Up lok Sabha election result 2019 live update live coverage Deoria loksabha seat result - देवरिया में रमापति की शानदार जीत, गठबंधन को पछाड़ा DA Image

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देवरिया में रमापति की शानदार जीत, गठबंधन को पछाड़ा

देवरिया में साढ़े 11 बजे तक हुई मतगणना में भाजपा के रमापति राम त्रिपाठी को 116840 मत और सपा बसपा गठबंधन के विनोद जायसवाल को 66745 मत मिले थे। 

देवरिया में भाजपा प्रत्‍याशी रमापति राम त्रिपाठी ने भी बढ़त बना ली है। सुबह दस बजे तक हुई मतगणना में वह 7541 मतों से आगे चल रहे हैं।

देश का शायद ही कोई जिला हो, जहां देवरिया के लोग न मिलें। सुदूर उत्तर पूर्व से कश्मीर तक। धुर दक्षिणी प्रांतों के गांवों से गुजरात के पश्चिमी तटों तक। हर कहीं देवरिया के लोग पसीना बहाते मिल जाएंगे। अफसर, उद्योगी, मेहनतकश.. हर भूमिका में। विदेश में भी देवरिया के लोग भारत का झंडा बुलंद कर रहे हैं। इस जिले में पलायन बड़ा मुद्दा है। शायद इन्हीं परिस्थितियों में गजब की जीवट-जिजीविषा पुष्पित हो सकती है। इसी धरती पर देवरहा बाबा ने बरसों साधना की और उनका आकर्षण प्रधानमंत्रियों-राष्ट्रपतियों तक को देवरिया की ओर खींचता रहा। इसी जिले में 14 अगस्त 1942 को 13 बरस के छात्र रामचंद्र ने ब्रिटिश कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहरा दिया और अंग्रेजों की पुलिस की गोली सीने पर खाकर 4 दोस्तों के साथ शहीद हो गए। देवरिया के तमाम स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार अब उत्तराखंड में बसे हैं। इन परिवारों को आजादी के बाद तराई में खेती की जमीनें दी गई थीं। पूरे देश को धान की शानदार इंद्रासन प्रजाति देने वाले स्व. इंद्रासन सिंह भी देवरिया के ही थे। ऐसे देवरिया में चीनी मिलें बंद हैं। गन्ना किसान परेशान हैं। रोजगार के लिए गांव छोड़ने की विवशता पहले से भी विकराल हुई है। एक हिस्सा बाढ़ से तबाह होता है। ऐसे तमाम संघर्षों से बावस्ता देवरिया के लोगों ने इस आम चुनाव में क्या सोचा? देवरिया की जमीन पर किन मुद्दों पर यह चुनाव लड़ा गया? और इस लड़ाई का परिणाम क्‍या हुआ आज इसका पता चल जाएगा। भाजपा के रमापति राम त्रिपाठी, सपा-बसपा गंठबंधन के विनोद जायसवाल और कांग्रेस के नियाज के बीच मुकाबले का रिजल्‍ट आज आ जाएगा। आइए जानते हैं कि उनके बीच 2019 की जंग के अहम मुददे क्‍या रहे-

