
सभी निजी-सरकारी परिसर निराश्रित श्वानों से सुरक्षित होंगे, शासनादेश जारी
Gorakhpur News - सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में शासन ने आवारा कुत्तों की रोकथाम के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। सभी शहरी निकायों में स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा, निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था अनिवार्य की गई है। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाएगा।
गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट के सुओ मोटो रिट पिटीशन (सिविल) ‘सिटी हाउण्ड बाई स्ट्रे, किड्स पे प्राइस बनाम अन्य’ के पारित आदेशों के अनुपालन के लिए शासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 3 दिसंबर को हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद जारी शासनादेश के तहत प्रदेश के सभी शहरी निकायों में स्थित स्कूलों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों में आवारा कुत्तों की रोकथाम के लिए व्यापक सुरक्षा, निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। गोरखपुर समेत प्रदेश के सभी शहरी निकायों के अंतर्गत आने वाले सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, धार्मिक परिसर, बस स्टैंड/डिपो और रेलवे स्टेशनों की पहचान कर वहां आवारा कुत्तों के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।

शासनादेश के मुताबिक इन परिसरों में मजबूत बाड़, चाहरदीवारी और सुरक्षित गेट की व्यवस्था होगी। साथ ही, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती अनिवार्य की गई है, ताकि एक बार परिसर से हटाए जाने के बाद श्वान दोबारा प्रवेश न कर सकें। परिसरों की स्वच्छता और बेघर श्वानों की रोकथाम के लिए प्रत्येक संस्था में नोडल अधिकारी नामित होगा। नोडल अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर परिसर के प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित होगा। सरकारी विभागों, संस्थाओं और निजी इकाइयों को अपने-अपने क्षेत्र में नियुक्त नोडल अधिकारियों की जानकारी साइनेज बोर्ड पर स्पष्ट रूप से अंकित करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जारी इस शासनादेश में यह भी कहा गया है कि किसी भी संस्थान या सार्वजनिक प्रतिष्ठान के आसपास कुत्तों का स्थायी आवास नहीं बनने दिया जाएगा। इसके लिए संबंधित निकायों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य निरीक्षण करना होगा। चिन्हित परिसरों के भीतर पाए जाने वाले कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद उन्हें निर्धारित श्वान शेल्टर में स्थानांतरित करना होगा। शेल्टर संचालन में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का कड़ाई से पालन अनिवार्य रहेगा। इसके साथ ही श्वान शेल्टरों के निर्माण और संचालन के लिए कार्ययोजना मांगी गई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया गया है कि सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन का अनिवार्य स्टॉक हर समय उपलब्ध रहे। वहीं शिक्षा विभाग को छात्रों और कर्मचारियों को सुरक्षात्मक एवं निवारक व्यवहार का प्रशिक्षण देने का दायित्व सौंपा गया है। खेल विभाग और युवा कल्याण विभाग को स्टेडियम और खेल मैदानों में ऐसे ग्राउंड कीपिंग कर्मियों की तैनाती करने को कहा गया है जो आवारा श्वानों के प्रवेश और व्यवहार से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त हों। इसके अलावा नगर निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के साथ नियमित निरीक्षण एवं रिपोर्टिंग की स्थायी व्यवस्था बनाने के लिए राज्य पशु जन्म नियंत्रण अनुश्रवण समिति को विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा उच्च स्तरीय बैठक में होगी। सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी बिंदुओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

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