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इंसेफेलाइटिस के 235 मरीजों में से पांच में मिला स्क्रब टॉयफस

पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस के लिए स्क्रब टॉयफस जिम्मेदार नहीं है। बीआरडी मेडिकल कालेज में इस वर्ष अब तक भर्ती अधिकांश मरीजों में स्क्रब टॉयफस के लक्षण नहीं मिले हैं। एनआईवी की हालिया जारी रिपोर्ट में...

इंसेफेलाइटिस के 235 मरीजों में से पांच में मिला स्क्रब टॉयफस
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरWed, 18 Jul 2018 07:50 PM
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पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस के लिए स्क्रब टॉयफस जिम्मेदार नहीं है। बीआरडी मेडिकल कालेज में इस वर्ष अब तक भर्ती अधिकांश मरीजों में स्क्रब टॉयफस के लक्षण नहीं मिले हैं। एनआईवी की हालिया जारी रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। इसके बाद स्क्रब टॉयफस की थ्योरी को लेकर रिसर्च कर रहे शोधकर्ताओं के माथे पर बल आ गया है।

बीआरडी मेडिकल कालेज में इस साल जनवरी से अब तक इंसेफेलाइटिस से पीड़ित 245 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 80 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें से 235 मरीजों के खून और रीढ़ के पानी का नमूना जांच के लिए एनआईवी भेजा गया।

महज पांच मरीजों में मिला स्क्रब टॉयफस

हाल ही में एनआईवी ने रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एनआईवी की जांच में सिर्फ पांच मरीजों में ही स्क्रब टॉयफस की तस्दीक हुई। इनमें से गोरखपुर और देवरिया के दो-दो और कुशीनगर का एक मरीज शामिल है। एनआईवी की जांच में 230 मरीजों में स्क्रब टॉयफस नहीं मिला है।

पिछले साल 60 फीसदी मरीजों में मिला था स्क्रब टॉयफस

पिछले वर्ष इंसेफेलाइटिस के 60 फीसदी मरीजों में स्क्रब टॉयफस की तस्दीक हुई। इसके बाद तो आईसीएमआर और बीआरडी के डॉक्टरों ने इंसेफेलाइटिस के लिए स्क्रब टॉयफस को ही मुख्य कारण बता दिया। डॉक्टरों की रिपोर्ट के मद्देनजर शासन ने भी पूर्वांचल के सभी अस्पतालों में एएईएस के मरीजों को अनिवार्य रूप से एंटीबायोटिक डॉक्सीसायक्लीन या एजिथ्रोमाईसीन में से एक दवा देने का निर्देश दिया। इस साल अब तक जारी रिपोर्ट ने तो स्क्रब टॉयफस की थ्योरी की हवा निकाल दी है। हालांकि एनआईवी के विशेषज्ञों का मानना है कि अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है स्क्रब टॉयफस

यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है। यह बैक्टीरिया एक खास प्रकार के कीड़े के लार में होता है। यह कीड़ा बड़े घास के मैदान, चूहों या गिलहरियों के शरीर में रहता है। इसे चिल्लर भी कहते हैं। यह कीड़ा जब छोटे बच्चों को काटता है तो लार के जरिए बैक्टीरिया बच्चों के खून में मिल जाता है।

यह है लक्षण

इसमें बच्चों में बुखार तेज होता है। बुखार सात से 14 दिन तक रहता है। सिर व मांसपेशियों में दर्द होने के साथ शरीर पर दाने निकल जाते हैं। कुछ मामलों में मरीज को झटका भी आता है। बीमारी बढ़ने पर मरीज के शरीर में महत्वपूर्ण अंग के काम पर भी असर डालता है। इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।

पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस की मुख्य वजह स्क्रब टॉयफस नहीं है। इस थ्योरी को जनता और सरकार को भ्रमित करने के लिए पेश किया गया। स्क्रब टॉयफस का सटीक इलाज मौजूद है। इस थ्योरी को पेश करने वाले शोधकर्ताओं के दावे में दम रहता तो मौतों की संख्या में गिरावट होती।

डॉ. आरएन सिंह, चीफ कैंपेनर, इंसेफेलाइटिस उन्मूलन कार्यक्रम

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