रामगढ़झील: बाहर व्यवस्था चाक-चौबंद, झील के भीतर सुरक्षा कागजों में
गोरखपुर, प्रमुख संवाददाता। रामगढ़झील में शुक्रवार को सातवीं कक्षा की छात्रा की कूदने के
गोरखपुर, प्रमुख संवाददाता। रामगढ़झील में शुक्रवार को सातवीं कक्षा की छात्रा की कूदने के बाद मौत और शनिवार को मोहद्दीपुर निवासी रोहित साहनी का शव मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। हर दिन हजारों की संख्या में लोग यहां आते हैं। बाहर की सुरक्षा के लिए पुलिस चौकी है लेकिन आतंरिक सुरक्षा के इंतजाम सिर्फ कागजों में है।
झील में सुरक्षा इंतजाम
झील में कोई कूद जाए या फिर यहां संचालित होने वाली बोट से कोई झील में गिर जाए तो एसडीआरएफ या एनडीआरएफ कोई स्थाई तैनाती नहीं है। न ही प्रशिक्षित गोताखोर और जल पुलिस उपलब्ध है। कोई हेल्प डेस्क भी नहीं है जहां लोग मदद की गुहार लगा सके। तकरीब 1700 एकड़ में फैले रामगढ़झील में प्लेटफार्म नंबर एक, चार, पांच और छह से चलने वाली स्पीड मोटर बोटों पर चालक अक्सर स्टंट करते दिखते हैं।
स्टंट और खतरे
बोट चालकों का यह स्टंट बोट में सवार युवाओं को भी काफी पसंद आता है, जिससे लिए वे उनके आग्रह भी करते हैं। लेकिन कोई हादसा हुआ तो क्या होगा? इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा? क्या सिर्फ लाइफ जैकेट के भरोसे यह जोखिम उठाया जा सकता है। दो वर्ष पूर्व दो मोटर बोटों की टक्कर में एक ही परिवार के पांच से छह लोग घायल हो गए थे। इससे पहले मोटर बोट फ्लोटिंग रेस्त्रां के पिलर से भी टकरा चुकी है लेकिन सबक नहीं लिया।
सुरक्षा के लिए ये किए जाए इंतजाम
हेरिटेज फाउंडेशन के अनिल तिवारी कहते हैं कि लाइफ जैकेट सुरक्षा की गारंटी नहीं है। रामगढझील सरीखे बड़े जलाशय में प्रशिक्षित चालक, प्राथमिक उपचार किट, मौसम की लगातार निगरानी, आपातकालीन संचार तंत्र और तत्काल राहत-बचाव टीम की उपलब्धता जरूरी है। वे कहते हैं कि कोई गोताखोर मौके पर उपलब्ध होता तो शायद ईशु उर्फ आलिया की जान बच जाती।
झील में तैनात होगा प्रशिक्षित बल
गोरखपुर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल कहते हैं कि रामगढ़झील में प्रशिक्षित बल तैनात करने पर विचार चल रहा है। सुरक्षा मानकों का संख्ती से अनुपालन कराया जाएगा। कोई स्टंट करता पाया गया तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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