Tightening screws on ARTO and employees of 16 districts - 16 जिलों के एआरटीओ और कर्मचारियों पर कसा शिकंजा DA Image
18 फरवरी, 2020|12:38|IST

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16 जिलों के एआरटीओ और कर्मचारियों पर कसा शिकंजा

16 जिलों के एआरटीओ और कर्मचारियों पर कसा शिकंजा

ओवरलोड गाड़ियों की एंट्री को लेकर महीने में होने वाली करोड़ों रुपये की वसूली का पैसा 16 जिलों के एआरटीओ और उनके कर्मचारियों तक जाता था। कुछ एआरटीओ सीधे पैसा लेते थे तो वहीं कुछ कर्मचारी माध्यम से पैसा लेते थे।

गैंग के पास से बरामद रजिस्टर और डायरी के आधार पर पुलिस ने इन जिले के एआरटीओ और कर्मचारियों तथा अन्य व्यक्तियों के नाम एफआईआर की फर्द में शामिल किया है। पुलिस की विवेचना के बाद इनका नाम मुकदमे में भी शामिल किया जाएगा।

एसटीएफ द्वारा गोरखपुर के बेलीपार थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक गैंग सरगना धर्मपाल उर्फ डीपी सिंह ओवरलोड गाड़ियों को पास कराने का एक संगठित गिरोह चलाता था। उसका नेटवर्क यूपी के 16 जिलों में था। इन जिलों के आरटीओ विभाग को महीने में धर्मपाल के जरिये मोटी रकम जाती थी। कुछ जिलों में यह रकम सीधे एआरटीओ तक जाती थी तो कुछ में कर्मचारियों और अन्य लोगों के माध्यम से पैसा भेजा जाता था।

हर महीने का बनता था रजिस्टर: धर्मपाल इस नेटवर्क को चलाने के लिए महीनेवार रजिस्टर भी मेंटेन करता था। प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग रजिस्टर बनता था और उसी में ट्रक नम्बर सहित काली कमाई का पूरा हिसाब लिखा जाता था। धर्मपाल के दो खास कर्मचारी श्रवण और दीपू इन नम्बरों को रजिस्टर में दर्ज करते थे। दर्ज नम्बरों को अधिकारियों और कर्मचारियों के मोबाइल पर व्हाट्सएप के जरिये भेज देते थे। जिन गाड़ियों के मालिक ने ओवरलोडिंग को लेकर एंट्री फीस जमा की होती है उन गाड़ियां को पूरे महीने कोई टच नहीं करता था। यही नहीं, बाहर की कोई टीम चेकिंग के लिए आती थी तो उसकी लोकेशन लीक कर भी उन गाड़ियों को जांच से बचाया जाता था।

जिलों के अलग-अलग रेट

जिलों की एंट्री फीस अलग-अलग तय थी। यह फीस विभाग तय करता था। जितनी फीस विभाग खुद के लिए तय करता था उसमें एक हजार अधिक जोड़कर धर्मपाल सिंह और उसकी टीम वसूलती थी। ओवरलोडिंग गाड़ियां जिन जिलों से होकर गुजरती थी उसका पैसा लिया जाता था। उदाहण के लिए अगर सोनभद्र से गिट्टी लेकर कोई ट्रक निकला और वह वाराणसी, गाजीपुर, मऊ गोरखपुर तक आया तो उसे इन सभी जिलों की एंट्री फीस देनी होती थी।

डायरी और रजिस्टर के हिसाब से फर्द में दर्ज नाम

गैंग के पास से बरामद डायरी और रजिस्टर में दर्ज नाम और एसटीएफ की पूछताछ में हुई जानकारी के हिसाब से एसटीएफ ने 16 जिलों के अधिकारियों और कर्मचारियों का नाम फर्द में दर्ज किया है।