उत्तरी पूर्वांचल में देवरिया अकेली सीट है, जहां भाजपा नेतृत्व ने उम्र के कारण सांसद का टिकट काट दिया। 2014 के चुनाव में कलराज मिश्र देवरिया से जीत कर मंत्री बनाए गए थे। हालांकि कि 75 वर्ष से ज्यादा उम्र होने के कारण बाद में उन्हें मंत्री पद से मुक्त कर दिया गया। भाजपा ने यहां पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. रमापतिराम त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया है। उनके प्रत्याशी बनने की अंतर्कथा संतकबीर नगर के ‘जूताकांड’ से जुड़ी है। संतकबीर नगर के सांसद शरद त्रिपाठी डा. रमापतिराम के पुत्र हैं। जिला योजना की बैठक में अपनी ही पार्टी के विधायक पर जूते बरसा कर शरद चर्चा में आए थे। इस ‘जूताकांड’ का वीडियो इतना वायरल हुआ कि पार्टी को अंतत: शरद का टिकट काटना पड़ा। पूर्वांचल में ब्राह्मण वर्चस्व को देखते हुए संतुलन बनाने के लिए भाजपा ने शरद के पिता और उप्र में भाजपा संगठन के  ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले डा. रमापति राम त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया है। रमापतिराम देवरिया में कड़े संघर्ष में फंसे हैं। पुत्र शरद उनके प्रचार में जुटे हैं। दबी जुबान कुछ लोग इलाके में चर्चा करते हैं कि क्षत्रियों में शरद की ‘जूताबाजी’ को लेकर नाराजगी है। कुछ लोगों ने बैठकें करके विरोध भी जताया है। लेकिन भाजपा के लोग इसे अफवाह बताते हैं। उधर गठबंधन में यह सीट बसपा के खाते में गई, जिसने विनोद जायसवाल को उतारा है। विनोद के ससुर गोरख प्रसाद जायसवाल 2009 में देवरिया से सांसद रहे हैं। उधर कांग्रेस ने नियाज अहमद को टिकट दिया है। नियाज को 2012 में कांग्रेस ने पथरदेवा विस क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन ऐन वक्त पर उनका टिकट कट गया था। उस चुनाव में नियाज निर्दल चुनाव लड़े और हार गए। 2014 में भी वह बसपा से लोस चुनाव लड़े और हार गए। 

देवरिया में भाजपा और गठबंधन की सीधी लड़ाई दिख रही है। कांग्रेस के नियाज गठबंधन प्रत्याशी की रफ्तार रोक रहे हैं तो भाजपा को निर्दल लड़ रहे रामाशीष राय नुकसान पहुंचा रहे हैं। राय भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं और टिकट न मिलने पर बिना दल के चुनावी समर में कूद पड़े हैं। देवरिया में भी जातियां मुद्दों का चोला ओढ़ कर बोल रही हैं। ब्राह्मणों की बड़ी संख्या है और यह वर्ग परंपरागत रूप से भाजपा का साथ देता रहा है। उधर गठबंधन के साथ दलित, यादव मजबूती से लामबंद हैं। कांग्रेस प्रत्याशी ने मुस्लिम वोटोंं में अच्छी सेंध लगा रखी है। तो गठबंधन प्रत्याशी ने स्वजातीय वोटरों की अच्छी तादाद को लुभाया है। ऐसे में हालात कांटे की टक्कर के हैं।

देवरिया लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले पांच विस क्षेत्रों में चार पर भाजपा के विधायक हैं। केवल एक तमुकुहीराज विस क्षेत्र पर कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू काबिज हैं। वह विधानसभा में कांग्रेस के नेता भी हैं। 

योजनाएं तो गांव तक पहुंची पर वोटर खामोश
देवरिया शहर के करीब 12 किमी दूर गांव अहिरौली। सात टोलों वाले इसे गांव की आबादी 3500 है। यहां 11 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास मिले हैं। 200 से ज्यादा घरों तक उज्जवला की गैस पहुंची है। 160 परिवारों को टॉयलेट दिए गए हैं। 200 से ज्यादा परिवारों को किसान सम्मान निधि की एक किस्त मिल चुकी है। गांव के लोग साफ बात करने से बचते हैं। इस बार गांव किसे जिताएगा? रुस्तम अली, दिलावर और जगदीश पहले एक-दूसरे को देखते हैं फिर जवाब देते हैं, अभी तो सोचा नहीं है। योजनाओं का लाभ मिला? जवाब है-हां योजना तो हर सरकार लाती है। उससे क्या? इसी बीच ग्राम प्रधान दीनानाथ पाल आ जाते हैं। वह कहते हैं-पिछले चुनाव में गांव से भाजपा को सबसे ज्यादा वोट मिले थे। इस बार शायद उतने वोट न मिलें। क्यों? वह कहते हैं-गठबंधन मजबूत है। लोग उसके लिए सोच रहे हैं। इस गांव में कुुछ लोग कांग्रेस का झंडा भी बुलंद किए हैं। 

