
मां-बाप के वियोग में तीन साल के मासूम की मौत, ग्रामीणों ने लगाया जाम
Gorakhpur News - हृदय विदारक -पट्टीदारों से विवाद में जेल में हैं मां-बाप, नाना के पास रहता था
भटहट (गोरखपुर), हिन्दुस्तान संवाद। जेल में बंद माता-पिता के वियोग में तीन साल के एक मासूम की सोमवार को मौत हो गई। बच्चे की मौत के बाद माता-पिता को उसका अन्तिम दर्शन कराने के लिए नाना जेल पहुंचे, पर शव लेकर अंदर जाने की इजाजत नहीं मिली। इसे लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने गुलरिहा के खपड़हवा चौकी के पास सड़क पर जाम लगा दिया। पुलिस के समझाने-बुझाने पर करीब आधा घंटे बाद जाम समाप्त हुआ। जानकारी के अनुसार, पीपीगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले राहुल का करीब एक वर्ष पहले अपने पट्टीदारों से विवाद हुआ था। झगड़े में दोनों पक्षों को चोटें आई थीं।

बाद में राहुल और उसकी पत्नी वंदना के खिलाफ हत्या के प्रयास में मुकदमा दर्ज कर दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजवा दिया था। दंपति के दोनों बच्चे बेटी शैलजा (5 वर्ष) और पुत्र सूरज (3 वर्ष) गुलरिहा थाना क्षेत्र के डुमरी नंबर दो निवासी अपने नाना गिरधारी पटेल के पास रहने लगे। नाना ही मजदूरी कर बच्चों का पालन-पोषण कर रहे थे। बताया जाता है कि करीब एक माह पहले मासूम अपनी मां से जेल में मुलाकात कर लौटा था। परिजनों का कहना है कि इसके बाद से वह लगातार ‘मां-मां’ पुकारता रहता था और कभी-कभी मां की तलाश में घर से बाहर निकल जाता था। सोमवार को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मौत के बाद परिजन शव लेकर जेल पहुंचे, ताकि माता-पिता अंतिम दर्शन कर सकें, लेकिन मुलाकात की अनुमति नहीं मिली। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने डुमरी नंबर दो स्थित खपड़हवा चौकी के पास फोरलेन पर जाम लगा दिया। गुलरिहा पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया। चौकी प्रभारी अंजनी तिवारी ने बताया कि मृतक बच्चे के नाना की तहरीर मिली है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और जेल प्रशासन से माता-पिता को बच्चे का अंतिम दर्शन कराने का प्रयास किया जाएगा। जेल के अंदर नहीं ले जा सकते शव : अधीक्षक जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पाण्डेय ने बताया कि बच्चे का शव लेकर उसके नाना आए थे। जेल मैनुअल के मुताबिक शव अंदर नहीं जाने दिया जा सकता है, लिहाजा गेट के बाहर ही उन्हें रोक दिया गया है। हालांकि, बच्चे के नाना को मिलने की इजाजत दी गई थी। वह अपनी बेटी और दामाद से मिलकर अन्तिम संस्कार करने की बात कहकर बच्चे का शव लेकर यहां से चले गए। छह साल तक के बच्चे रह सकते हैं मां-बाप के पास जेल मैनुअल के अनुसार छह साल की उम्र तक के बच्चे अपनी मां के साथ जेल में रह सकते हैं, लेकिन उन्हीं बच्चों को रखा जाता है, जिनके कोई अभिभावक नहीं होते हैं। अगर अभिभावक हैं और उसके बाद भी बच्चे को मां के साथ रखना चाहते हैं तो इसके लिए अनुमति लेनी होती है। मां के साथ रहता मासूम तो नहीं होती मौत मासूम के बुजुर्ग नाना गिरधारी ने कहा कि दोनों बच्चों की उम्र छह साल से कम है। उन्हें मां के साथ जेल में रखने के लिए जेल प्रशासन को पत्र दिया गया था मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में उसके सामने मासूम बच्चों की परवरिश करने में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। यदि मासूम अपनी मां के साथ रहा होता तो शायद उसकी मौत नहीं होती।

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