जिलेवार शामिल अफसरों का ब्योरा

गोरखपुर

गोरखपुर के एआरटीओ एसपी श्रीवास्तव, पीटीओ इरशाद अली के पास पैसा उनका ड्राइवर संजय सिंह उर्फ मंटू सिंह, कर्मचारी अवधेश सिंह उर्फ बबलू, आरटीओ सिपाही निपेन्द्र सिंह, अनूप सिंह के जरिये जाता था। मंटू सिंह गोरखपुर के अलावा बस्ती और कुशीनगर में भी आरटीओ विभाग को पैसा पहुंचाता था।

देवरिया

देवरिया के एआरटीओ चतुर्वेदी के नाम पर दीवान शुक्ला के माध्यम से पैसा जाता था। एआरटीओ की भूमिका यहां कम संदिग्ध है। क्योंकि अभी यह साबित नहीं हुआ कि दीवान उन्हें पैसा देता था या खुद वसूली करता था। चेकिंग के दौरान दीवान लोकेशन शेयर करता था।

महराजगंज

महराजगंज के एआरटीओ आरएस भारती को सिपाही मान सिंह के माध्यम से पैसा जाता था। दोनों लोगों की भूमिका संदिग्ध है।

कुशीनगर

एआरटीओ संदीप कुमार पंकज के नाम पैसा जाता था। गोरखपुर का कर्मचारी मंटू सिंह पैसा पहुंचाता था। दोनों की भूमिका संदिग्ध है।

मऊ

मऊ एआरटीओ अवधेश प्रसाद और पीटीओ मानवेन्द्र सिंह के पास सिपाही चंद्रजीत और प्राइवेट चालक कमालू तथा सिपाही रमेश पटेल, चंद्रपाल यादव पैसा पहुंचाते थे। सभी की भूमिका संदिग्ध है।

आजमगढ़

एआरटीओ संतोष सिंह के पास सिपाही लल्लन गौड़ के माध्यम से पैसा जाता था। शुरुआती जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।

जौनपुर

जौनपुर में सिपाही अनिल पटेल, सिपाही पाठक, पंकज सिंह के माध्यम से पैसा जाता था। यही नाम रजिस्टर में दर्ज किए गए हैं।

अंबेडकरनगर

अंबेडरनगर एआरटीओ केएन सिंह का भांजा बबलू सिंह के माध्यम से पैसा वसूला जाता था। दोनों लोग संदिग्ध हैं

बस्ती में चालक वसूलता था पैसा

बस्ती में एआरटीओ के प्राइवेट चालक राजेश के माध्यम से यहां वसूली का पैसा जाता था। दोनों संदिग्ध हैं।

संतकबीरनगर

संतकबीरनगर में आरटीओ चालक अशोक द्विवेदी उर्फ दूबे जी के माध्यम से पैसा जाता था। यहां पीटीओ/एआरटीओ संदीप कुमार चौधरी को भी पैसा जाता था। सभी संदिग्ध हैं।

गाजीपुर

गाजीपुर में एआरटीओ राम सिंह यादव खुद ही पैसा लेते थे, कभी ड्राइवर दुर्गविजय के माध्यम से पैसा लेते थे। सभी संदिग्ध हैं।

सोनभद्र

आरटीओ सिपाही आशुतोष उर्फ सोनू सिंह वसूली करता था। डायरी में इसी का नाम दर्ज है।

इलाहाबाद

इलाहाबाद-सुल्तानपुर में सैफ और फैजल नाम के दो प्राइवेट लड़के वसूली करते थे। फैजल खान का नेटवर्क गोंडा और बहराइच तक सक्रिय है।

भदोही

भदोही में आरटीओ सिपाही योगेन्द्र सिंह का नाम डायरी में शामिल है। इसी के नाम से पैसा जाता था।

चंदौली

चंदौली में पिंटू यादव प्राइवेट व्यक्ति है यह आरटीओ सिपाही, विपिन चौधरी के आदेश पर वसूली करता था। मिर्जापुर चंदौली बाराणसी में काम बंद होने पर यह गाड़ियां पार कराने का ठेका लेता था।

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