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फोरलेन निर्माण में टूटी नाली से हजार परिवारों की जिंदगी नारकीय

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मेडिकल से भटहट रोड पर फोरलेन निर्माण के चलते टूटे नाले के चलते नाहरपुर और परसिया गांव के करीब हजार परिवारों की जिंदगी नारकीय बन गई है। करीब एक साल से पानी निकासी नहीं होने से लोगों को बदबूदार पानी के बीच जिंदगी गुजारनी पड़ रही है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारी नाला निर्माण को लेकर सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। स्थानीय विधायक और ग्राम प्रधान भी राहत देने में सक्षम नहीं दिख रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज संवाद के मुताबिक, गुलरिहा से लेकर भटहट तक की आबादी सिर्फ कहने को गांव में रहती है। लोग आशियाना बना कर रह रहे हैं। करीब आठ महीने पहले पीडब्ल्यूडी ने फोरलेन निर्माण को लेकर पहले से बने नाला को तोड़ दिया। ठेकेदार ने भरोसा दिया कि जल्द ही नाला निर्माण कर पानी निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करा दी जाएगी। धीरे-धीरे आठ महीने से अधिक गुजर चुके हैं, लेकिन नाला निर्माण नहीं हो सका है। नतीजतन गांव के घरों से निकलने वाला पानी सड़कों पर ही फैल रहा है। महीनों से पानी जमा होने से इससे बदबू उठ रही है। लोगों का घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दर्जन भर प्रतिष्ठित स्कूल दोनों गांव के बीच में हैं। जहां दूर-दराज से आने वाले बच्चों के साथ स्थानीय बच्चे भी पढ़ते हैं। नाले का पानी सड़क पर सड़ने से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। 
नाहरपुर गांव की प्रधान सीमा देवी के पति पटेश्वरी जायसवाल का कहना है कि अधिकारियों से समस्या को लेकर बताया जा रहा है लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है। वहीं परसिया गांव के प्रधान मनोज श्रीवास्तव का कहना है कि जबतक नाला निर्माण कर पानी निकासी सुनिश्चित नहीं की जाएगी तबतक दुश्वारियां कम नहीं होंगी। पीडब्ल्यूडी के सहायक अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि फोरलेन निर्माण के बाद नाला निर्माण होगा। जल्द निर्माण शुरू होगा। 

लोगों का दर्द-
नाले का निर्माण तुरंत नहीं हुआ तो इस एरिया के सभी स्कूल के बच्चों को यह बीमारियां हो सकती हैं। स्वच्छता अभियान सिर्फ नारा न बने इसे जिम्मेदारों को सुनिश्चित करना होगा। 
सोमनाथ गुप्ता, स्थानीय नागरिक

पानी से उठने वाली बदबू के चलते घर में बैठना मुश्किल हो गया है। मुंह पर रूमाल रख कर गुजरना पड़ रहा है। गांव की जिंदगी पशुओं से भी बदतर हो गई है। कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 
सुमन देवी, स्थानीय नागरिक

जिम्मेदार बच्चों के बीमार होने का इंतजार कर रहे हैं। दो वर्ष पहले इंसेफेलाइटिस से एक मासूम की मौत हो चुकी है। गंदगी को लेकर संक्रामक रोग फैलने का खतरा बना हुआ है। 
ज्ञानती देवी, स्थानीय नागरिक

स्थानीय विधायक से लेकर ग्राम प्रधान तक से गुहार की जा रही है। कहीं से कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। नाली का निर्माण नहीं हुआ तो बच्चों का स्कूल जाना भी मुश्किल हो जाएगा।
हरीश चन्द्र गुप्ता, शिक्षक 

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  • Web Title:Thousands of families are frustrated by a broken drain in forelane construction