैं। वहां कार्यरत डा.राकेश रावत के मुताबिक आने वाले कैंसर रोगियों में आर्सेनिक की भूमिका के बारे में अभी तक कोई ठोस अध्ययन नहीं किया गया है लेकिन आठ से दस प्रतिशत मामलों में आर्सेनिक एक वजह हो सकता है। हनुमान प्रसाद पोद्दार अस्पताल के डा.शशांक शेखर ने बताया कि उनके यहां हर साल आने वाले करीब साढ़े चार हजार मरीजों में से करीब ढाई हजार में कैंसर कन्फर्म होता है। आर्सेनिक को लेकर अभी तक कोई विशेष शोध नहीं हुआ है। कैंसर की विभिन्न वजहों में से यह एक है और करीब 10 प्रतिशत मरीज ऐसे आते हैं जिनमें इसकी भूमिका होने का शक किया जा सकता है। 

गंदगी ने प्रदूषित किया कम गहराई का पानी  
खुले में शौच और गंदगी की वजह से कम गहराई यानि 25 से 100 फीट तक का पानी प्रदूषित हो चुका है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में चार दशक से मासूमों पर कहर बरपा रही इंसेफेलाइटिस (एईएस) के पीछे दूषित जल को सबसे बड़ी वजह माना जाता है। सरकार ने इससे बचने के लिए 145 फीट तक की गहराई पर इंडिया मार्क टू हैंडपम्प गड़वाने शुरू किए लेकिन अब इतनी गहराई का पानी भी सुरक्षित नहीं रहा। एमएमएमयूटी के शोध में ज्यादातर नमूने इंडिया मार्क टू हैंडपम्प से लिए गए थे। 

पानी में कैसे घुलता है आर्सेनिक 
भूगर्भ में 80 से 100 फीट तक जाने पर चट्टानें मिलती हैं जिनमें आर्सेनो पायराइट पाए जाते हैं। ये पानी में अघुलनशील हैं। कम गहराई के पानी के प्रदूषित होने के चलते लोगों ने ज्यादा गहराई या दूसरे स्तर से पानी का दोहन तो शुरू कर दिया लेकिन पानी के चक्रीकरण (वॉटर रिचार्ज) पर ध्यान नहीं दिया। अत्यधिक दोहन की वजह से भूगर्भ के उस स्तर पर जो खाली जगह बनती है वहां हवा भरती है। इसमें 21 प्रतिशत आक्सीजन होती है जो आर्सेनो पायराइट को आक्सीकृत करके पिट्टीसाइट्स में बदल देती है। पिट्टीसाइट्स, ‘टी बैग’ की प्रकृति का खनिज है जिसमें से निकलकर मानसून के समय खाली जगह भरने पर आर्सेनिक पानी में घुल जाता है। 

 ये उपाय होने चाहिए
-भूगर्भ जल के दोहन में कमी लाई जानी चाहिए
-सिंचाई, निर्माण और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले के पानी के उचित प्रबंधन से ऐसा किया जा सकता है
-प्राकृतिक एवं कृत्रिम तरीकों से वॉटर रिचार्जिंग पर ज्यादा जोर दिए जाने की जरूरत है 
-जनजागृति से पानी के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगानी चाहिए

किस ब्लाक के कितने नमूने 
ब्लाक    कुल नमूने  10 पीपीबी से कम  10 से 50 पीपीबी 50 पीपीबी से अधिक    अधिकतम कितनी पाई गई मात्रा 
बड़हलगंज 14    2            11         1                            63
ब्रह्मपुर     23    14            5        4                            56 
कैम्पियरगंज 40     26         11        3                            74
जंगल कौड़िया18 8            10        0                            40 
कौड़ीराम    16    12            4        0                            39 
खोराबार    20    5            10        5                            91    
पिपरौली    10    1            14        3                            63
सहजनवां 10     10            0        0                             9
सरदारनगर 19    18         1        0                             15
शहर    70     62            8         0                             47 
कुल    248     158             74        16     

 

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  • Web Title:Upper ground water may cause Encephalitis lower ground water cancer in Gorakhpur