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प्रचार-प्रसार से दूर इंसानों से लेकर जानवरों की करते हैं सेवा

प्रचार-प्रसार से दूर इंसानों से लेकर जानवरों की करते हैं सेवा

संक्षेप: Gorakhpur News - गोरखपुर में कई समाजसेवी बिना किसी प्रचार के जरूरतमंदों और निराश्रित जानवरों की मदद कर रहे हैं। नीलम जायसवाल ने पिछले एक दशक से स्ट्रीट डॉग की सेवा की है और अब 50 से अधिक डॉग की सर्जरी करा चुकी हैं। अन्य समाजसेवी भी गोपनीय तरीके से लोगों की मदद कर रहे हैं।

Thu, 13 Nov 2025 02:32 AMNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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गोरखपुर, अजय श्रीवास्तव अस्पताल में एक केला बांटते हुए दर्जन भर ‘समाजसेवी’ की तस्वीरें भले ही वायरल होती हों पर समाज में बड़ा तबका ऐसा भी जो दाएं हाथ से दान या परोपकार करता है तो बाएं हाथ को भी पता नहीं चलता है। दर्जनों ऐसे लोग हैं जो बिना प्रचार-प्रचार की इच्छा के इंसान ही नहीं जानवरों की मदद कर रहे हैं। कोई स्ट्रीट डॉग की सर्जरी करा रहा है तो कोई अस्पताल संचालकों की मदद से जरूरतमंदों की बिन बताए सर्जरी और डायलिसिस करा रहा है। वर्ष 2019 में निराश्रित गायों की मदद के लिए पशुपालन विभाग द्वारा गोकुल गोआश्रय समिति बनी थी।

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शुरुआती दौर में इस नवाचार से जुड़े पशुपालन विभाग में मंडलीय प्रयोगशाला के अधीक्षक डॉ. संजय श्रीवास्तव बताते हैं कि इसमें छह साल में 500 से अधिक लोग 90 लाख से अधिक दान कर चुके हैं। इनमें ज्यादातर अपनी पहचान उजागर भी नहीं करना चाहते हैं। राजेन्द्र नगर निवासी नीलम जायसवाल वैसे तो स्ट्रीट डॉग की सेवा में एक दशक से सक्रिय हैं, लेकिन पिछले 11 महीने से बालापार के जगरनाथपुर गांव में निराश्रितों के लिए आश्रय स्थल संचालित कर रही हैं। खुद किडनी ट्रांसप्लांट से गुजर चुकी नीलम बताती हैं कि पिछले 10 महीने में दुर्घटना में घायल 50 से अधिक स्ट्रीट डॉग की सर्जरी हो चुकी है। शहर के पशु कल्याण कार्यकर्ता शिवेंद्र यादव ने बिना सरकारी सहायता के 250 से अधिक निराश्रित कुत्तों और 200 से अधिक गाय-बछड़ों का उपचार कर चुके हैं। उनकी सेवा के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा श्री राम वनवासी छात्रावास वर्ष 1983 में शुरू हुआ था। इसमें पूर्वोत्तर राज्यों के 68 बच्चे रहते हैं। संस्था के उपाध्यक्ष ध्रुव दास मोदी का कहना है कि बिना सरकारी मदद से संचालित छात्रावास में लोग ईश्वरीय काम समझ कर मदद करते हैं। कोई जूता देता है तो कोई कापी-किताब। ज्यादातर लोग गोपनीय तरीके से ही मदद करते हैं। जरूरतमंदों की सर्जरी करा रहे तो पेट भी भर रहे डॉक्टरों की एक टीम पिछले आठ वर्षों से बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 400 से 500 तीमारदारों को सप्ताह में छह दिन भोजन करा रही है। इस टीम के अहम सदस्य हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.भारतेंदु जैन बताते हैं कि अब विष्णु मंदिर और हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर अस्पताल में भी जरूरतमंदों को आपसी सहयोग से भोजन मुहैया कराया जा रहा है। वहीं मारवाड़ी समाज के कुछ युवा गोपनीय तरीके से प्रमुख अस्पताल से संपर्क कर जरूरतमंदों की सर्जरी से लेकर डायलिसिस में मदद कर रहे हैं। एक सदस्य बताते हैं कि हर महीने सदस्य निश्चित रकम जमा करते हैं। चिकित्सकों के कहने पर ही मरीज को मदद की जाती है। पेंशन के रुपये से बांटते हैं कंबल समाजसेवी डॉ.एके श्रीवास्तव सरकार के एक सार्वजनिक उपक्रम के सेवानिवृत्त हैं। वे पेंशन से बचत का एक फंड बनाकर पिछले डेढ़ दशक से हर साल करीब 1000 कंबल मुसहरों, वनटांगिया से लेकर निराश्रितों से देते हैं। एई रेलवे गोरखपुर में कार्यरत एक टीटीई चेकिंग के दौरान यदि उन्हें लगता है कि कोई वाजिब वजह से बेटिकट यात्रा कर रहा है तो उसका जुर्माना खुद भर देते हैं। 15 साल के सेवाकाल में 40 हजार से अधिक का जुर्माना भर चुके हैं।