UP Vidhansabha adhyksh Hriday Narayan Dixit speaks on removal of article 370 from Jammu Kashmir in Gorakhpur Gorakhnath Temple - कश्‍मीर से धारा 370 हटाए जाने पर यूपी के विधानसभा अध्‍यक्ष ने कही ये बात: VIDEO DA Image

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कश्‍मीर से धारा 370 हटाए जाने पर यूपी के विधानसभा अध्‍यक्ष ने कही ये बात: VIDEO

विधानसभा अध्यक्ष ह्दय नारायण दीक्षित ने कहा कि जिस कश्मीर में शिव और शक्ति की उपासना होती है, वहां लगातार बारुद के धमाके उत्पीड़न दायक वातावरण पैदा कर रहे थे। यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद ही था कि सारा देश एक हो गया। घोषणा हुई कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 को खोखला कर दिया गया है, वह ‘प्रेत’ अब ‘भूत’ हो गया है। पूरे देश में आनंद की लहर थी। इस आनंद की लहर का केंद्र सांस्कृतिक राष्ट्रवाद था।  

विधानसभा अध्यक्ष शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर के स्मृति भवन सभागार में ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ की 50वीं एवं महंत अवेद्यनाथ की 5वीं पुण्यतिथि समारोह में ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एवं संस्कृत’ विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। मुख्य वक्ता विधानसभा दीक्षित ने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद अन्य देशों के राष्ट्रवाद से पृथक है क्योकि भारत के राष्ट्रवाद में संस्कृति महत्वपूर्ण है। अन्य देशों में निश्चित भूभाग और वहां का राजा महत्वपूर्ण है। सर्वप्रथम ऋग्वेद में कई बार राष्ट्र का वर्णन हुआ है। अथर्ववेद में राष्ट्र की परिभाषा बताई गई कि त्याग, तपश्या और साहचर्य से राष्ट्र का जन्म हुआ है। वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, वन्देमातरम् सभी में राष्ट्र को माता माना गया। भारत माता हमारे प्राणों में समाई हैं। यह प्रेरणा हमें संस्कृत साहित्य से मिलती है। 

संस्कृत माता एवं संस्कृति उसकी पुत्री है, दोनों का प्रभाव साथ-साथ पड़ता है। संस्कृत के ऋग्वेद में सबसे पहले विज्ञान का दृष्टिकोण दिखता है। काल की गणना, सूर्य के गति का ज्ञान के साथ वैज्ञानिक जिज्ञासा संस्कृत साहित्य में सर्वत्र विद्यमान है। उपनिषदों में जिज्ञासु प्रश्न करता है, ऋषि उत्तर देता है। हम जिज्ञासु राष्ट्र है, हम अंधविश्वासी नहीं है। प्रश्न की परम्परा एवं आध्यात्मिक आस्था केवल हमारी संस्कृति में है जिसे संस्कृत संरक्षित करते आ रही है। उन्होंने कहा कि हमने 6 हजार साल से संस्कृति को संजोकर रखा है। हमारी संस्कृति और संस्कृत एक दूसरे के पूरक हैं। यदि संस्कृत नहीं रहेगी तो संस्कृति भी हम नहीं बचा सकेंगे। 

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