प्रत्याशी नहीं मोदी के नाम पर साथ
बैकुंठपुर चौराहे पर चाय-पकौड़ी की छोटी सी दुकान। पांच-सात ग्राहकों का ऑर्डर पूरा करने में दुकानदार सुनील मद्धेशिया व्यस्त हैं। इस बार किसका जोर रहेगा? युवा अनिल, कमलेश प्रसाद, अजय तिवारी, चंदन और राजेश मिश्र एक साथ बोलते हैं मोदी का। लेकिन यहां तो मोदी नहीं लड़ रहे हैं? उनका जवाब है-मोदी ही लड़ रहे हैं। हर सीट पर मोदी ही प्रत्याशी हैं। इन नौजवानों को स्थानीय मुद्दों और जातीय समीकरणों से कोई लेना-देना नहीं है। बीएचयू में पढ़ रहे और छुट्टी में गांव आए राजेश मिश्र कहते हैं, ‘मोदी ने भारत का सम्मान बढ़ाया है। एक दिन में हमारा पायलट पाकिस्तान को छोड़ना पड़ा।’ कमलेश जोड़ते हैं-किसानों को साल में छह हजार रुपए देने का फैसला किसी और सरकार ने तो नहीं किया। गरीबों और किसानों के लिए मोदी सरकार ने बहुत काम किया। लेकिन कांग्रेस भी तो 72 हजार रुपए सालाना वाली न्याय योजना का वायदा कर रही है? यह नौजवान उसे हवाई वायदा बताते हैं।

गठबंधन सबसे मजबूत
यहां से कुछ ही दूरी पर संस्कृत स्कूल के पास कुछ लोग खड़े हैं। इनमें से दिनेश किसान हैं लेकिन किसान सम्मान निधि और न्याय योजना दोनों की आलोचना करते हैं। दिनेश ने कहा-भाजपा और कांग्रेस दोनों अमीरों की पार्टियां हैं। गरीबों का भला तो गठबंधन ही करेगा। उनके साथ खड़े राम दरश, सुखवीर और अंकित भी उनसे सहमत हैं। इन नौजवानों ने भाजपा के अच्छे दिन और कांग्रेस की कर्जमाफी सबको जुमला करार दिया। उनका कहना था कि सपा-बसपा गठबंधन ही गरीबों का सच्चा हिमायती है। 

देवरिया के मुद्दे
बेच दी गईं चार चीनी मिलें, 2200 लोग हो गए बेरोजगार 

कभी देवरिया में पांच चीनी मिलें चला करती थी। इसमें से सरकारी क्षेत्र की चार चीनी मिलों को एक-एक कर बेच दिया गया। मिलों में काम करने वाले 2200 कर्मचारी बेरोजगार हो गए। गन्ने की खेती से जुडे़ 28 हजार किसान परिवार बदहाल हो गए। इन चीनी मिलों को चालू करने की बातें तो चुनाव में जरूर होती हैं पर गंभीर पहल आज तक नहीं हुई।

मुफीद मिट्टी में गन्ने की पैदावार अच्छी होने के चलते आजादी के पहले से ही देवरिया में चीनी मिलें लगनी शुरू हो गई थी। जिले की पहली भटनी की चीनी मिल 1919 में चालू हो गई थी। इसके बाद 1933 में बैतालपुर, 1934 में देवरिया और 1947 में गौरीबाजार में चीनी मिलें लगीं। 1995 से 2008 के बीच ये चीनी मिलें बंद होती चली गईं। बाद में बसपा के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने इन्हें एक-एक कर बेच दिया। अब मामला कोर्ट में है। 

घटता गया गन्ने का रकबा  
वर्ष               हेक्टेयर
2013-14-----16732
2014-15-----13739
2015-16-----9644
2016-17-----6961
2017-18-----7528

बकाया भुगतान को डेढ़ साल से कर रहे आंदोलन
गौरी बाजार चीनी मिल के करीब 500 कर्मचारियों का 21 करोड़ रुपया वेतन बकाया है। जबकि गन्ना किसानों का मिल पर 1.62 करोड़ बकाया है। किसान व कर्मचारी किसान, मजदूर संघर्ष समिति के बैनर तले बकाया भुगतान करने की मांग को लेकर डेढ़ साल से मिल परिसर में इतवारी आंदोलन चल रहा है। किसान और मिल के कर्मचारी हर रविवार को समिति के अध्यक्ष ऋषिकेश यादव के नेतृत्व में मिल परिसर में आंदोलन करते हैं।

