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जनरल यात्रियों का चालान कर बढ़ा रहे आरक्षित कोच के यात्रियों का दर्द

- जनरल टिकट यात्री पेनाल्टी बनते ही आरक्षित कोच में हो जाते हैं सवार -

जनरल यात्रियों का चालान कर बढ़ा रहे आरक्षित कोच के यात्रियों का दर्द
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरWed, 22 May 2024 02:30 AM
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गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता
आरक्षित कोच के यात्रियों को खुद रेलवे का ही सिस्टम उन्हें सांसत में डाल रहा है। पहले ही पूरी तरह से पैक आरक्षित बोगियों में जनरल बोगी के यात्री भी पेनाल्टी बनवाकर सवार हो जा रहे हैं। इससे न तो घुसने वाले यात्रियों को जगह मिल रही है और न ही पहले से अपनी सीट पर बैठे यात्री सुकून से यात्रा कर पा रहे हैं। आलम तो यह है कि बाहरी यात्रियों के आ जाने से टीटीई तक कोच में टिकट की जांच करने भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। टीटीई के कोच में न पहुंचने से आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है।

दरअसल टार्गेट के चक्कर में प्लेटफार्म पर ड्यूटी करने वाले टीसी जनरल टिकट यात्रियों के साथ ही बेटिकट यात्रियों से पेनाल्टी लेकर टिकट बना दे रहे हैं। इसे लेकर यात्री आरक्षित कोच में चढ़ जा रहे हैं। पहले से ही अपनी सीट पर बैठे यात्रियों की सीटों पर बैठ जा रहे हैं। किसी के विरोध करने पर तू-तू, मैं-मैं जैसी नौबत आ जा रही है। ऐसी ही नौबत तीन दिन पहले लोहित एक्सप्रेस में आ गई थी। आरक्षित सीट पर दूसरे यात्री सवार हो गए थे। इसके चलते हाथापाई तक की नौबत आ गई थी।

रेलवे नियमानुसार आरक्षित कोच में जितनी सीटें उतने यात्री ही यात्रा कर सकते हैं। लेकिन यहां इस मानक का ख्याल नहीं है। टीसी अपना रोज का टार्गेट पूरा करने में जुटा है। टार्गेट पूरा हो जाए बस, यात्री कहां बैठे इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। आंकड़ों की बात करें तो बीते एक महीने में ट्रेन के बाहर रोजाना औसतन 500 से 550 पेनाल्टी बनाए जा रहे हैं7 जबकि ट्रेन के अंदर टीटीई यात्री तक पहुंच नहीं पा रहा है। अमूमन चार से पांच टिकट ही ट्रेन में बन रहे हैं।

टीटीई संघ के टीएन पाण्डेय का कहना है कि कोच में अत्यधिक भीड़ हो जाने के कारण कई बार बोगियों में घुसना मुश्किल हो जाता है। कई बार बाहर ही पेनाल्टी बना दिया जाता है जिससे जनरल टिकट के यात्री भी स्लीपर कोच में चढ़ जाते हैं।

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टूटे रहे नियम, देखते भी नहीं आते टीटीई

रेलवे के नियम के मुताबिक, आरक्षित कोच में वेटिंग टिकट पर सफर नहीं कर सकते। इसके बावजूद ट्रेनों में वेटिंग वाले यात्रियों की भीड़ दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन ऐसे मामलों में टीटीई सख्ती से बच रहे हैं। टीटीई पहले जनरल कोच में जाने से बचते थे। अब भीड़ के कारण स्लीपर कोच में भी नहीं जा रहे। रेलवे को रोजाना ऐसी ढेरों शिकायतें मिल रही हैं।

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भीड़ ऐसी कि कोच में चढ़ते वक्त छूट गया पसीना

बढ़नी से बोरिवली जा रहे फरहान मनिहर की सीट एस-1 स्लीपर कोच में थी। उनके साथ चार और यात्री थे। फरहान ने बताया कि वेटिंग के यात्रियों की इतनी भीड़ थी कि पांचों बड़ी मुश्किल से कोच में चढ़ पाए। ट्रेन बढ़नी से तुलसीपुर तक पहुंच गई, तब जाकर सीट तक पहुंच पाए। लखनऊ तक टीटीई चेक करने तक नहीं आए।

यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।