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3 जून, 2020|8:19|IST

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लॉकडाउन में बदली-बदली होगी ईद, नहीं सजेंगे चांद रात के बाजार

                         darul uloom fatwa

शायद पहली बार ईद कुछ अलग अंदाज में मनेगी। कोरोना संक्रमण के डर के साये में रवायतों से लेकर खुशी के इजहार के तौर-तरीके तक इस बार बदले-बदले से होंगे। हर साल ईद के मौके पर परवान चढ़ने वाले कई रिवाज इस बार के त्योहार का हिस्सा नहीं होंगे। खुशियां तो होंगी लेकिन गले मिलकर उन्हें बांट नहीं सकेंगे। चांद रात भी होगी, लेकिन बाजारों में रौनक नहीं। ईदगाह तो अपनी जगह होंगे, लेकिन वहां ईद की नमाज नहीं। न मेला लगेगा, न नए कपड़े होंगे, न ही ईद मिलन की रस्म होगी। गलियां सूनी होंगी, उनमें सजावटी चांद सितारे नहीं दिखेंगे। इस बार की ईद कुछ ऐसी ही मनेगी।

ईदगाह और मस्जिदों में नहीं जुटेगी भीड़
खासतौर से ईद की नमाज ईदगाह में अदा की जाती है। वहां बड़ी तादाद में एक साथ लोग नमाज अदा करने पहुंचते हैं। इसके अलावा मस्जिदों में भी ईद की नमाज होती है। लेकिन कोरोना संक्रमण फैलने के डर से पहले से ही मस्जिदों में सामूहिक नमाज पर रोक है। ऐसे में इस बार ईद की नमाज में ईदगाह और मस्जिद भीड़ नहीं जुटेगी।  जामा मस्जिद उर्दू बाजार के इमाम मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी ने कहा कि मस्जिद और ईदगाहों में पांच-पांच लोग नमाज अदा करेंगे और सभी लोग लॉक डाउन के निर्देशों का पालन करते हुए घर पर भी ईद की नमाज़ अदा की जा सकते हैं।

चांद रात की रौनक नहीं दिखेगी बाजार में 
चांद रात पर शाहमारूफ, रेती, घंटाघर का ईद बाजार पूरी रात गुलजार रहता है। सेवईं, नए कपड़े, सजावटी सामान लेने के लिए लोगों को हुजूम उमड़ता है। मुख्य सड़क पर पैर रखने तक की जगह नहीं होती है। पुलिस को बैरिकेडिंग कर पूरी सड़क को बंद करना पड़ता है, ताकि  लोग भीड़ में कोई गाड़ी न घुसे और लोग पैदल चलकर खरीदारी कर सके। मदीना मस्जिद रोड, शाहमाफरूफ, तुर्कमानपुर, रेती, गोरखनाथ, शाहमारुफ, घंटाघर में सुबह 4 बजे तक खरीदारी होती रहती थी। लेकिन लॉक डाउन की वजह से दुकानों पर ताला जड़ा है।

ईद पर नहीं मिल सकेंगे अपनों से 
कोरोना ने बहुत कुछ बदल दिया है। रमजान बिल्कुल अलग अंदाज में बीता और अब ईद पर कई लोग अपने गांव-घर भी नहीं जा पा रहे हैं। घर नहीं जा पाने को लेकर सबकी वजहें भी अलग-अलग हैं। कुछ को टिकट नहीं मिल पा रहा है  तो कुछ को ये डर सता रहा है कि कहीं हमारे जरिए वायरस हमारे घर तक न पहुंच जाए तो कुछ इस डर से नहीं जा रहे कि कहीं ऐसा न हो कि अपने शहर पहुंचें और वहां किसी वजह से कोरंटाइन  न होना पड़ जाए। पुणे की निजी कम्पनी में कार्यरत जाकिर खान कहते हैं कि पहली बार मां-बाप से दूर ईद मनानी पड़ रही है क्योंकि लॉकडाउन की वजह से गोरखपुर नहीं जा पा रहा हूं। ईद के दिन न मस्जिद में नमाज के लिए जा सकेंगे और न ही किसी रिश्तेदार के घर जा सकते हैं।

बच्चों को नहीं मिल पाएगी ईदी 
लॉकडाउन की वजह से लोग ईद पर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर नहीं जा पाएंगे। रहमत नगर में रहने वाली गौसिया सुम्बुल कहती हैं कि ईद इस बार फीकी रहेगी। बच्चे पूछ रहे हैं कि इस बार ईद पर तो रिश्तेदार नहीं आएंगे, तो उन्हें ईदी नहीं मिलेगी। गौसिया कहती हैं कि इस बार ईद को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं है।

पहली बार ईद पर ईदगाह और मस्जिदों पर नमाज तो होगी लेकिन आम आदमी नमाज में लॉकडाउन के नियमों के पालन की वजह से शामिल नहीं हो सकेगा। मेरी याददाश्त में आज तक ऐसा नहीं हुआ है। देश में कोरोना वायरस बढ़ता जा रहा है और यह जरूरी है कि ईद के समय मे एहतियात बरती जाए। लॉकडाउन का पालन करें और अपने घरों में ही ईद की नमाज अदा करें
(मौलाना अब्दुल जलील मजाहिरी, इमाम,जामा मस्जिद उर्दू बाजार)

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  • Web Title:this year eid will be celebrated differently due to lockdown no chand bazar this year in gorakhpur