बैतालपुर चीनी मिल चलाने को 113 दिन चला आंदोलन 
बैतालपुर चीनी मिल चलाने की मांग को लेकर बैतालपुर चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति द्वारा 113 दिन कलेक्ट्रेट में धरना व उपवास किया गया। आंदोलन के दौरान ही किसानों ने विभिन्न संगठनों के साथ गन्ना लेकर सड़कों पर प्रदर्शन भी किया। लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा के बाद चुनाव आचार संहिता को देखते हुए प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ ही आंदोलन समाप्त हो गया।  

केन यूनियन चेयरमैन एसोसिएशन उप्र के प्रदेश महासचिव अनिल मणि त्रिपाठी कहते हैं कि चीनी मिलों के बंद होने के बाद गन्ने की खेती करने वाले पंजीकृत किसानों की संख्या 28 हजार से घट कर 23 हजार हो गई है। उन्होंने खेती का रकबा भी घटा लिया है। यदि बैतालपुर व देवरिया के आसपास कोई चीनी मिल लग जाए तो इससे बदहाल हो चुके किसानों की आर्थिक दशा फिर से सुधर जाएगी। 

देवरिया की बंद चीनी मिलें 
भटनी चीनी मिल: मिल1919 में चालू हुई थी। 6 हजार कंुतल प्रतिदिन पेराई क्षमता वाली इस मिल में 350 कर्मचारी थे। 2005 में मिल बंद हो गई। 2011 में यह हनी वेल्स कंपनी को बेच दी गई।          

बैतालपुर चीनी मिल: इसकी स्थापना 1933 में हुई। 9 हजार प्रतिदिन पेराई क्षमता वाली यह चीनी मिल 2008 में बंद हो गई। इस चीनी मिल में 694 कर्मचारी काम करते थे। 2011 में इसे द डायनमिक इंडिया सुगर लिमिटेड को बेच दिया गया।

देवरिया चीनी मिल: 1934 में चालू हुई। इसकी पेराई क्षमता प्रतिदिन 5 हजार कुंतल थी। इसमें तीन शिफ्टो में कुल 400 कर्मचारी काम करते थे। यह पुरानी मिल 2007 में बंद हो गई। वर्ष 2011 में इसे नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया।  

गौरी बाजार चीनी मिल: 1947 में चालू हुई। इस मिल की 9 हजार कंुतल प्रतिदिन पेराई क्षमता थी। इसमें विभिन्न शिफ्टों में 700 कर्मचारी कार्य करते थे। 1996 में यह चीनी मिल बंद हो गई। 1998 में इसे गंगोत्री इंटर प्राइजेज, 2005 में जेबीएस सुगर कंपनी और फिर 2011 में राजेंद्रा इस्पात कोलकाता को बेच दिया गया।

कृषि विश्वविद्यालय बनाने की मांग  
देवरिया के बीआरडी पीजी कॉलेज को कृषि विश्वविद्यालय बनाने की मांग करीब दो दशक से चल रही है। 1954 में कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड केन रिसर्च के नाम से इस कॉलेज की स्थापना हुई। तब यह आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध था। 1956 में गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थापित हुआ तो यह बीआरडी पीजी कॉलेज के नाम से इससे जुड़ गया। कॉलेज के पास करीब 30 एकड़ जमीन है।  शुरुआत में यहां केवल कृषि की पढ़ाई होती थी। बाद में बीएससी (गणित और विज्ञान), बीए, एमए और बीएड की पढ़ाई भी शुरू हो गई। इतने वर्षों बाद आज भी जिला मुख्यालय पर यही एकमात्र साइंस कालेज है।   

