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25 फरवरी, 2021|9:54|IST

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कमलेश पर रेल अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था केस

कमलेश पर रेल अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था केस

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

भाजपा सांसद कमलेश पासवान तब समाजवादी पार्टी से मानीराम विधानसभा से विधायक थे। पार्टी की तरफ से चल रहे आंदोलन में उन्होंने अपने इलाके में नकहा रेलवे स्टेशन से आगे ट्रेन रोकी थी। करीब ढाई घंटे तक रोकी गई ट्रेन से मानीराम रूट पर ट्रेन के संचालन में काफी असर पड़ा था। कई गाड़ियों को निरस्त करना पड़ा था। 2004 में परिवाद के रूप में दर्ज इस केस में 17 साल बाद फैसला आया है।

बात 18 दिसंबर 2004 की है। तत्कालीन सपा विधायक कमलेश पासवान और नकहा के सभासद रहे राजेश कुमार यादव 50-60 की संख्या में लोगों को लेकर नकहा रेलवे स्टेशन से आगे किलोमीटर संख्या 04/01 पर पहुंच गए और ट्रेन संख्या 222 डाउन नकहा जंगल स्टेशन से 9.33 बजे के बाद जैसे ही रवाना हुई उसे रोक दिया। कमलेश के समर्थक पटरियों पर लेट गए। सुबह 9.33 बजे से दोपहर 11.55 बजे तक ट्रेन रोकी गई थी। इससे इस रूट की कई ट्रेनों को स्थगित करना पड़ा था। इस मामले में ट्रेन चालक और गार्ड ने संयुक्त रूप से आरपीएफ को तहरीर दी थी। आरपीएफ ने नकहा जंगल पोस्ट पर 174 रेल अधिनियम के तहत कम्पलेन केस दर्ज किया था।

एसीजीएम रेलवे गोरखपुर कोर्ट में इसकी सुनवाई शुरू हुई। एसीजीएम रेलवे कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रथमदृष्टया पत्रावली में साक्ष्य पाते हुए 14 सितम्बर 2011 को आरोप पर सुनवाई के लिए तैयार हुआ। कोर्ट की तरफ से अभियुक्तों को आरोप पढ़कर सुनाया और समझाया गया लेकिन अभियुक्तों ने दोषी होना स्वीकार नहीं किया और परीक्षण की मांग की।

आठ लोगों के बयान के आधार पर फैसला

उधर, पिछले साल सांसद, विधायक के केस में जल्द से जल्द सुनवाई के लिए एमपी एमएलए कोर्ट बनाया गया। बीते 11 दिसम्बर 2020 को यह केस उसी कोर्ट में आया जिसमें आठ लोगों के बयान तथा दस्तावेज पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर कोर्ट ने यह फैसला दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता शैलेश त्रिपाठी ने बताया कि एमपी एमएलए कोर्ट का यह पहला फैसला आया है।

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  • Web Title:The case was filed on Kamlesh under the Railway Act