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28 फरवरी, 2021|8:22|IST

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Independence Day Special: लेफ्टिनेंट बनकर सुष्मिता ने सम्भाली शहीद पति की विरासत 

बेटियां परिवार और सरहद की रक्षक भी हैं। गोरखपुर की सुष्मिता पांडेय से मिलिए। उन्होंने पति की शहादत के बाद हिम्मत नहीं हारी। चार साल के बेटे की देखभाल के साथ कड़ी मेहनत की और पहले ही प्रयास में एसएसबी पास कर लेफ्टिनेंट बन गईं। उनके पिता रिटायर अपर मुख्य अधिकारी श्याम मनोहर त्रिपाठी और मां उर्मिला ने पासिंग आउट परेड के बाद जब उनके सीने पर स्टार लगाए तो उनकी आंखें खुशी से छलक उठी थीं। 
चार साल का बेटा था जब शहीद हुए पति 
गोरखपुर के झुड़िया तिवारी गांव के निवासी श्याम मनोहर की बेटी सुष्मिता की शादी 2010 में मेजर नीरज से हुई थी। 16 मार्च 2016 को एक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नीरज शहीद हो गए। तब सुष्मिता की गोद में चार साल का बेटा रुद्रांश था। 

माता पिता ने भी की थी अथक मेहनत 
माता-पिता ने उनका पूरा साथ दिया। बेटे रुद्रांश की परवरिश की जिम्मेदारी माता-पिता ने सम्भाली और सुष्मिता तैयारियों में जुट गई। पहले ही प्रयास में उन्होंने एसएसबी की एक हफ्ते तक चलने वाली कठिन परीक्षा पास कर ली। उनका लेफ्टिनेंट के पद पर चयन हो गया। 

पति की शहादत के बाद अचानक सब कुछ बिखर गया था। पति के दोस्तों और माता-पिता ने हौसला बढ़ाया तो एसएसबी की तैयारी की। सेना में पति के समकक्ष पहुंचने का सपना पूरा हुआ। 
सुष्मिता पांडेय, लेफ्टिनेंट  

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  • Web Title:Sushmita Panday of Gorakhpur kushinagar become army office after her husband martyr