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25 फरवरी, 2020|2:04|IST

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10 सिपाहियों की शासन ने तैयार की थी सूची

10 सिपाहियों की शासन ने तैयार की थी सूची

सीएम सिटी में बड़े पैमाने पर ओवरलोडिंग के रैकेट की जानकारी होने हरकत में आए परिवहन विभाग की सिफारिश पर शासन ने जांच का जिम्मा एसटीएफ को सौंपा था। बेलीपार के मेहरौली में मधुबन होटल चलाने वाले धर्मपाल सिंह तथा उसी होटल के सामने सिब्बू सिंह नाम से ढाबा चलाने वाले मनीष उर्फ सिब्बू सिंह का नाम एसटीएफ को दिया गया था। शासन ने इनके संगठित गिरोह को चलाने वाले आरटीओ के सिपाहियों और कर्मचारियों की एक सूची भी मुहैया कराई थी।

पूरी जानकारी के बाद पूरे गिरोह को पकड़ने और खुलासा करने के लिए एसटीएफ की टीम स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटा रही थी। टीम ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि इस खेल में आरटीओ और एआरटीओ तथा उनके अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं। सूची में परिवहन विभाग आजमगढ़ के सिपाही ऋषिकेश मालवीय, भदोही के सिपाही योगेन्द्र सिंह, आनंद सिंह, चंदौली के सिपाही दुर्गा श्रीवास्तव, मऊ जिले के सिपाही चंद्र प्रकाश यादव, मिर्जापुर के सिपाही केके तिवारी और अनिल यादव, सीवी सिंह, सोनभद्र के सिपाही मनोज सिंह, वाराणसी के सिपाही नृपेन्द्र सिंह तथा इसके अलावा परिवहन विभाग प्रयागराज में तैनात सिपाही पंकज सिंह और अरुण सिंह को भी गिरोह का सदस्य बताया गया। अन्य व्यक्तियों में वाराणसी मेहरौली के देवेन्द्र, गाजीपुर के दुर्गविजय यादव के नाम भी बताए गए थे ।

सिपाही ने धर्मपाल को किया था आगाह

यह गिरोह इस कदर संगठित तरीके से चलता था कि जब एसटीएफ इसमें लगी तभी परिवहन विभाग के एक सिपाही ने गोपनीय पत्र के बारे में जानकारी कर धर्मपाल को आगाह कर दिया था। बताया था कि वह मोबाइल पर लेन-देन की बात न किया करें। उसके पीछे एसटीएफ लगी है। उसका मोबाइल सर्विलांस पर रखा गया है। लेकिन धर्मपाल ने उस सिपाही की बात अनसुनी कर दी थी ।

तीन साल से अलग धंधा कर रहा था मनीष

मनीष सिंह उर्फ सिब्बू सिंह पहले धर्मपाल सिंह के साथ काम करता था पर पिछले तीन साल से वह धर्मपाल से अलग अपना नेटवर्क चलाता है। धर्मपाल के होटल मधुबन के सामने ही मनीष उर्फ सिब्बू सिंह का सिब्बू सिंह का ढाबा है। शैलेष मल्ल, सिब्बू सिंह के ढाबा पर मैनेजर के रूप में रहता है। विवेक सिंह भी सिब्बू सिंह के साथ जुड़ा था और दोनों कमाई की रकम आधा-आधा बांटते थे। वहीं धर्मपाल सिंह का काम श्रवण गौड और रामसजन देखते थे। इनके पास पूरा हिसाब-किताब रहता था। श्रवण के हिसाब-किताब के आधार पर धर्मपाल के पास से पैसा लेकर रामसजन संबंधित लोगों के पास पैसा पहुंचा था। धर्मपाल के यहां काम करने वाले दो अन्य कर्मचारी फरार बताए जा रहे हैं उनकी टीम तलाश कर रही है। फरार कर्मचारियों में शामिल दीपू एक अन्य कर्मचारी जय भारत के साथ रात में वसूली का काम देखता था। एक महीने पहले जय भारत नौकरी छोड़कर असोम गया है। जबकि दीपू फ़रार है।

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  • Web Title: The government had prepared a list of 10 soldiers