रिटायर चिकित्साधिकारी को 8 दिन ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रख 1.58 करोड़ की ठगी
Gorakhpur News - गोरखपुर की 64 वर्षीय रिटायर चिकित्साधिकारी को जालसाजों ने 8 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर 1.58 करोड़ रुपये हड़प लिए। जालसाजों ने खुद को एटीएस और एनआईए का अधिकारी बताकर डॉक्टर को डराया और उनके पैसे ट्रांसफर करा लिए। डॉक्टर ने साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया है।

गोरखपुर के कैंट इलाके में रहने वाली 64 वर्षीय रिटायर चिकित्साधिकारी को आठ दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखकर जालसाजों ने 1.58 करोड़ रुपये हड़प लिए। जालसाजों ने एटीएस और एनआईए और ईडी के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल की। डॉक्टर से कहा कि उनका मनी लांड्रिंग में नाम आया है। इतना सुनते ही पूर्व अधिकारी डर गईं और जालसाजों के इशारे पर निर्देश फॉलो करने लगीं। जालसाजी का अहसास होने पर डॉक्टर ने बुधवार को साइबर क्राइम थाने में केस दर्ज कराया। जानकारी के मुताबिक, कैंट इलाके में रहने वाली पूर्व चिकित्साधिकारी वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुई थीं। पति के निधन के बाद अकेली रहती हैं।
एक बेटे की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा बाहर रहता है। उन्होंने बताया कि 13 फरवरी 2026 को व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस, एनआईए और ईडी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज है। जालसाजों ने एक एटीएम कार्ड दिखाकर कहा कि केनरा बैंक खाते से 50 लाख रुपये का लेनदेन संदिग्ध है। गिरफ्तारी और एक साल की जेल की धमकी देकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रहने को कहा गया। गत 13 से 21 फरवरी तक जालसाज लगातार फोन पर जुड़े रहे। बैंक जाते समय भी मोबाइल ऑन और चार्जिंग पर रखने को कहा गया। इस दौरान उन्होंने सारी एफडी तुड़वा दी। बची हुई 30 लाख रुपये की एफडी भी 21 फरवरी को तुड़वाकर रकम ट्रांसफर करा ली।
इस तरह अलग-अलग खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये जालसाजों ने ट्रांसफर करा लिए। परिवार को जानकारी देने से मना किया गया। गत 24 फरवरी को जालसाजों ने ईडी की फर्जी रसीदें भेजीं और भरोसा दिलाया कि पैसे की जांच होने के बाद वापस आ जाएगा। जब रकम वापस नहीं आई तो उन्हें ठगी का एहसास हुआ। बुधवार को उन्होंने साइबर थाने में तहरीर देकर केस दर्ज कराया है।
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