Gorakhpur News: जीडीए की जर्जर संपत्तियों का एनबीसीसी करेगा पुनर्विकास

हिन्दुस्तान, गोरखपुर
Follow us on Google News
share

Gorakhpur News: गोरखपुर विकास प्राधिकरण की जर्जर सम्पत्तियों का पुनर्विकास अब संभव होगा। राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) द्वारा जीरो फाइनेंशियल बर्डन मॉडल पर इस कार्य को अंजाम दिया जाएगा। इसमें पुराने आवंटियों की सहमति जरूरी होगी और जीडीए को एक निर्धारित हिस्सा मिलेगा।

जीडीए की जर्जर संपत्तियों का एनबीसीसी करेगा पुनर्विकास
जीडीए की जर्जर संपत्तियों का एनबीसीसी करेगा पुनर्विकास

Gorakhpur News: गोरखपुर। राजीव दत्त पाण्डेय गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की वर्षों पुरानी और जर्जर संपत्तियों के दिन अब बहुरने की उम्मीद है। राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) लिमिटेड के माध्यम से इन संपत्तियों का शून्य वित्तीय भार (जीरो फाइनेंशियल बर्डन) मॉडल पर पुनर्विकास कराएगा। जीडीए बोर्ड ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक सहमति देते हुए विस्तृत विश्लेषण कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

प्राधिकरण की समस्या

प्राधिकरण की विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं में दशकों पहले बनाए गए कई भवन और दुकानें वर्तमान में जर्जर हो चुकी हैं। इनमें बुद्ध विहार पार्ट-सी के वर्ष 2004 में निर्मित 54 ईडब्ल्यूएस भवन, शास्त्रीपुरम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की 50 दुकानें, सिद्धार्थपुरम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की 80 दुकानें और वर्ष 2003 में बने बहुउद्देशीय शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की 62 दुकानें शामिल हैं। बुद्ध विहार पार्ट-सी के सभी 54 भवन वर्तमान में खाली हैं और जर्जर होकर कई जगह टूट चुके हैं।

दुकानों की स्थिति

शास्त्रीपुरम में 50 में से 07 दुकानें आवंटित हैं, जबकि 43 खाली हैं। सिद्धार्थपुरम की 80 दुकानों में 68 आवंटित और 12 खाली हैं। बहुउद्देशीय शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बाइपास रोड की 62 दुकानों में 59 आवंटित और 03 खाली हैं। भवन के प्रथम और द्वितीय तल पर वाणिज्य कर विभाग का कार्यालय भी है, जो पिछले वर्ष आगजनी में क्षतिग्रस्त हुआ था। इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाना है।

ऐसे होगा पुनर्विकास

एनबीसीसी सर्वे, डिजाइन, निर्माण और विपणन की पूरी लागत आधुनिक एफएआर के इस्तेमाल से निर्मित अतिरिक्त क्षेत्र के मुद्रीकरण से जुटाएगा। पुनर्विकसित परिसर में पुराने आवंटियों को समायोजित करने के बाद एक निर्धारित हिस्सा जीडीए को मिलेगा। शेष निर्मित क्षेत्र को एनबीसीसी खुले बाजार में बेचकर लागत और विकास शुल्क की भरपाई करेगा।

आवंटियों की सहमति

पुनर्विकास पुराने आवंटियों की सहमति के बाद किया जाएगा। जीडीए को स्थल अतिक्रमण मुक्त कर एनबीसीसी को उपलब्ध कराने के साथ जरूरी प्रशासनिक और नियोजन अनुमतियां उपलब्ध कराने तथा वर्तमान आवंटियों के पुनर्वास के लिए दिशा-निर्देश तय करने होंगे। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 के तहत आगे बढ़ाई जाएगी।

खास-खास

-पुराने आवंटियों को समायोजित करने के बाद एक निर्धारित हिस्सा जीडीए को देगा

-शेष निर्मित क्षेत्र को एनबीसीसी खुले बाजार में बेच लागत और विकास शुल्क जुटाएगा

-बुद्ध विहार के 54 ईडब्ल्यूएस भवन समेत पुराने कॉम्प्लेक्स होंगे विकसित

-जर्जर सम्पत्तियों का पुनर्विकास पुराने आवंटियों की सहमति के बाद ही होगा

सामान्य प्रश्न

गोरखपुर विकास प्राधिकरण की जर्जर संपत्तियों का पुनर्विकास कौन करेगा?
जर्जर संपत्तियों का पुनर्विकास राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) द्वारा किया जाएगा।
Hindustan | Bureau

लेखक के बारे में

Hindustan | Bureau

हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में 'हिन्दुस्तान' विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्‍यों सह‍ित देश की राजधानी द‍िल्‍ली और एनसीआर (नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्‍करण प्रकाश‍ित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपर‍ि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद व‍िस्‍तार से न्‍यूज र‍िपोर्ट प्रकाश‍ित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।

और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

Hindi NewsUP NewsगोरखपुरGorakhpur News: जीडीए की जर्जर संपत्तियों का एनबीसीसी करेगा पुनर्विकास