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2 जून, 2020|9:44|IST

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इस उद्योग के हजारों कर्मचारियों का रोजगार खतरे में, जानिए लॉकडाउन ने कैसे बढ़ाया संकट 

गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा), इंडस्ट्रियल इस्टेट और इंडस्ट्रियल एरिया में कपड़े से जुड़ी इकाइयों का बुरा हाल है। कई तो बंद हैं जो चल रही हैं वह भी जल्द बंद हो सकती हैं। उद्यमियों का कहना है कि जब तैयार माल के लिए बाजार नहीं होगा तो फैक्ट्री संचालित करने का क्या मतलब है। उधर, चेम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज के पदाधिकारियों ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अपनी समस्या बताई है।

टेक्सटाइल के अंतर्गत गोरखपुर में तीन प्रॉसेसिंग हाउस, चार स्पिनिंग मिल, करीब पांच हजार पावरलूम आते हैं। यह सर्वाधिक रोजगार देने वाला सेक्टर भी है। स्पिनिंग मिल में तो काम चल रहा है लेकिन तैयार हो रहे माल को डंप करना पड़ रहा है। उद्यमी इस बात से काफी परेशान हैं। उद्यमी निखिल का कहना है कि ‘बाजार नहीं खुले तो उत्पादन बंद करना पड़ सकता है।’ 

प्रॉसेस हाउस में से केवल एक का ही संचालन हो रहा है। टेक्सटाइल उद्योग को लेकर यह क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण रहा है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में आधा दर्जन से अधिक इकाइयों को बंद करना पड़ा है। उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों को धीरे-धीरे शुरू कराया जा रहा है। उद्योग विभाग की ओर से टेक्सटाइल से जुड़ी इकाइयों को भी शुरू कराने की कोशिश की गई लेकिन यह कोशिश रंग नहीं ला सकी। 

उद्यमियों ने इकाई चलाने की कोशिश की, मशीनों की टेस्टिंग भी हुई। बस इंतजार था बाजार खुलने का, जिससे तैयार होने वाला माल बिक सके। पूरे प्रकरण को लेकर चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। श्री अग्रवाल का कहना है कि रेडीमेड, कपड़ा और धागा बनाने की फैक्ट्रियों में करीब 3500 कर्मचारी और मजदूरों को रोजगार मिला हुआ है। प्रशासन कपड़े की दुकानों को खोलने को तैयार नहीं है। ऐसे में फैक्ट्री चालू रख तैयार माल को डंप करने का कोई मतलब नहीं है। पूरी समस्या को लेकर मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है।

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  • Web Title:thousands of workers of textile industry facing employment crisis during lockdown in geeda gorakhpur