सिर्फ बुजुर्ग नहीं; अब किशोरों को भी हो रहा गठिया, जानिए कारण
Gorakhpur News - गठिया को अक्सर बुजुर्गों की बीमारी माना जाता है, लेकिन अब यह धीरे धीरे नई उम्र के युवाओं और बच्चों में भी देखने को मिल रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने बताया कि बच्चों में….

गठिया को आमतौर पर बुजुर्गों की बीमारी माना जाता है, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। यह बीमारी बच्चों को भी हो सकती है। खास तौर पर अगर गर्भवती को जोड़ों में दर्द और गठिया की समस्या है तो होने वाले बच्चों में भी यह बीमारी हो सकती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने बताया कि बच्चों में गठिया के मामले अब सामने आ रहे हैं। एक लाख में 14 बच्चे गठिया के पीड़ित होते हैं।
ऑर्थोपेडिक के डॉ. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि युवा और किशोर में गठिया के मामले सामने आ रहे हैं। इसकी वजह गलत पोश्चर से बैठना है। खासतौर से लैपटॉप व कंप्यूटर का प्रयोग करते समय युवा सही पोश्चर से नहीं बैठते। इसका खामयाजा उन्हें जोड़ों के दर्द में भुगतना पड़ता है। वहीं, विशेषज्ञ डॉ. भारतेंद्र जैन ने बताया कि गठिया को लेकर घबराना नहीं चाहिए। इस बीमारी के संकेत शरीर में मिलने लगते हैं। खास तौर पर गर्भवती को खून की जांच जरूर करानी चाहिए। खून की जांच से होने वाले बच्चों में गठिया का पता चल सकता है।
यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से भी जुड़ी है। कई बार शरीर की इम्युनिटी ही गठिया का कारक बन जाती है। गठिया को लेकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि गठिया सिर्फ घुटनों जोड़ों में दर्द नहीं देता। यह दिमाग, गुर्दा, फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकता है। बच्चा हो या बुजुर्ग यदि गठिया है तो उसके अन्य अंगों की क्रियाशीलता की जांच करानी चाहिए। मेडिकल कॉलेज में रोज औसतन 30 मरीज गठिया के दर्द के कारण पहुंच रहे हैं।

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