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इंजेक्शन लगवाने, खून चढ़वाने और ग्लूकोज चढ़वाने से नहीं टूटता है रोजा



इंजेक्शन लगवाने, खून चढ़वाने और ग्लूकोज चढ़वाने से नहीं टूटता है रोजा

बुधवार को रमज़ानुल मुबारक का नौवां रोजा अल्लाह की इबादत में बीता। माह-ए-रमज़ान का फैजान सभी पर बराबर बरस रहा है। दिन का तापमान व पंद्रह घंटे का रोजा रोजेदारों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। बंदे अल्लाह को राजी करने में जी जान से जुटे हुए हैं। दिन में रोजा रात में तरावीह की नमाज पढ़ी जा रही है। बाजार गुलजार है। हज्जिन बीबी जामा मस्जिद धर्मशाला बाजार में सामूहिक रोजा इफ्तार हुआ। सबने मिलकर रोजा खोला और दुआ मांगी। वहीं हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल में कारी शराफत हुसैन कादरी, मस्जिद हरमैन रायगंज में हाफिज सैयद अली, हज्जिन बीबी जामा मस्जिद धर्मशाला बाजार में हाफिज अमीरुद्दीन, दरोगा मस्जिद अफगानहाता में कारी हिदायतुल्लाह ने तरावीह की नमाज के दौरान एक कुरआन शरीफ मुकम्मल किया।

रोजे से जुड़े पूछे गये सवाल

नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद में माह-ए-रमज़ान का विशेष दर्स जारी है। जिसमें 18 साल के नौजवान से लेकर 60 साल के बुजुर्ग भी शामिल हो रहे है। नौजवानों की ज्यादा तादाद बता रही है कि उन्हें दीन की बातें सीखने की ललक है। दर्स दे रहे हैं मुफ्ती मो. अजहर शम्सी और मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही। जब दोपहर की जोहर नमाज खत्म होती है तो शुरु हो जाता है रमज़ान का दर्स। जो करीब 45 मिनट की होता है। जिसमें 30 मिनट कुरआन व हदीस से दीन की बारीकियां बतायी जाती है और 15 मिनट लोगों के सवाल का जवाब दलील के साथ दिया जाता है।

कुछ लोग सवाल लिखकर भी लाते हैं तो कुछ लोग वहीं पूछते हैं। पहले दिन से ही यहां दीन सीखने वालों की भीड़ जुट रही है। प्रतिदिन सौ के करीब लोग जुटते हैं। दर्स में आधुनिक समस्याओं पर भी सवाल जवाब होता है। दर्स में अब तक इंजेक्शन लगवाने, ग्लूकोज चढ़वाने, चेकअप के लिए खून निकलवाने से क्या रोजा टूट जाता है आदि सवाल आ चुके हैं। मुफ्ती अजहर ने बताया कि जरूरते शरई के बिना पर इंजेक्शन लगवाना, खून चढ़वाना, खून निकलवाना, ग्लूकोज चढ़वाना जायज है, इससे रोजा नहीं टूटेगा। इंजेक्शन चाहे नस में लगवाया जाए या गोश्त में। अगर किसी का एक्सीटेंड हो जाने से खून निकल जाए तब भी रोजा नहीं टूटता। चेकअप के लिए खून निकलवाया जा सकता है। हां इन्हेलर के इस्तेमाल से रोजा टूट जाता है।

सवाल पूछा गया कि जो लोग किसी बीमारी, मजबूरी या बुढ़ापे की वजह से रोजा नहीं रख पा रहे हैं और आईंदा भी नहीं रख पायेंगे तो उनके लिए शरई हुक्म क्या है। मुफ्ती अजहर ने जवाब दिया कि वह लोग एक रोजे के बदले किसी गरीब को दो वक्त का खाना खिलाएं या उसकी कीमत अदा करें। रोजे के कफ्फारे के बारे में सवाल हुआ तो मुफ्ती साहब ने बताया कि एक रोजा बिना शरई उज्र छोड़ने वाले को 60 रोजेलगातार रखना होगा या 60 गरीबों को सुबह शाम दो वक्त का खाना खिलाना होगा। तब जाकर एक रोजे का कफ्फारा अदा होगा।

इफ्तार और सहरी का वक्त

गुरुवार शुक्रवार

इफ्तार सहरी

सुन्नी 6:44 3:33

शिया 6:50 3:26

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  • Web Title:Roja not break due to Injection or blood transfusion