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अफसरों ने सीढ़ी से मौत के खम्भे पर चढ़ा दिया शशि मोहन को

बिजली निगम के अभियंताओं ने शुक्रवार की शाम हाईटेंशन लाइन का फाल्ट बनवाने में लापरवाही की इंतहा कर दी। 33 केवी लाइन का डिस्क बदलने के लिए अफसरों ने सीढ़ी ढोने वाले संविदा कर्मचारी शशि मोहन को हाईटेंशन खम्भें पर चढ़ा दिया। वह क्रास आर्म पर बैठकर जैसे ही डिस्क खोलने के लिए हाथ बढ़ाया। उसी वक्त बिजली आपूर्ति शुरू होने से वह धू-धू कर जलने लगा। एक मिनट बाद वह खम्भें से नीचे गिर गया। मौके पर दो एसडीओ व दो जेई के साथ ही आधा दर्जन संविदा कर्मचारी मौजूद रहें। कर्मचारियों का कहना है कि मौके पर संविदा लाइनमैन सुनील सिंह भी मौजूद था। बावजूद इसके अभियंताओं ने  लाइनमैन को  खम्भें पर नहीं चढ़ाया और उसके बदले अकुशल श्रमिक शशि मोहन शर्मा को चढ़ाकर हत्या करा दिया।

लापरवाही
-शुक्रवार की शाम हुई घटना में शशि मोहन शर्मा हाईटेंशन लाइन के खम्भें पर झुलस गया
-बिजली निगम के टाउनहाल उपकेन्द्र पर शशि मोहन सीढ़ी ढ़ोने का काम करता था
-अफसरों ने उसे हाईटेंशन लाइन का डिस्क बदलने को चढ़ा दिख खम्भें पर
-शडडाउन के बाद भी आई बिजली, वह खम्भें पर धू-धू कर जलने लगा

 नगरीय विद्युत वितरण मण्डल के एसई कार्यालय ने 33 केवी लाइन का फाल्ट बनानें के लिए खण्डवार अलग-अलग फर्मो को टेण्डर के जरिए जिम्मेदारी सौपी है। फर्म के कर्मचारी 33 केवी लाइन का तार टूटने, खम्भा क्षतिग्रस्त होने व इंसुलेटर पंचर होने पर उसे बनाकर बिजली आपूर्ति बहाल करेंगे। सूत्र बताते है कि अभियंताओं के निर्देश पर ठेकेदार के कर्मचारी भी मौके पर पहुंच गए थे। बावजूद इसके अभियंताओं ने अकुशल श्रमिक शशिमोहन को 33 केवी लाइन के खम्भें पर चढ़ा दिया। लापरवाही का आलम यह रहा कि दोनों उपकेन्द्रों की लाइन पर शडडाउन होने के बाद विश्वविद्यालय उपकेन्द्र की लाइन चालू हो गई। जबकि टाउनहाल उपकेन्द्र की लाइन शुक्रवार की शाम से ही शडडाउन में है। अबतक किसी ने शडडाउन वापस ही नहीं लिया।

परीक्षण खण्ड के अभियंता कर रहे लापरवाही की जांच
महानगरीय एसई ई. एके सिंह कहते है कि संविदा कर्मचारी शशिमोहन वर्मा की मौत लापरवाही की वजह से हुई। किसकी लापरवाही से हुई । इसकी जांच मीटर परीक्षण खण्ड के अभियंता कर रहे है। वे उपकेन्द्रों में लगे मीटर की एमआरआई रिपोर्ट निकाल कर परीक्षण कर बताएंगे कि किसकी लापरवाही से शटडाउन के बाद भी बिजली आपूर्ति हो गई। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ तत्काल एक्शन लिया जाएगा।

बिजली निगम ने 25 हजार की आर्थिक सहायता दी
वितरण खण्ड प्रथम के एक्सईएन ने मृतक संविदा श्रमिक और सहजनवां क्षेत्र के खुनीपुर गांव निवासी शशि मोहन वर्मा के परिजनों को शनिवार को 25 हजार रुपये का चेक आर्थिक सहायता के रुप में दिया। इसके साथ ही उन्होंने परिजनों से वारिस प्रमाण पत्र मांगा। ताकि पांच लाख रुपये की और सहायता दी जा सके। 

