DA Image
25 जनवरी, 2021|5:31|IST

अगली स्टोरी

हत्या के 21 महीने बाद एक ही परिवार के छह गिरफ्तार

हत्या के 21 महीने बाद एक ही परिवार के छह गिरफ्तार

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

सहजनवा क्षेत्र के चड़राव गांव में वर्ष 2018 में होली की रात घर में घुसकर मंजीत नामक युवक की गला दबाकर की गई हत्या के मामले में करीब 21 महीने बाद क्राइम ब्रांच ने खुलासा करते हुए एक ही परिवार के छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में पति-पत्नी, दो बेटे और तीन सगे भाई शामिल हैं। क्राइम ब्रांच ने विवेचना में सात लोगों को आरोपित बनाया है जिनमें एक के नाम का खुलासा नहीं किया गया है। इस खुलासे के साथ ही क्राइम ब्रांच ने गांव के ही शुक्ला परिवार को क्लीनचिट दे दी है। मंजीत के परिवारवालों ने शुक्ला परिवार पर ही हत्या की आशंका जताई थी।

एसपी क्राइम अशोक वर्मा ने खुलासे की जानकारी देते हुए बताया कि तीन मार्च 2018 को चड़राव गांव निवासी बालगोविन्द सिंह के छोटे बेटे 25 वर्षीय मंजीत का शव उसी के घर के बरामदे में मिला था। मंजीत का बड़ा भाई अजीत घटना वाली सुबह करीब 7.30 बजे ड्रिल मशीन लेने शहर से घर पहुंचा तो उसे बाहर से दरवाजा बंद मिला। पहले उसने अगल- बगल के लोगों से भाई के बारे में पूछा लेकिन कुछ पता न चलने पर कुंडी खोलकर घर में दाखिल हुआ। उसका भाई बरामदे में चारपाई पर मृत पड़ा था। चीख सुनकर अगल-बगल के लोग पहुंच गए। अजीत ने सौ नम्बर पर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची सहजनवा पुलिस ने मंजीत का शव कब्जे में ले लिया। अजीत ने गांव के राधेश्याम शुक्ल के परिवार पर भाई की हत्या की आशंका जताते हुए तहरीर दी थी।

मंजीत की जेब से मिला था प्रेमपत्र

पुलिस की जांच में मंजीत की जेब से पुलिस को एक प्रेम पत्र मिला था। इसके अलावा चारपाई के पास से मोबाइल का खाली डिब्बा मिला था जिसमें तीन पैकेट कंडोम भी था। एक सीसी परफ्यूम भी मिला था। प्रेमपत्र के आधार पर पुलिस ने तत्काल दो लोगों को हिरासत में लिया था। सहजनवां पुलिस तब खुलासा नहीं कर सकी थी। बाद में केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया था। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर दिलीप कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम ने छह आरोपितों को गिरफ्तार किया।

दरवाजे पर पहुंचकर दी थी गाली

मंजीत के चाचा दयाराम सिंह ने बताया था कि घटना वाली रात मंजीत अपने घर पर सोया था। रात करीब डेढ़ बजे गांव के रामसागर सिंह उनकी पत्नी संध्या और पुत्र परविंदर सहित अन्य लोग पहुंचे थे। मंजीत के दरवाजे के सामने खड़े होकर गाली दे रहे थे। इस बीच उनकी नींद खुली और वह बाहर आए तथा उन लोगों को समझा बुझाकर घर भेज दिया। सुबह मंजीत की हत्या की सूचना मिली। क्राइम ब्रांच ने इसी आधार पर विवेचना आगे बढ़ाते हुए साक्ष्य जुटाए और रामसागर, उनके भाई पवन सिंह, विनोद सिंह तथा रामसागर के बेटे परमेन्द्र सिंह, अखिलेश उर्फ पारले और रामसागर की पत्नी संध्या सिंह के अलावा एक अन्य को आरोपित बनाया। पुलिस ने छह आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

गांव के राधेश्याम के परिवार को क्लीनचिट

चड़राव में राधेश्याम शुक्ल और बालगोविन्द के बीच कई वर्षों से रंजिश चली आ रही है। इसी रंजिश में प्रेम प्रंपच का मामला भी सामने आया है। राधेश्याम शुक्ल के परिवार पर कई बार हमला भी हुआ। शुक्ल परिवार ने बालगोविन्द को नामजद किया था। 10 जुलाई 2016 को राधेश्याम के परिवार के अजय शुक्ल की चड़राव चौराहे पर बाइक सवारों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसमें शुक्ल परिवार की तरफ से बालगोविन्द और उनके दोनों पुत्र को आरोपी बनाया गया था। घटना के वक्त बालगोविन्द जेल में थे तो वहीं मजींत और अजीत जमानत पर बाहर आए थे।

दो महीने से गांव में रह रहा था मंजीत

अजीत और मंजीत दोनों भाई मुम्बई में रहकर प्राइवेट काम करते थे लेकिन हत्या के मुकदमे में नाम शामिल होने के बाद कोर्ट के चक्कर में अजीत मुम्बई छोड़कर गोरखपुर आ गया और यहीं पर प्राइवेट काम करने लगा। इस बीच दो महीने से मंजीत भी मुम्बई से गोरखपुर आ गया था और अपने भाई के साथ काम में हाथ बटांने लगा।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Six of the same family arrested 21 months after the murder