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17 सितम्बर, 2020|3:31|IST

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फूड से जुड़ी फैक्ट्रियों में कोरोना काल में भी रिकॉर्ड प्रोडक्शन

फूड से जुड़ी फैक्ट्रियों में कोरोना काल में भी रिकॉर्ड प्रोडक्शन

कोरोना काल में जिन चुनिंदा फैक्ट्रियों में मांग पर कोई असर नहीं पड़ा उनमें फूड से जुड़ी प्रमुख हैं। ब्रेड से लेकर फ्लोर मिलों में खूब मांग है। फ्लोर मिलें तो अन्य प्रदेशों की जरूरत भी पूरा कर रही हैं। बिस्किट की फैक्ट्री तो पहली बार पूरी क्षमता से चली। फूड से जूड़ी फैक्ट्रियां सालाना करीब 200 करोड़ का कारोबार कर रही हैं।

लॉकडाउन के बाद बंदिशों के साथ खुल रहे बाजार में फूड से जुड़ी फैक्ट्रियों में मजदूरों का संकट था। बाजार खुलने के साथ ही ट्रांसपोर्ट की सुविधा सुगम होने का असर फैक्ट्रियों में मजदूरों की उपस्थिति पर पड़ा है। इसे खुद उद्यमी स्वीकार कर रहे हैं। क्रेजी ब्रेड के मालिक नवीन अग्रवाल कहते हैं कि मजदूरों की कमी अब नहीं है। मांग के लिहाज से उत्पादन कर बाजार में आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इसी तरह बिस्किट बनाने वाली फैक्ट्री ने तो लॉकडाउन में भी रिकार्ड उत्पादन किया था। गीडा में उद्यमी अशोक अग्रवाल ने वर्ष 2000 में ब्रांडेड बिस्किट की फैक्ट्री लगाई थी। इस वर्ष के शुरूआत में बिस्किट की मांग को लेकर खासा उत्साह नहीं था। लेकिन 25 मार्च से देशव्यापी लॉकडाउन में बिस्किट की खूब डिमांड हो गई।

उद्यमी अशोक अग्रवाल कहते हैं कि लॉकडाउन से पहले जितनी मांग थी, उतना उत्पादन 15 दिन ही फैक्ट्री चलाने पर पूरा हो जाता था। अब फैक्ट्री में महीने में 25 दिन उत्पादन हो रहा है। गीडा की बिस्किट फैक्ट्री में लॉकडाउन से पहले करीब 36 टन बिस्किट का उत्पादन रोज हो रहा था। मांग बढ़ने के बाद यह उत्पादन 46 टन तक पहुंच गया है। इसी तरह गोरखनाथ क्षेत्र में ब्रेड बनाने वाली एक फैक्ट्री में लॉकडाउन में उत्पादन बढ़ गया।

दक्षिण के प्रदेशों में जाता है उत्पाद

गीडा के फ्लोर मिलों में बने सूजी, मैदा, आटा से लेकर पशुओं के दाने की डिमांड सिर्फ पूर्वांचल में ही नहीं दक्षिण के प्रदेशों में भी है। पशुओं के दाने की आपूर्ति आंध्र प्रदेश को होती है। इसी तरह सूजी, मैदा और आटे की खपत सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं सीमावर्ती बिहार और नेपाल में भी होती है।

बोले उद्यमी

लॉकडाउन के समय मजदूरों की कमी से उत्पादन प्रभावित हुआ था। अब धीरे-धीरे स्थिति पूरी तरह सामान्य हो गई है। प्रोडक्शन भी लगभग सामान्य हो गया है। अब कस्बाई इलाकों में भी आपूर्ति सामान्य हो गई है। बाजार खुलने का असर है।

नवीन अग्रवाल, क्रेजी ब्रेड

लॉकडाउन में भी उत्पादन को कम नहीं होने दिया गया। हालांकि मजदूरों की कमी थी। फ्लोर मिल में बने सूजी, मैदा और आटे की आपूर्ति स्थानीय ही नहीं अन्य प्रदेशों को भी हो रही है। डिमांड अच्छी होने से पूरी क्षमता से उत्पादन हो रहा है।

मयंक अग्रवाल, निदेशक, गैलेंट इस्पात

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  • Web Title:Record production even in the Corona era in food-related factories