नासूर से कम नहीं है पलायन 
देवरिया के लिए पलायन किसी नासूर से कम नही है। जिले में रोजगार का कोई अवसर नहीं होने के चलते बड़ी संख्या में लोग गैर प्रांतों के साथ ही खाड़ी देशों में रोजगार की तलाश में जाते हैं। रामपुर कारखाना के कोटवां, केशपुर, करमहां और चइयापुर के लगभग हर घर का कोई न कोई खाड़ी देश में है। देसहीं देवरिया के कौलाछापर और शामपुर के रहने युवा भी बालिग होते ही रोजगार की तलाश में पलायन कर जाते हैं। इस प्रयास में कई बार ये ठगी के शिकार भी होते हैं। देवरिया के सिंधी मिल कॉलोनी के रहने वाले मोहम्मद शमीम इकबाल बताते हैं कि इलाही टोला के सेराज मंसूरी को सऊदी अरब में मालिक ने बंधक बना लिया था। वह उन्हें घर नहीं आने दे रहा था। बाद में विदेश मंत्रालय की मदद से ढाई साल बाद घर लौट पाए। रामपुर कारखाना के शाहजहांपुर के रामवेलास गुप्ता वर्ष 2013 में दुबई ड्राइवरी करने गए थे। एक सड़क हादसे के बाद इन्हें जेल भेज दिया गया। उनकी पत्नी सुनीता ने जिलाधिकारी के साथ ही विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई तब जाकर 17 मार्च 2019 को वापस लौट सके। 

देवरिया 
कुल मतदाता: 17,29,583
पुरुष मतदाता:  9,44,821
महिला मतदाता: 7,84,666
अन्य मतदाता:            96

देवरिया लोकसभा सीट के अंतर्गत विस क्षेत्र
देवरिया सदर, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, तमुकुहीराज, फाजिलनगर 

देवरिया से अब तक रहे सांसद
1952: सरयू प्रसाद, कांग्रेस  
1957: रामजी वर्मा, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी 
1962: विश्वनाथ राय, कांग्रेस
1967: विश्वनाथ राय, कांग्रेस
1971: विश्वनाथ राय, कांग्रेस
1977: उग्रसेन, भारतीय लोकदल 
1980: रामायण राय, कांग्रेस  
1984: राजमंगल पाण्डेय, कांग्रेस
1989: राजमंगल पांडेय, जनता दल
1991: मोहन सिंह, जनता दल
1996: श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, भाजपा
1998: मोहन सिंह, सपा
1999: श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी, भाजपा
2004: मोहन सिंह, सपा
2009: गोरख प्रसाद जायसवाल, बसपा
2014: कलराज मिश्र, भाजपा

2014 का परिणाम
कलराज मिश्र, भाजपा: 4,96,500
नियाज अहमद, बसपा: 2,31,114
बालेश्वर यादव, सपा:  1,50,852
सभाकुंवर, कांग्रेस:        37,752

2019 में देवरिया के दावेदार
डा. रमापति राम त्रिपाठी, भाजपा
उम्र 69 वर्ष। आयुर्वेद से स्नातक। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष। गोरखपुर जिले के झुरिया गांव निवासी। 1993 में कौड़ीराम विस क्षेत्र से चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। सन् 2000 से 2012 तक विधान परिषद सदस्य रहे। 2007 से 2010 तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। 2012 में महराजगंज जिले की सिसवा विस सीट से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 

विनोद जायसवाल, बसपा
उम्र 58 वर्ष। इंटरमीडिएट उत्तीर्ण। नामांकन के हलफनामे के मुताबिक कदमकुआं, पटना, बिहार निवासी। देवरिया जिले के लार कस्बे के मूल निवासी। पेशे से व्यवसायी। विनोद के ससुर गोरख प्रसाद जायसवाल देवरिया से 2009 में सांसद बने। साले राम प्रसाद जायसवाल बरहज से विधायक रहे। 

नियाज अहमद, कांग्रेस
उम्र 57 वर्ष। इंटरमीडिएट उत्तीर्ण। देवरिया के देसहीं देवरिया के मूल निवासी। उद्योगपति। 2009 में कांग्रेस से राजनीति शुरू की। देवरिया-कुशीनगर स्थानीय निकाय क्षेत्र से विधाान परिषद का चुनाव लड़े लेकिन हार गये। 2012 में कांग्रेस ने पथरदेवा विस क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया लेकिन ऐन वक्त पर टिकट कट गया। निर्दल चुनाव लड़े और हार गए। 2014 में बसपा से लोस चुनाव लड़े लेकिन हार गए। 

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