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गोरखपुर विवि छात्रसंघ: बड़ों के हस्तक्षेप ने नहीं चलने दी राजनीति की नर्सरी

गोरखपुर विवि छात्रसंघ: बड़ों के हस्तक्षेप ने नहीं चलने दी राजनीति की नर्सरी

प्रतिष्ठित राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के हस्तक्षेप ने छात्रसंघ चुनाव रुपी राजनीति की नर्सरी नहीं चलने दी। पहले सपा, फिर बसपा और अंत में भाजपा ने जिस तरह से छात्रों के चुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ कर सीधे हस्तक्षेप शुरू कर दिया था, उसने विवि का माहौल हिंसक हो गया। शिक्षकों की प्रतिष्ठा धूमिल होते देख विवि प्रशासन को छात्रसंघ चुनाव स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा।

डीडीयू प्रशासन इस बार उच्च शिक्षा मंत्री के आदेश को दरकिनार कर चुनाव कराने का निर्णय लिया था। चुनाव घोषित करने से पहले कुलपति प्रो. वीके सिंह ने बताया था मुख्यमंत्री जी ने चुनाव कराने की अनुमति दी है। लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार चुनाव शुरू हुआ। एक बार चुनाव लड़ चुके नेताओं को चुनाव लड़ने से मना कर दिया गया। बीते सत्र के करीब 400 विद्यार्थी, जिनका सत्र लेट है, भी चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो गए। विवि ने तमाम नियम कड़ाई से पालन कराए मगर शहर से लेकर कैंपस तक में धन व बाहुबल का प्रदर्शन नहीं हो पाया।

खुद चुनाव अधिकारी धन व बाहुबल के प्रदर्शन से परेशान थे मगर समझाने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहे थे। अभाविप, सछास व एनएसयूआई ने प्रत्याशियों के पैनल घोषित कर दिए। प्रदेश के सभी राज्य विवि में केवल डीडीयू में ही छात्रसंघ चुनाव हो रहे थे, इसलिए इस पर राजनीतिक दलों की भी नजर गड़ गई। दो दिन पहले यह चुनाव तब प्रदेश के लिए सुर्खियां बन गया जब इंद्रेश यादव नामक अध्यक्ष प्रत्याशी के अपहरण की खबर आई। दिन भर चले घटनाक्रम के बाद शाम को इंद्रेश सामने आए और बताया कि वह सपा मुखिया अखिलेश यादव से मिलने गए थे। सपा मुखिया के कहने पर उन्होंने सछास उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। इसी बीच नीले झंडे के साथ चुनाव लड़ रहे एक और प्रत्याशी के पास भी बसपा के दो तीन बड़े नेताओं का फोन आया और उसे भी सछास उम्मीदवार का समर्थन करने को कहा गया।

मंगलवार को गोरखपुर आए भाजपा के प्रदेश महामंत्री ने भी अभाविप प्रत्याशियों के चुनाव को पार्टी की प्रतिष्ठा से जोड़ लिया। कहा कि अभाविप की हार यानि पार्टी की हार होगी। इसके बाद मंगलवार को भाजपा नेताओं ने भी रात से छात्रसंघ चुनाव की रणनीति तय करनी शुरू कर दी।

राजनीतिक दलों के सीधे हस्तक्षेप को देख कर विवि प्रशासन हैरान था। दलों के सीधे हस्तक्षेप के बाद तमाम बड़े लोग भी चुनाव प्रचार में कूद गए। आमने सामने आरोप प्रत्यारोप लगने लगे। आखिरी आशंका कि राजनीतिक दलों के सीधे हस्तक्षेप से बवाल हो सकता है, मंगलवार को पूरी हो गई। शिक्षकों के दुर्व्यवहार व खुलेआम मारपीट के बाद कानून व्यवस्था को चुनौती मिली। शिक्षकों व कर्मचारियों ने चुनाव कराने से इनकार किया, तब विवि प्रशासन को चुनाव स्थगित करने का निर्णय लेना पड़ा। इसी के साथ विवि कैंपस 13 सितंबर तक के लिए बंद कर दिया गया है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने मना किया था चुनाव कराने से

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने पहले ही सभी राज्य विवि को चुनाव कराने से मना किया था। डीडीयू के अधिकारी भी उस वीडियोकान्फ्रेंसिंग में मौजूद थे, जब उन्होंने कहा था कि इस बारे में राज्य सरकार तभी निर्णय लेगी, जब सभी कैंपस में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार चुनाव कराने लायक माहौल व व्यवस्था तैयार हो जाएगी।

पिछले साल छात्रसंघ चुनाव का एलान करने आए उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा विवि प्रशासन को नसीहत देकर चले गए थे कि विवि प्रशासन पहले अन्य जरूरी काम जैसे शिक्षकों की भर्ती, पढ़ाई व्यवस्था पटरी पर लाने आदि का काम करे, चुनाव इसके बाद की चीज है। डीडीयू ने शिक्षकों की भर्ती पूरी कर लेने के बाद इस बार चुनाव कराने का निर्णय लिया था।

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  • Web Title:Seniors interfierence stopped student union Election in DDU