Gorakhpur News: तीसरे दिन डिब्बे से मुक्त हुआ निराश्रित कुत्ता, राहत की सांस
Gorakhpur News: राजीव दत्त पाण्डेय। गोरखपुर। तीन दिन तक मुंह में प्लास्टिक का डिब्बा फंसे रहने
Gorakhpur News: राजीव दत्त पाण्डेय। गोरखपुर।
तीन दिन तक मुंह में प्लास्टिक का डिब्बा फंसे रहने से भूख-प्यास से जूझ रहे निराश्रित कुत्ते को आखिरकार गुरुवार देर रात को नया जीवन मिल गया। दिग्विजयनगर क्षेत्र में नगर निगम की डॉग कैचर टीम ने लगातार तीन दिन की तलाश के बाद कुत्ते को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसके मुंह से डिब्बा निकाल दिया। इस दौरान स्थानीय नागरिकों और वार्ड पार्षद ऋषि मोहन वर्मा का भी लगातार सहयोग रहा।
डिब्बा मुंह में फंस जाने के कारण कुत्ता
कुत्ता न तो खाना खा पा रहा था और न ही पानी पी पा रहा था। वह दर्द और घबराहट में लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर भागता रहा, जिससे उसे पकड़ना आसान नहीं था। उसके भोकने की आवाज भी डिब्बे में घुट कर रह जा रही थी। उसकी हालत देखकर पार्षद एवं स्थानीय नागरिक चिंतित थे। आशंका जता रहे थे कि यदि समय रहते उसे नहीं पकड़ा गया तो भूख-प्यास से उसकी मौत भी हो सकती थी।
तीसरे दिन डॉग कैचिंग टीम को मिली सफलता
सूचना मिलने के बाद पशु कल्याण अधिकारी डॉ रोबिन चंद्रा के निर्देश पर नगर निगम की डॉग कैचर अखिलेश और दूसरा आनंद की टीम लगातार तीन दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर उसकी तलाश करती रही। दिग्विजयनगर वार्ड के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा और स्थानीय नागरिक अभिनव वर्मा भी टीम को कुत्ते की लोकेशन बताते रहे। गुरुवार की देर रात कुत्ता औघड़ बाबा स्थान के पास दिखाई दिया दिखाई देने पर टीम ने सावधानीपूर्वक उसे पकड़कर उसके मुंह में फंसा प्लास्टिक का डिब्बा निकाल दिया। मंगलवार के भूखे प्यासे कुत्ता ने डिब्बा हटते ही पानी पिया और भोजन किया, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। रेस्क्यू टीम के अखिलेश ने बताया कि इसी तरह बौलिया रेलवे कॉलोनी में लोहे की सीकड़ से बंधे कुत्ते को मंगलवार को रेस्क्यू किया गया, वह भी दो दिन वहां बंधा पड़ा था।
खाने पीने की सामग्री सड़कों पर पैकेजिंग कचरे में न फेंके
इस घटना ने एक बार फिर सड़क पर फेंके जाने वाले प्लास्टिक और खाद्य पैकेजिंग कचरे से आवारा पशुओं को होने वाले खतरे की ओर ध्यान खींचा है। हेरिटेज फाउंडेशन की संरक्षिका डॉ अनिता अग्रवाल ने स्थानीय लोगों ने अपील की कि खाने-पीने के डिब्बे और प्लास्टिक के कंटेनर खुले में फेंकने से पहले उन्हें काटकर या कुचलकर ही कूड़ेदान में डालें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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