Thousand rupee portable washing machine made in MMMUT - एमएमएमयूटी में बनी हजार रुपये की पोर्टेबल वॉशिंग मशीन DA Image
12 दिसंबर, 2019|9:01|IST

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एमएमएमयूटी में बनी हजार रुपये की पोर्टेबल वॉशिंग मशीन

एमएमएमयूटी में बनी हजार रुपये की पोर्टेबल वॉशिंग मशीन

1 / 2मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ प्रभाकर तिवारी ने अपने छात्र अवनीश गौतम सिंह के साथ मिलकर ऐसी पोर्टेबल वाशिंग मशीन बनायी है, जो बेहद...

एमएमएमयूटी में बनी हजार रुपये की पोर्टेबल वॉशिंग मशीन

2 / 2मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ प्रभाकर तिवारी ने अपने छात्र अवनीश गौतम सिंह के साथ मिलकर ऐसी पोर्टेबल वाशिंग मशीन बनायी है, जो बेहद...

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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ प्रभाकर तिवारी ने अपने छात्र अवनीश गौतम सिंह के साथ मिलकर ऐसी पोर्टेबल वाशिंग मशीन बनायी है, जो बेहद हल्की है और कीमत महज हजार रुपये के आस पास होगी। इस मशीन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे अपने साथ कहीं भी ले जाया जा सकता है। इसका सबसे ज्यादा लाभ अक्सर यात्रा करने वाले लोगों या घर से दूर हॉस्टल में रहने वाल छात्रों को होगा।

डॉ. तिवारी ने बताया कि पोर्टेबल वाशिंग मशीन बनाने का विचार तब आया जब उनके छात्र अवनीश ने महसूस किया कि हॉस्टल में कपड़े धुलाई की कोई संतोषजनक व्यवस्था नहीं है। अवनीश ने अपने शिक्षक डॉ. तिवारी से इस सम्बन्ध में बात की। दोनों ने तय किया कि एक ऐसी वाशिंग मशीन बनायी जाए जिसकी लागत कम हो, चलाना आसान हो और उसे कहीं भी ले जाया जा सके या रखा जा सके। कम ऊर्जा में चल सकती हो। इसके बाद अवनीश ने पोर्टेबल वाशिंग मशीन का प्रारंभिक मॉडल तैयार कर डॉ. तिवारी को दिखाया। डॉ. तिवारी ने इस प्रारंभिक डिजाईन में कुछ बदलाव कर इसे वर्तमान रूप दिया|

डॉ. तिवारी ने बताया कि इस पोर्टेबल मशीन को बनाने की लागत लगभग एक हज़ार रुपये तक आएगी। आकार में छोटी और हलकी होने के कारण इसे एक छोटे बैग में रखकर आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। खास तौर से महानगरों में छोटे घरों में रहने वाले लोगों के लिए यह मशीन बहुत उपयोगी होगी। इस वाशिंग मशीन में एक मोटर लगा है जो कपड़े धुलते समय पानी में गति पैदा करेगा। पानी में गति होने से डिटर्जेंट की उपस्थिति में ‘माइसेल्स (छोटे अणु) बनेंगे। इन ‘माइसेल्स के हाइड्रोफोबिक हिस्से गन्दगी, धूल, मैल आदि से चिपक जाएंगे जबकि हाइड्रोफिलिक हिस्से पानी के अणुओं से संयुक्त हो जाएंगे। इस प्रकार धुलकर खंगालने पर कपड़े पूरी तरह साफ़ हो जाएंगे।

पेटेंट की अंतिम प्रक्रिया में है निर्माण की तकनीक

डॉ. तिवारी और अवनीश ने इस मशीन के पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया है। भारतीय पेटेंट कार्यालय ने उनके आवेदन में किये गए दावों की जांच परख के बाद उसे पेटेंट जर्नल में प्रकाशित कर आपत्तियां मांगी गई है। यदि डॉ. तिवारी के आवेदन पर पेटेंट कानून के अनुसार कोई वैध आपत्ति नहीं प्राप्त होती है तो उनके आवेदन को स्वीकार कर पेटेंट देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। डॉ. तिवारी और अवनीश की योजना है कि पेटेंट मिलने के बाद, इस मशीन को और उन्नत बनाने पर जोर दिया जाएगा और किसी वाणिज्यिक प्रतिष्ठान से संपर्क कर इस मॉडल को बाज़ार में उतारा जाएगा।

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