ठेकेदार ने नहीं दिया सुरक्षा उपकरण
बिजली निगम के संविदा ठेकेदार विद्युत कर्मचारी कल्याण समिति के जिम्मेदारों ने किसी भी संविदा कर्मचारी को सुरक्षा उपकरण नहीं उपलब्ध कराया है। जबिक सुरक्षा उपकरण मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी ठेकेदार की है। टाउनहाल व विवि उपकेन्द्र पर तैनात कर्मचारियों का कहना है कि हमलोगों ने ठेकेदार से कई बार सुरक्षा उपकरण मसलन ग्लब्स, अर्थचेन, टार्च और शूज मांगा तो ठेकेदार ने कहा कि काम करना है तो सुरक्षा उपकरण खरीद लो। अधिकारियों ने भी कभी सुरक्षा उपकरण देने के लिए ठेकेदार पर नकेल नहीं कसी।

संविदा कर्मचारियों ने चेतावनी दी
विद्युत संविदा मजदूर संगठन के नेताओं व संविदा कर्मचारियों ने शनिवार को मोहद़दीपुर में शोकसभा कर मृत संविदा कर्मचारी को श्रद्वाजलि दी। कर्मचारियों ने घटना पर आक्रोश जताया। कर्मचारी नेताओं ने संविदा कर्मचारी शशि मोहन वर्मा के परिजनों को पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता देने की मांग की। कर्मचारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि 24 घण्टे के भीतर परिजनों को आर्थिक सहायता नहीं मिली तो सभी कर्मचारी कार्यबहिष्कार करेंगे। विद्युत मजदूर पंचायत संगठन ने संविदा कर्मचारी की मौत पर आक्रोश जताते हुए कहा कि अभियंताओं व ठेकेदार की मिलीभगत के कारण शशि की मौत हो गई। संगठन के प्रदेश मंत्री संदीप श्रीवास्तव ने खण्ड के अभियंताओं के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्जकराने की मांग की।

मृत संविदा कर्मचारी शशि का शव लेकर कैण्ट थाना पहुंचे परिजन
टाउनहाल उपकेंद्र के संविदा श्रमिक शशि मोहन शर्मा का शव लेकर शनिवार शाम परिजन कैंट थाने पहुंच गए। उन्होंने गोलघर के एसडीओ अभिषेक सिंह और जेई के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की मांग शुरू की। परिजनों ने दोनों के खिलाफ तहरीर दे दी है। शुक्रवार रात विश्वविद्यालय  के पास खम्भें  पर तार छूते ही शशि जिंदा जल गया। । इससे पहले परिजनों को शव लेकर टाउनहाल उपकेंद्र आता देख अफसर और कर्मचारी कार्यालय छोड़कर भाग निकले।शुक्रवार  की शाम शशि मोहन शर्मा को हाइटेंशन लाइन का फाल्ट ठीक करने के लिए खम्भें  पर चढ़ाया गया था। उस समय एसडीओ और जेई मौके पर थे। शशि ने जैसे ही तार पकड़ा उसके शरीर में आग लग गई। जलते हुए वह नीचे गिरा। बाद में मेडिकल कॉलेज में उसे मृत घोषित कर दिया गया।परिजनों का आरोप है कि एसडीओ ने शटडाउन लिया ही नहीं था। इससे अनजान शशि खंभे पर चढ़ गए और जैसे ही तार से हाथ सटा वह जलने लगे।

संविदाकर्मियों ने नहीं किया काम
शशि मोहन शर्मा की मौत के बाद संविदाकर्मियों ने शनिवार को कोई काम नहीं किया। इससे फाल्ट ठीक करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। भालोटिया मार्केट समेत कई स्थानों पर छोटे फाल्ट भी घंटों ठीक किए जा सके। सरकारी लाइनमैनों की कमी के कारण संविदाकर्मियों के भरोसे बिजली निगम फाल्ट ठीक कराता है।

पत्नी को पांच लाख का चेक दिया
अधीक्षण अभियंता शहर एके सिंह ने बताया कि शशि मोहन शर्मा की पत्नी को 25 हजार रुपये नकद और पांच लाख रुपये की सहायता राशि का चेक दिया गया है। शशि की चार बेटियां और एक बेटा है। उधर  कुछ कर्मचारियों का कहना है कि जो सहायता राशि शशि के परिजनों को दी गई है वह संविदाकर्मियों का मानदेय काटकर दी गई है। अगले महीने के मानदेय में तकरीबन दो हजार रुपये कम मिलेंगे। हालांकि अफसरों ने कर्मचारियों के आरोप को निराधार बताया। 

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  • Web Title:Shashi Mohan has given up on the pillar of death from the stairs