नए आचार्यों के प्रशिक्षण से निखरेगा शिक्षण कौशल : हेमचंद
गोरखपुर, निज संवाददाता। सकारात्मक इच्छा शक्ति के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने से ही उसका वास्तविक लाभ मिलता है। शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से अपने शिक्ष

गोरखपुर, निज संवाददाता। सकारात्मक इच्छा शक्ति के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने से ही उसका वास्तविक लाभ मिलता है। शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से अपने शिक्षण कार्य में निखार लाने के साथ-साथ शिक्षण कौशल को भी अधिक प्रभावी बना सकते हैं। यह बातें विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संगठन मंत्री हेमचंद ने सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सुभाषचंद्र बोस नगर में आयोजित 15 दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन समारोह में कहीं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति आधारित शिक्षा के प्रसार के उद्देश्य से वर्ष 1952 में गोरखपुर के पक्कीबाग में प्रथम शिशु मंदिर की स्थापना की गई थी।
आगे चलकर वर्ष 1977 में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कारों एवं सर्वांगीण विकास से युक्त विद्यार्थियों का निर्माण करना है।शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के प्रांतीय मंत्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने बताया कि नवचयनित आचार्यों को नई शिक्षा नीति-2020, पंचपदीय शिक्षण पद्धति तथा विद्या भारती के कार्यों से परिचित कराने के लिए प्रतिवर्ष प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किया जाता है। इस वर्ष प्रशिक्षण वर्ग में 10 जनपदों के पांच संकुलों के 58 विद्यालयों से करीब 70 आचार्य-आचार्याएं प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यक्रम में प्रांतीय सहमंत्री चंद्रशेखर पांडेय, प्रदेश निरीक्षक श्रीराम सिंह, डॉ. अश्वनी कुमार वर्मा, गोविंद सिंह, कन्हैया चौबे आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे। प्रधानाचार्य राजीव कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया।
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