Rani Talash Kunwari was like Rani Lakshmi bai of East UP - पूर्वांचल की लक्ष्मीबाई थीं रानी तलाश कुंवरि DA Image
12 नबम्बर, 2019|8:24|IST

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पूर्वांचल की लक्ष्मीबाई थीं रानी तलाश कुंवरि

पूर्वांचल की रानी लक्ष्मीबाई कही जाने वाली देश की खातिर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाली अमोढ़ा की रानी तलाश कुंवरि बस्ती की आन, बान और शान हैं। अंग्रेजों से लोहा लेती रहीं। अपने इलाके में अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम चलाया। अपनी तलवार से अंग्रेजों के सिर धड़ से उड़ाए। उनके जीवन की संघर्ष गाथा को आज भी अमोढ़ा का ध्वस्त किला सुनाता है, जिसे अंग्रेजों ने अपने तोपों से उड़ा दिया था। 

बस्ती-फैजाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर छावनी के निकट स्थित अमोढ़ा में पति राजा जंगबहादुर सिंह के निधन पर राजगद्दी की कमान 1853 में संभाल लीं। रानी अमोढ़ा भी झांसी की रानी की तरह निसंतान थीं। अंग्रेजों ने राज्य हड़पने की साजिश शुरू की, जिसका रानी ने हर मोर्चे पर मुबाकला किया। रानी तलाश कुंवरि ने 1857 के क्रांति की खबर मिलने के बाद अपने भरोसेमंद लोगों के साथ बैठक कीं। देशी सैनिकों ने बस्ती-फैजाबाद के सड़क और जल परिवहन अंग्रेजों के लिए ठप करा दिया था। 

रानी तलाश कुंवरि के प्रोत्साहन पर क्षेत्रीय नागरिकों ने अंग्रेजों की छावनी पर हमला बोल दिया था। अंग्रेजों ने नेपाली सेना की मदद ली। जनवरी 1858 अंग्रेजी सेनाओं ने रोक्राफ्ट के नेतृत्व में अमोढ़ा की ओर कूच की। जनवरी 1858 में हुई लड़ाई में अंग्रेजों को हार का मुंह देखना पड़ा था। हार से बौखलाए अंगे्रजों ने अपनी फौज बुलाया। भारी संख्या में यहां के लिए तोपों का लाया गया। 

गिरफ्तार होने के बजाए कटार से काट लिया था अपना गला
रानी ने अपना किला छोड़ कर दूसरे स्थान से युद्ध का संचालन किया। नदी के किनारे अंगे्रजों को लगातार मात मिल रही थी। कर्नल रोक्राफ्ट ने नौसेना को भी बुला लिया। नौसेना का स्टीमर घाघरा नदी पर हथियारों के साथ तैनात हो गए। नेपाली सैनिकों की पर्याप्त संख्या अमोढ़ा व आसपास पहुंच गई। कर्नल रोक्राफ्ट पूर्व नियोजित रणनीति के तहत दो तरफ से रानी की सेना पर हमला कर दिया। उनका घोड़ा पखेरवा के पास ही घायल होकर मर गया। वह पखेरवा किले पर पहुंच गयीं। अपने समर्थकों से कहा कि यह मेरा आखिरी दिन है। जीते जी मैं उनके गिरफ्त में नहीं आऊंगी और 2 मार्च 1958 को उन्होंने अपनी कटार से जीवन लीला समापत कर ली।

रानी चौरा के टीले में दफन है उनका शव
रानी की मौत बाद उनके शव को सहयोगियों ने छिपा लिया। बाद में शव को अमोढा राज्य की कुल देवी समय माता भवानी का चौरा के पास दफना दिए। वहां पर मिट्टी का टीला बना दिया। यह जगह रानी चौरा के नाम से ही मशहूर है। पखेरवा में जहां रानी का घोड़ा मर गया था उसे भी स्थानीय ग्रामीणों ने वहीं दफना दिया। इस जगह पर एक पीपल का पेड़ आज भी मौजूद है। लोगों के लिए यह जगह श्रद्धा का केन्द्र है।

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